2 दिन में 20,000 करोड़ की निकासी, भारतीय शेयर बाजार से क्यों दूरी बना रहे विदेशी निवेशक?

मुंबई । भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली लगातार तेज होती दिख रही है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने पिछले दो कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार से करीब 20,891 करोड़ की निकासी की है। इसके साथ ही इस सप्ताह अब तक उनकी कुल बिकवाली 26,000 करोड़ से अधिक हो गई है।

स्टॉक एक्सचेंज के अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक, 30 सितंबर को FIIs ने 10,148 करोड़ से अधिक की बिकवाली की, जबकि 29 सितंबर को उन्होंने करीब 10,743 करोड़ भारतीय बाजार से निकाले।

इस लगातार बिकवाली का असर प्रमुख शेयर सूचकांकों पर भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक निफ्टी और सेंसेक्स लगातार आठवें सप्ताह गिरावट की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसा 2001 के बाद पहली बार होने का दावा किया गया है।

कच्चा तेल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बड़ी वजह

इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी को प्रमुख कारण बताया।

अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड बढ़ने से वैश्विक निवेशकों के लिए डॉलर आधारित सुरक्षित परिसंपत्तियों में निवेश अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकता है। ऐसे माहौल में उभरते बाजारों से पूंजी का बाहर जाना बढ़ सकता है।

महंगा तेल भी बढ़ा रहा दबाव

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने से देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इससे चालू खाता घाटा, महंगाई और रुपये की में विदेशी निवेश की वापसी के रास्ते में कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। इनमें भारतीय शेयरों का अपेक्षाकृत ऊंचा वैल्यूएशन और वैश्व स्थिति प्रभावित होने की आशंका रहती है।

महंगे कच्चे तेल का असर कंपनियों के मुनाफे पर भी पड़ सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां ईंधन लागत कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

क्या विदेशी निवेशक फिर लौटेंगे?

ब्रोकरेज फर्म Bernstein के अनुसार, भारतीय बाजार में विदेशी निवेश की वापसी के रास्ते में कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। इनमें भारतीय शेयरों का अपेक्षाकृत ऊंचा वैल्यूएशन और वैश्विक स्तर पर AI से जुड़े शेयरों में तेजी के दौर को लेकर बदलता नजरिया शामिल है।

विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सेमीकंडक्टर, बैटरी और एनर्जी स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धी कंपनियों और उद्योगों के विकास को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि, विदेशी निवेशकों की निकासी का रुझान बाजार की पूरी तस्वीर नहीं बताता। घरेलू संस्थागत निवेश, कंपनियों की कमाई, वैश्विक ब्याज दरें, कच्चे तेल की कीमतें और रुपये की चाल समेत कई कारक भारतीय शेयर बाजार की दिशा को प्रभावित करते हैं।

शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *