नई दिल्ली। ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार करते हुए, भारत सरकार ने स्वामित्व योजना के तहत छत्तीसगढ़ के सभी 15,791 अधिसूचित आबादी वाले गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। केंद्रीय कैबिनेट मंत्री ललन सिंह ने रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल को बताया कि संपत्ति कार्ड तैयार करने और वितरित करने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। सर्वेक्षण किए गए क्षेत्रों में से 2,709 गांवों के लिए संपत्ति कार्ड पहले ही तैयार किए जा चुके हैं। अब तक कुल 2,07,600 संपत्ति कार्ड बनाए गए हैं, जिनमें से 1,33,487 कार्ड उनके सही मालिकों को सफलतापूर्वक वितरित किए जा चुके हैं । इस विशाल अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्ति के मालिकों को स्पष्ट “अधिकारों का रिकॉर्ड (Record of Rights)” प्रदान करना है।
इस पहल के परिवर्तनकारी प्रभाव पर जोर देते हुए, बृजमोहन अग्रवाल ने कहा “पंचायती राज योजनाएं, विशेष रूप से स्वामित्व योजना, ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण की रीढ़ हैं। हमारे ग्रामीणों को औपचारिक संपत्ति अधिकार प्रदान करके, हम उन्हें केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं दे रहे हैं; बल्कि हम उनकी वित्तीय क्षमता के द्वार खोल रहे हैं। ये संपत्ति कार्ड हमारे ग्रामीण परिवारों को संस्थागत ऋण तक पहुंचने और मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में औपचारिक रूप से जुड़ने में सक्षम बनाएंगे, जिससे अंततः हमारी ग्राम पंचायतों की नींव मजबूत होगी।” योजना का सफल कार्यान्वयन ग्राम पंचायतों और राज्य राजस्व अधिकारियों के बीच सहज समन्वय द्वारा संचालित हो रहा है। ये जमीनी स्तर के संस्थान सटीक जमीनी सीमांकन, मानचित्र सत्यापन और संपत्ति कार्ड के
शीघ्र निर्गमन को सुनिश्चित करने के लिए एक साथ मिलकर काम करते हैं। मंत्रालय ने उल्लेख किया कि इन संपत्ति कार्डों के साथ, ग्रामीण संपत्ति के मालिक अब बैंकों से आसानी से ऋण प्राप्त कर सकते हैं, जिससे छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में वित्तीय समावेशन को काफी बढ़ावा मिलेगा । राज्य में क्रियान्वयन के मामले में महासमुंद जिले ने सबसे अधिक 39,626 कार्ड वितरित किए हैं, जिसके बाद धमतरी और बलौदाबाजार-भाटापारा का स्थान है।