बिलासपुर। Chhattisgarh High Court ने नारायणपुर के चर्चित नक्सल प्रकरण में बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि केवल सरकारी प्रक्रियाओं, फाइलों की आवाजाही और प्रशासनिक देरी का हवाला देकर कानून में तय समयसीमा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha और न्यायमूर्ति Ravindra Kumar Agrawal की खंडपीठ ने 182 दिन की देरी को लापरवाहीपूर्ण और अस्पष्ट बताते हुए देरी माफी आवेदन को अस्वीकार कर दिया। इसके साथ ही राज्य सरकार की अपील भी समयसीमा से बाधित मानते हुए स्वतः खारिज हो गई।
दरअसल, मामला नारायणपुर जिले के ओरछा थाना क्षेत्र में दर्ज एक नक्सल प्रकरण से जुड़ा है। इस मामले में चंपा कर्मा, मांगी मंडावी, संकू मंडावी और लच्छू मंडावी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, आर्म्स एक्ट और Unlawful Activities (Prevention) Act (यूएपीए) की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।
विशेष न्यायाधीश, एनआईए एक्ट एवं अनुसूचित अपराध न्यायालय, नारायणपुर ने 11 सितंबर 2025 और 24 सितंबर 2025 को आरोपियों को डिफॉल्ट बेल प्रदान की थी। राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की, लेकिन यह अपील निर्धारित समयसीमा से 182 दिन बाद दाखिल की गई।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने दलील दी कि विधि एवं विधायी कार्य विभाग से प्रस्ताव आने, शासन स्तर पर मंजूरी मिलने, दस्तावेज जुटाने और फाइल प्रक्रिया पूरी होने में समय लग गया। उन्होंने कहा कि शासन एक बहुस्तरीय व्यवस्था है, जहां विभागीय औपचारिकताओं के कारण विलंब हुआ।
हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने Postmaster General vs Living Media India Ltd और State of Madhya Pradesh vs Ramkumar Choudhary जैसे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि देरी माफी कोई अधिकार नहीं बल्कि अपवाद है। पर्याप्त और ठोस कारणों के अभाव में देरी स्वीकार नहीं की जा सकती।
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि सरकारी विभागों पर विशेष जिम्मेदारी होती है कि वे समयसीमा के भीतर गंभीरता और तत्परता से कार्य करें। यदि सरकारी मशीनरी लापरवाही करती है तो उसका लाभ उसे नहीं दिया जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सिर्फ यह कहना कि फाइल विभागों में चलती रही, देरी माफ करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। इसी के साथ हाईकोर्ट ने देरी माफी आवेदन खारिज करते हुए राज्य सरकार की अपील भी निरस्त कर दी।