बीजिंग। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 9 साल बाद चीन दौरे पर जाने के दौरान अमेरिकी डेलीगेशन ने सुरक्षा को लेकर कड़ी सतर्कता बरती। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जासूसी की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए डेलीगेशन के सदस्यों ने अपने निजी फोन और लैपटॉप घर पर छोड़ दिए और केवल अस्थायी, खाली डिवाइस ही ले गए हैं।
अमेरिकी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि दौरे के दौरान कहीं भी USB का इस्तेमाल न किया जाए और यात्रा समाप्ति के बाद इन डिवाइस को पूरी तरह फॉर्मेट या नष्ट कर दिया जाएगा, ताकि अमेरिकी नेटवर्क में किसी प्रकार का वायरस या डेटा ब्रीच न हो। इन अस्थायी उपकरणों का इस्तेमाल केवल दौरे के दौरान जरूरी बातचीत और औपचारिक कार्यों तक ही सीमित रहेगा।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने चीन में हाल के दिनों में बढ़ती जासूसी गतिविधियों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इसी को देखते हुए डेलीगेशन की यह सावधानीपूर्वक तैयारी की गई है।
ट्रंप के इस दौरे का उद्देश्य चीन के साथ व्यापारिक विवादों को सुलझाना और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके अलावा, ईरान युद्ध, ताइवान को हथियार आपूर्ति और अन्य सुरक्षा मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
गुरुवार को बीजिंग में ट्रंप और राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। यह पिछले 10 साल में किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति का पहला चीन दौरा है, और ट्रंप की यह यात्रा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्तों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।