पश्चिम बंगाल| पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने प्रचंड बहुमत हासिल किया, 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर। इस जीत के साथ ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का लगातार 15 वर्षों से चला आ रहा शासन समाप्त हो गया। भवानीपुर विधानसभा सीट से खड़ी निवर्तमान सीएम ममता बनर्जी को भी हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणाम के तुरंत बाद, टीएमसी के करीबी अधिकारी और सलाहकार अपने पदों से इस्तीफा देने लगे हैं।
मुख्य सलाहकार अलापन बंद्योपाध्याय का इस्तीफा:
ममता के सबसे वफादार माने जाने वाले मुख्य सलाहकार और पूर्व मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय ने चुनाव परिणाम आने के अगले दिन ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अलापन को ममता प्रशासन की “आंख और कान” माना जाता था, और 2021 में ‘यास’ तूफान के विवाद के दौरान ममता ने उन्हें बचाने के लिए केंद्र सरकार से भी टकराव किया था।
अर्थशास्त्री अभिरूप सरकार ने छोड़ा पद:
टीएमसी की आर्थिक नीतियों के मुख्य वास्तुकार अभिरूप सरकार ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि उनकी नियुक्ति राजनीतिक थी, और अब जब टीएमसी चुनाव हार गई है, उनके पास पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता का इस्तीफा:
राज्य के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने भी राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा। वे दिसंबर 2023 से इस पद पर थे और इससे पहले 2017 से 2021 तक भी यही पद संभाल चुके थे। उनका जिम्मा सरकार को अदालती मामलों में बचाना था, जिसमें शिक्षक भर्ती घोटाले और चुनावी हिंसा के मामले शामिल थे।
मीडिया और अन्य सलाहकार भी छोड़ रहे पद:
इसके अलावा, ममता के मीडिया सलाहकार और वरिष्ठ पत्रकार भी अपने पदों से किनारा कर रहे हैं। इनमें वे लोग शामिल हैं जिन्हें सरकार ने विभिन्न अकादमियों और निगमों में महत्वपूर्ण पद दिए थे।
टीएमसी का इकोसिस्टम ढह गया:
इस हार और लगातार इस्तीफों के बाद ममता बनर्जी का राजनीतिक इकोसिस्टम बिखरता नजर आ रहा है। बीजेपी की भगवा सुनामी ने टीएमसी के मजबूत किले को कमजोर कर दिया है।