ब्रज में ‘होरा’ की धूम: जानिए चंद्रग्रहण के दौरान क्या करें और क्या नहीं

मथुरा: वृंदावन में होली का पर्व जोरों पर है, जहां गलियां रंगों से सराबोर हो रही हैं, तो इसके साथ ही साल का पहला चंद्रग्रहण भी देखने को मिलेगा। इस पर धर्माचार्य देवकी नंदन और वृंदावन की श्रीहित मोहित मराल जी महाराज ने विचार व्यक्त किए। देवकी नंदन ने कहा कि ब्रज में होली 41 दिनों तक मनाई जाती है।

उन्होंने कहा, “ऐसा कहते हैं कि संसार में होली मनाई जाती है और वृंदावन में होरा होता है क्योंकि इस पर्व पर भगवान श्रीकृष्ण अपने प्रेम के रंग में सबको रंग लेते हैं। वृंदावन की होली में देश-विदेश से लोग आते हैं जो प्रेम की तलाश में होते हैं। एक बार इस रंग में रंग जाने के बाद वे कभी उबर नहीं पाते। इससे उनका यहां और वहां दोनों जगह कल्याण होता है। होली का आनंद अद्भुत है।”

उन्होंने सभी दर्शकों को निमंत्रण देते हुए कहा कि 2 मार्च को प्रियकांतजी के मंदिर में होली मनाई जाएगी और सभी लोग जरूर आएं। उन्होंने कहा, मैं सभी से कहना चाहूंगा कि होली के दिन नशे से दूर रहें। न भांग का नशा, न शराब का और न ही जुआ। अगर कुछ लोग ऐसा करते हैं, तो वे होली को बदनाम कर रहे हैं। मैं सभी सनातनियों से निवेदन करूंगा कि किसी को भी पर्व के दौरान शराब, मांस का सेवन करने की आवश्यकता नहीं है। इस पर्व को शुद्धता से मनाओ ताकि कन्हैया का रंग आप पर अच्छे से चढ़े व प्रहलाद जी की चरण धूल भी भक्तों पर चढ़े।

उन्होंने चंद्रग्रहण पर कहा कि इस बार के ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ करने का लाभ मिलता है। उन्होंने कहा, “सामान्य दिनों में तप, यज्ञ, और दान का फल अलग होता है लेकिन ग्रहण में किए गए सत्कर्मों का लाभ सौ गुना ज्यादा मिलता है। साधकों के लिए यह वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टि से खास है। भारत में पूरा ग्रहण नहीं दिखेगा लेकिन मोक्ष होने वाला ग्रहण दिखाई देगा।” उन्होंने कहा, “सूतक सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू हो जाएगा और ग्रहण दोपहर 3 बजे के बाद शुरू होगा। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

चाकू आदि तेज धार वाले औजार न चलाएं। वहीं, मोहित मराल जी महाराज ने कहा, “राधा वल्लभ लाल अपने भक्तों पर प्यार लूटा रहे हैं। वृंदावन में जो रस है, वह तीनों लोकों में नहीं मिलता। यहां रंगों की वर्षा हो रही है और भक्त उनके रंग में डूब रहे हैं।” ग्रहण को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि वृंदावन में तो नित्य उत्सव चलता है। यहां ग्रहण का कोई प्रभाव या प्रवेश नहीं है और यहां नित्य सेवा जारी रहेगी। शास्त्रों के अनुसार पूरे दिन भजन-कीर्तन करें।

शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *