सक्ती-साहित्य मधुशाला की संस्थापिका उषा केडिया मैसूर ने दिनांक 27/11/2021 को प्रथम ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें भारत ही नही नेपाल से भी कवियों ने अपनी भागीदारी दी।अन्तर्राष्ट्रीय अग्रवाल सम्मेलन के अध्यक्ष राजकुमार मित्तल ने उषा केडिया को एवं सभी कविगन को अपनी शुभकामनाये प्रेषित की,कार्यक्रम की शुरुआत किशोर धनावत( रायपुर छत्तीसगढ़)दीप प्रज्वलित कर की माँ शारदे की वंदना से कि साथ ही कविता क्या होती है रचना पढ़ी । नेपाल काठमांडू से जय प्रकाश जी ने बना कर गीत लब्बो पर बिठा लो खुद को कविता से मंच पर रंग बिखेरा। संगीता जी कोलकाता ने जगमग दीपों की लगी है क़तार गीत प्रस्तुत किया। चेन्नई से संजीव अग्रवाल ने भारत को सोने की चिड़िया क्यूँ कहते है उसकी व्याख्या के साथ दिवाली के मायने के साथ कल कल बहता जल गीत प्रस्तुत किया,दीपिका मिश्रा जी मिर्ज़ापुर आप ने माँ तूँ क्या है समझा नही पाती, लाल जोशी मैसूर ने एक झील थी शहर में एक तालाब था मेरे गाँव में एवं लड़क पन की दस्ता को सुनाया, सुलोचना जी धनावत रायपुर ने तुमसे होकर कर दूर माँ दिन रात, प्रेमलता जी अम्बिका पुर छत्तीसगढ़ ने जाने मन क्या ढूँढ रहा, नेपाल धरान से इंदू तोदी ने आत्मा ही परमात्मा व बिना माँ मायका अधूरा सुना मंच को करुण रस से भर दिया। महाराष्ट्र के वर्धा से जुड़े अनिकेत तपड़िया जी ने माँ भगवती व नारी शक्ति को प्रणाम करते हुए रोद्र रस से भरी कविता रानी लक्ष्मी बाई कविता का जीवन्त चित्रण किया, प्रमोद खीरवाल जी टाटानगर भगवान कृष्ण का बखान नज़रों के नशे से किया, सुधा जाजोदिया जी सीकर राजस्थान ने अग्रसेन के आदर्शों को बताते हुए आदमी के भीतर का मनुष्य खो गया कविता प्रस्तुत की, उषा जैन जी कोलकाता ने बच्चों के अंदर चल रहे अंतर्द्वंद पर अपनी कविता तुम मोन हो सुनाई।अंत में साहित्य मधुशाला की संचालिका उषा केडिया ने अपनी कविता गुज़ारा ज़माना सुना कर सभी को बीते कल की याद दिलाई । कार्यक्रम का समापन उमा बंसल जी कोरबा छत्तीसगढ़ ने सभी का बहुत सुंदर शब्दों में किया। उषा केडिया ने भी सभी का कार्यक्रम में जुड़ने के लिए धन्यवाद किया ।
