भवानीपुर |ममता बनर्जी की भवानीपुर विधानसभा सीट से जुड़े चुनावी नतीजों को लेकर चल रहे विवाद में कोलकाता हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस सीट की मतगणना से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा है कि ईवीएम, वीवीपैट, सीसीटीवी फुटेज और मतगणना से जुड़े अन्य सभी रिकॉर्ड किसी भी हालत में न तो नष्ट किए जाएं, न बदले जाएं और न ही उनमें छेड़छाड़ की जाए। जरूरत पड़ने पर इन सभी साक्ष्यों की जांच भी की जा सकती है।
अदालत ने क्या निर्देश दिए?
कोर्ट ने मतगणना केंद्र के रूप में इस्तेमाल हुए शेखावाटी मेमोरियल स्कूल में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने मामले में सभी संबंधित पक्षों को शामिल करने के निर्देश भी दिए हैं।
इनमें शुभेंदु अधिकारी और अन्य संबंधित व्यक्तियों को पक्षकार बनाया जाएगा।
ममता बनर्जी के आरोप
ममता बनर्जी ने 16 जून को कोलकाता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम को चुनौती दी थी। वह स्वयं अदालत पहुंचीं और मतगणना की वैधता पर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मतगणना के दौरान गंभीर अनियमितताएं हुईं। ममता बनर्जी के अनुसार, 12 राउंड की गिनती के बाद उनके चुनाव एजेंट को कथित रूप से बाहर कर दिया गया और उनके साथ धक्का-मुक्की भी हुई।
मतगणना केंद्र पर विवाद
चुनाव परिणाम से एक दिन पहले और मतगणना के दिन भवानीपुर क्षेत्र में तनाव की स्थिति देखी गई थी। आरोप है कि कुछ लोगों ने स्ट्रॉन्गरूम और मतगणना केंद्र के आसपास अव्यवस्था पैदा की।
ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि उन्हें मतगणना प्रक्रिया के दौरान अंदर जाने से रोका गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।
शुभेंदु अधिकारी का जवाब
शुभेंदु अधिकारी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह हार के बाद की राजनीति है और ईवीएम पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
उन्होंने ममता बनर्जी के आरोपों को “ड्रामेबाजी” बताते हुए कहा कि इससे चुनाव परिणामों की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब भवानीपुर सीट से जुड़े सभी चुनावी रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे। यदि अदालत को आवश्यकता महसूस होती है, तो ईवीएम और वीवीपैट सहित सभी साक्ष्यों की विस्तृत जांच भी की जा सकती है।
इस मामले की अगली सुनवाई में अदालत आगे की दिशा तय करेगी।