नई दिल्ली | सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए अब नया सख्त नियम लागू होने वाला है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने इन्फ्लुएंसर एथिक्स कोड जारी किया है, जिसका मकसद डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी और भ्रामक कंटेंट को रोकना है। अब पेड प्रमोशन छुपाना, गलत जानकारी फैलाना और एआई/डीपफेक वीडियो बनाना महंगा पड़ेगा।
नया कोड क्यों आया?
सोशल मीडिया पर पहले कोई नियम नहीं था। इन्फ्लुएंसर्स अक्सर हेल्थ, फाइनेंस या लीगल सलाह बिना योग्यतानुसार देते थे, जिससे आम लोग प्रभावित होते थे। पेड प्रमोशन को छुपाना और गलत निवेश या दवा संबंधी जानकारी देना आम समस्या बन गया था।
सरकार ने अब एथिक्स कोड के तहत यह तय किया है कि:
- किसी भी पेड प्रमोशन को स्पष्ट रूप से AD / Sponsored / Paid Promotion टैग के साथ दिखाना अनिवार्य होगा।
- हेल्थ और फाइनेंस सेक्टर में सलाह देने वाले क्रिएटर्स को अपनी क्वालिफिकेशन और डिस्क्लेमर दिखाना होगा।
- एआई और डीपफेक द्वारा बनाए गए कंटेंट पर स्पष्ट AI-Generated / Synthetic Media लेबल देना होगा।
डीपफेक और एआई कंटेंट पर सख्ती
किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसका डीपफेक बनाना अब गंभीर अपराध माना जाएगा। यह सिर्फ एथिक्स का उल्लंघन नहीं, बल्कि आईटी एक्ट के तहत दंडनीय होगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 24 घंटे के भीतर शिकायत पर कार्रवाई करनी होगी।
जुर्माने और कानूनी कार्रवाई
- नियमों का उल्लंघन करने पर 10 लाख से 50 लाख रुपये तक का जुर्माना।
- गंभीर मामलों में सोशल मीडिया अकाउंट को बैन करने की सिफारिश।
- क्रिएटर्स को अपनी डिजिटल पहचान सुरक्षित रखने और वॉटरमार्किंग जैसे तकनीकी उपाय अपनाने की सलाह।
डेटा और क्रेडिबिलिटी
एआई टूल्स द्वारा दी गई गलत जानकारी का दोष अब क्रिएटर्स पर माना जाएगा। हेल्थ और फाइनेंस मामलों में सत्यापित स्रोतों जैसे WHO या RBI के डेटा का उपयोग करना अनिवार्य होगा।
निष्कर्ष
डिजिटल मीडिया की दुनिया अब साफ और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रही है। इन्फ्लुएंसर्स के लिए यह संदेश है कि तकनीक का इस्तेमाल समझदारी और ईमानदारी से करें, वरना भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।