देश की आज़ादी के बारे में क्या सोचते थे स्वामी विवेकानंद

हिंदुस्तान के युगपुरुषों में से एक स्वामी विवेकानंद युवा पीढ़ी के लिए आदर्श माने जाते हैं. प्रत्येक विषय पर उनके विचारों की जानकर आज भी कई बुद्धिजीवी लोग उनकी विवेचना करते हैं. स्वामी जी ने अमुक विषय पर क्या कहा और किस वजह से कहा इस पर हमेशा चर्चा होती रहती है. इसमें देश की आजादी भी एक विषय है, जिस पर स्वामी विवेकानंद के कुछ अलग ही विचार थे. स्वतंत्रता संग्राम पर स्वामी जी का योगदान उनके विचारों और कार्यों से जाहिर होता है. एक बात यह भी है कि स्वामी जी, गांधी जी से लेकर कई स्वतंत्रता सेनानियों के प्रेरणा स्रोत रहे और अपने पूरे जीवनकाल में देशवासियों को तैयार करने में लगे रहे.

स्वामी जी एक सच्चे देशभक्त भी थे. सन्यासी होने के कारण वे राजनीति में कभी सक्रिय नही रहे. किन्तु उनके विचारों ने भारतीय राजनेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों को काफी प्रभावित किया और देश की राह पर चलते रहने के लिए प्रेरित किया. स्वामी जी के विचारों को जानने के बाद पता चलता है की देश की, देशवासियों की प्रत्येक समस्या को वे अपनी समस्या मानते थे. इसलिए वे गुलामी को भी देश और देशवासियों की एक मुख्य समस्या मानते थे. उनके विचारों पर ध्यान देने से स्पष्ट होता है कि वे हमेशा ही भारतवासियों की गुलामी की समस्या की जड़, भारतीयों की गुलामी के कारण से कुंद हो रही मानसिकता पर लगातार प्रहार किया करते थे.

स्वामी जी का कहना था कि सबसे जरूरी है यदि प्रत्येक देशावासी जागृत हो जाए, तो देश की अन्य समस्याएं अपने आप हल हो जाएंगी. उन्होंने तो 1 नवंबर 1896 में अपने अनुयानी को एक पत्र में यह भी लिख दिया था कि 50 वर्षों के बाद देश स्वतंत्र हो जाएगा. ऐसा ही हुआ मगर उनकी चिंता यह थी कि देश के प्रत्येक नागरिक को जागृत होने की सख्त जरूरत है, उनकी यह चिंता आज भी बरकरार है. क्योंकि, देश का एक बड़ा तबका अपने मष्तिष्क से विचार करने की जगह, भ्रमित करने वाली बातों से अधिक प्रभावित होता है.

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