बालोद। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत नवविवाहित जोड़ों को दिए गए मंगलसूत्र को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में 184 जोड़ों के सामूहिक विवाह कार्यक्रम में मंगलसूत्र को लेकर अनियमितता का आरोप लगाया है। वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि योजना के सभी नियमों और वित्तीय प्रावधानों का पालन किया गया है।
महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और संजारी बालोद विधायक संगीता सिन्हा ने आरोप लगाया कि योजना के तहत महिलाओं को दिए गए मंगलसूत्र में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया गया है। कांग्रेस ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
संगीता सिन्हा ने कहा कि सरकार की ओर से मंगलसूत्र के लॉकेट को चांदी का बताया गया, जबकि हितग्राहियों का आरोप है कि उन्हें गिलेट की चेन दी गई। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो कार्रवाई की जाए।
नवविवाहिताओं ने लगाया धोखे का आरोप
मामले को लेकर कुछ नवविवाहिताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें सोना-चांदी के आभूषण देने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में जांच कराने पर आभूषण नकली बताए गए। उन्होंने इसे आर्थिक नुकसान के साथ भावनाओं से जुड़ा मामला बताते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
विभाग ने आरोपों को बताया गलत
वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग ने पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा कि सभी सामग्री शासन के तय नियमों के अनुसार उपलब्ध कराई गई है। विभाग के अनुसार, 10 फरवरी 2026 को खड़गवां विकासखंड के चनवारीडांड में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में 184 जोड़ों का विवाह कराया गया था।
विभाग ने बताया कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत प्रति कन्या 50 हजार रुपये की सहायता राशि का प्रावधान है। इसमें 35 हजार रुपये सीधे हितग्राही के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से दिए जाते हैं, जबकि शेष राशि से विवाह आयोजन, भोजन, वस्त्र, श्रृंगार सामग्री और अन्य व्यवस्थाएं की जाती हैं।
चांदी के बढ़े दामों के कारण दिया गया कृत्रिम मंगलसूत्र
विभाग के अनुसार, चांदी के बाजार मूल्य में बढ़ोतरी के कारण स्वीकृत राशि के भीतर योजना के प्रावधानों के अनुसार कृत्रिम मंगलसूत्र उपलब्ध कराया गया था। अधिकारियों ने कहा कि यदि किसी सामग्री की गुणवत्ता में कमी पाई गई तो संबंधित फर्म पर कार्रवाई करते हुए प्रति हितग्राही 100 रुपये के हिसाब से कटौती की गई।
फिलहाल मामले को लेकर कांग्रेस जांच की मांग कर रही है, जबकि विभाग का कहना है कि योजना में किसी भी तरह की अनियमितता नहीं हुई है।