नई दिल्ली| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई से यूरोप के पांच देशों — यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली — की यात्रा पर हैं। जबकि 10 और 11 मई को उन्होंने आम नागरिकों से गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं को टालने की अपील की थी, इस कदम ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पीएम की ये यात्रा सिर्फ ‘वेकेशन’ नहीं है, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक मजबूरी है। यात्रा के दौरान भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन, सेमीकंडक्टर और एआई तकनीक में सहयोग, ऊर्जा और रक्षा समझौते जैसे कई महत्वपूर्ण एजेंडे पर चर्चा होगी।
मुख्य उद्देश्य और फायदे:
- ऊर्जा सुरक्षा: नॉर्वे की क्लीन एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक से भारत की अरब देशों पर निर्भरता कम होगी और ईंधन की कीमतों पर नियंत्रण में मदद मिलेगी।
2. सेमीकंडक्टर और AI: नीदरलैंड और स्वीडन की हाई-टेक कंपनियों के साथ समझौते से भारत में एआई और रोबोटिक्स आधारित नौकरियां बढ़ेंगी।
3. रक्षा और रणनीति: इटली और स्वीडन के साथ मिलकर भारत अपनी सेना को आधुनिक बनाने के लिए एडवांस्ड हथियार और तकनीक विकसित करेगा।
4. निवेश और रोजगार:नॉर्डिक देशों से 100 अरब डॉलर तक निवेश का वादा, जो देश में डिजिटल और ग्रीन जॉब्स पैदा करेगा।
5. वैश्विक तकनीकी बढ़त:भारत सिर्फ बाजार नहीं बल्कि तकनीकी निर्माता और इनोवेटर बन सकेगा।
सरकार का कहना है कि आम जनता को विदेशी यात्रा टालने की अपील घरेलू बचत और विदेशी मुद्रा संरक्षण के लिए है, जबकि पीएम की यात्रा देश के लिए लंबी अवधि के निवेश और रणनीतिक सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह यात्रा भारत को वैश्विक तकनीकी और आर्थिक परिदृश्य में मजबूत स्थिति दिला सकती है, जिससे आम नागरिकों के जीवन और रोजगार के अवसरों पर सकारात्मक असर पड़ेगा।