संविधान की माला जपने वाले 14 विपक्षी दलों ने क्यों किया ‘संविधान सभा’ का बहिष्कार ?

नई दिल्ली: संविधान दिवस समारोह के मौके पर शुक्रवार को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद संसद के सेंट्रल हॉल में प्रस्तावना पढ़ने के साथ समारोह की अगुवाई करेंगे, जहां पीएम नरेंद्र मोदी एक विशिष्ट सभा को संबोधित करेंगे. इस दौरान राष्ट्रपति कोविंद एक भाषण में देश को संबोधित करेंगे, जिसके बाद लोग उनके साथ संविधान की प्रस्तावना के वाचन सत्र में हिस्सा लेंगे. प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के एक बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति संसद भवन के सेंट्रल हॉल में संविधान सभा की बहस का एक डिजिटल संस्करण भी जारी करेंगे.
वहीं, पीएम मोदी नई दिल्ली के विज्ञान भवन में दो दिवसीय संविधान दिवस समारोह का भी शुभारंभ करेंगे और संबंधित कार्यक्रमों में शामिल होंगे. इस दौरान कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया है. वहीं कार्यक्रम से विपक्ष दलों द्वारा किनारा करने के बाद भाजपा ने कांग्रेस सहित अन्य दलों पर हमला बोला है. बता दें कि कांग्रेस सहित वामपंथी दल, तृणमूल कांग्रेस (TMC), राजद, शिवसेना, NCP, सपा, IUML और द्रमुक सहित 14 दल आज संसद के सेंट्रल हॉल में आयोजित होने वाले संविधान दिवस समारोह का बहिष्कार कर रहे हैं.
इस बीच भाजपा के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है कि कांग्रेस और 14 विपक्षी दलों का संसद में संविधान दिवस समारोह का बहिष्कार करना देश के संविधान का तिरस्कार है. यह साबित करता है कि कांग्रेस सिर्फ नेहरू परिवार के नेताओं का सम्मान कर सकती है, जबकि बीआर अंबेडकर समेत किसी अन्य नेता का नहीं. बता दें कि, ये विपक्षी दल अक्सर मोदी सरकार के कार्यों और नीतियों का विरोध करते हुए उन्हें असंवैधानिक बताते हैं और अपने आप को संविधान का रक्षक कहते हैं, ऐसे में संविधान दिवस के दिन ही संविधान सभा का बहिष्कार करना उनपर सवाल जरूर खड़ा करता है।

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