इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया में नए कूटनीतिक समीकरणों के बीच अमेरिका के प्रस्तावित अब्राहम अकॉर्ड विस्तार को लेकर पाकिस्तान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से मुस्लिम देशों से इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने की अपील के बाद पाकिस्तान ने इजराइल को मान्यता देने से साफ इनकार किया है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि उनका देश अपनी मौलिक नीतिगत और वैचारिक रुख से समझौता नहीं कर सकता। पाकिस्तान लंबे समय से फिलिस्तीन के समर्थन में अपनी नीति बनाए हुए है और इजराइल को मान्यता देने का मुद्दा वहां संवेदनशील माना जाता है।
इस बीच, कथित तौर पर ट्रंप की ओर से विभिन्न मुस्लिम और अरब देशों के नेताओं के साथ हुई एक उच्च-स्तरीय बातचीत में अब्राहम अकॉर्ड के विस्तार पर चर्चा की गई। प्रस्ताव के तहत पाकिस्तान, मिस्र और जॉर्डन जैसे देशों को भी इस समझौते में शामिल करने की बात सामने आई है।
अमेरिका की शर्तों और पाकिस्तान की चुनौती
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका की ओर से यह संकेत दिया गया कि क्षेत्रीय शांति प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए कुछ देशों को इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने पर विचार करना होगा। हालांकि पाकिस्तान के लिए यह कदम घरेलू राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान इजराइल को मान्यता देता है तो उसे घरेलू स्तर पर विरोध का सामना करना पड़ सकता है, जबकि इनकार की स्थिति में अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से संबंधों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिकी नेताओं की प्रतिक्रिया
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की क्षेत्रीय नीति और कुछ सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंता जताते हुए क्षेत्रीय स्थिरता के संदर्भ में स्पष्टता की मांग की है।
पृष्ठभूमि
अब्राहम अकॉर्ड 2020 में शुरू हुआ एक कूटनीतिक ढांचा है, जिसके तहत कुछ अरब देशों और इजराइल के बीच संबंध सामान्य किए गए थे। इसका विस्तार लंबे समय से अमेरिका की विदेश नीति का हिस्सा रहा है।
निष्कर्ष
फिलहाल इस पूरे मुद्दे पर पाकिस्तान और अमेरिका दोनों की ओर से औपचारिक रूप से आगे की रणनीति स्पष्ट नहीं की गई है, लेकिन क्षेत्रीय कूटनीति में तनाव और राजनीतिक बयानबाजी के चलते स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय नजर बनी हुई है।