दिल्ली में ट्रैफिक होगा कम, नजफगढ़ नाले के किनारे बनेगा 61 KM लंबा कॉरिडोर; 454 करोड़ का प्रोजेक्ट

नई दिल्ली  । राजधानी दिल्ली में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने और लोगों की आवाजाही आसान बनाने के लिए सरकार ने एक बड़े सड़क प्रोजेक्ट की दिशा में कदम बढ़ाया है। नजफगढ़ नाले के किनारे करीब 61 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर विकसित करने की योजना है। लोक निर्माण विभाग (PWD) इस परियोजना की फिजिबिलिटी स्टडी के लिए जल्द ही निजी कंसल्टेंट नियुक्त करने की तैयारी कर रहा है।

सरकार ने इस साल फरवरी में नजफगढ़ नाले के किनारे एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित करने की योजना का ऐलान किया था। अब परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए तकनीकी और व्यवहारिक पहलुओं का अध्ययन कराया जाएगा। फिजिबिलिटी स्टडी के आधार पर कॉरिडोर का रूट, डिजाइन, लागत और निर्माण से जुड़ी योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।

नजफगढ़ नाले के दोनों किनारों पर बनेगी सड़क

प्रस्तावित योजना के तहत छावला से बसई दारापुर तक नजफगढ़ नाले के दोनों किनारों पर 27.415-27.415 किलोमीटर लंबी सड़क विकसित करने का प्रस्ताव है। दोनों किनारों की सड़कों की कुल लंबाई करीब 54.83 किलोमीटर होगी।

इसके अलावा झटीकरा ब्रिज से छावला ब्रिज तक नाले के बाएं किनारे पर करीब 5.94 किलोमीटर लंबी दो-लेन सड़क बनाने की भी योजना है। इस तरह नाले के आसपास एक वैकल्पिक सड़क नेटवर्क तैयार करने की कोशिश की जाएगी।

कई प्रमुख सड़कों से जुड़ेगा कॉरिडोर

प्रस्तावित कॉरिडोर को दिल्ली की कई प्रमुख सड़कों से जोड़ने की योजना है। इसमें आउटर रिंग रोड, इनर रिंग रोड, शिवाजी मार्ग, पंखा रोड, यूईआर-II और नजफगढ़ रोड समेत अन्य प्रमुख मार्ग शामिल हैं। यूईआर-II के जरिए एनएच-9 और रोहतक रोड की ओर भी कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।

PWD अधिकारियों के मुताबिक, नजफगढ़ नाले के आसपास पीक और नॉन-पीक दोनों समय वाहनों की धीमी गति और क्रॉस मूवमेंट के कारण ट्रैफिक दबाव बढ़ता है। ऐसे में नया कॉरिडोर मौजूदा सड़कों को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।

करीब 454 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत

परियोजना की अनुमानित लागत करीब 454 करोड़ रुपये बताई गई है। इसका उद्देश्य केवल ट्रैफिक दबाव कम करना ही नहीं, बल्कि लोगों का यात्रा समय, ईंधन की खपत और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को भी कम करना है।

करीब 7 मीटर चौड़ी सड़क के साथ पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों के लिए अलग ट्रैक विकसित करने की योजना है। कॉरिडोर के आसपास पौधरोपण और लैंडस्केपिंग भी की जाएगी, जिससे क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने पर जोर रहेगा।

मेट्रो डिपो के पास बनेगा नया पुल

परियोजना के तहत मेट्रो डिपो के पास एक नए पुल के निर्माण का प्रस्ताव भी है। इससे कॉरिडोर से जुड़े इलाकों के बीच आवाजाही आसान हो सकती है। इसके अलावा जरूरत के अनुसार नई बाउंड्री बनाने और पुरानी क्षतिग्रस्त दीवारों की मरम्मत का भी प्रावधान किया गया है।

फिलहाल परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले फिजिबिलिटी स्टडी कराई जाएगी। इसके बाद कॉरिडोर के अंतिम रूट, डिजाइन, लागत और निर्माण प्रक्रिया को लेकर आगे का फैसला लिया जाएगा।

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