नई दिल्ली/बीजिंग/इस्लामाबाद: चीन की यात्रा के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने और इसके बाद चीन-पाकिस्तान के संयुक्त बयान में इस विषय पर टिप्पणी किए जाने के बाद कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है। भारत ने इन टिप्पणियों को सख्ती से खारिज करते हुए अपना स्पष्ट रुख दोहराया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख देश के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ 23 से 26 मई तक चीन के दौरे पर थे, जहां उन्होंने चीन के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान जारी संयुक्त बयान में कश्मीर मुद्दे का उल्लेख किया गया और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत बातचीत से हल करने की बात कही गई।
चीन-पाकिस्तान के बयान में क्या कहा गया
संयुक्त बयान में पाकिस्तान ने चीन को कश्मीर की स्थिति से अवगत कराया, जिसके बाद चीन ने इसे एक “पुराना मुद्दा” बताते हुए शांति वार्ता के माध्यम से समाधान की बात कही। साथ ही संयुक्त राष्ट्र के नियमों और भारत-पाकिस्तान के बीच हुए समझौतों का पालन करने की अपील भी की गई।
इसके अलावा दोनों देशों ने ट्रांसबाउंड्री वॉटर कोऑपरेशन और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) जैसे मुद्दों पर सहयोग जारी रखने की बात भी दोहराई।
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
भारत के विदेश मंत्रालय ने चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान को सिरे से खारिज कर दिया। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर किसी भी तरह की बाहरी टिप्पणी अस्वीकार्य है और यह भारत की संप्रभुता से जुड़ा मामला है।
भारत ने CPEC को लेकर भी आपत्ति जताई और कहा कि यह परियोजनाएं उस क्षेत्र में बनाई जा रही हैं जो भारत की संप्रभु भूमि का हिस्सा है और जिस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि 1963 में चीन-पाकिस्तान के बीच हुए सीमा समझौते को भारत कभी मान्यता नहीं देता।
पानी और क्षेत्रीय सहयोग पर विवाद
संयुक्त बयान में जल संसाधन सहयोग का भी उल्लेख किया गया था, जिस पर भारत ने सवाल उठाते हुए कहा कि चीन और पाकिस्तान के बीच साझा सीमा न होने के कारण ऐसे किसी सहयोग का कोई आधार नहीं बनता।
कूटनीतिक संदेश और आगे की स्थिति
इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्रीय कूटनीति में एक बार फिर तनाव के संकेत देखे जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी भारत के लिए रणनीतिक चुनौती बनी हुई है, जबकि भारत अपने रुख पर पूरी तरह अडिग नजर आ रहा है।
इसी बीच यह भी चर्चा में है कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे पर और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है।