बूस्टर डोज के लिए ये वैक्सीन है सेफ

नई दिल्ली: कोरोना संक्रमण के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के दो मामले बेंगलुरु में प्राप्त होने के पश्चात् भारत सरकार सतर्क हो गई है। इस वैरिएंट से लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से दिशा-निर्देश भी जारी की गई है। विश्वभर के वैज्ञानिक एवं डॉक्टर्स इस मंथन में जुट गए हैं कि यह वैरिएंट बाकी कोरोना वैरिएंट की तुलना में कितना खतरनाक है तथा वैक्सीन इसके खिलाफ कितनी प्रभावी है। इसकी भी चर्चा हो रही है कि क्या अब बूस्टर डोज देने का समय आ गया है। इस बीच देश में जीनोम सिक्वेंसिंग का टेस्ट करने वाली लेबोरेटरी INSACOG ने बूस्टर डोज को लेकर बड़ी बात कही है।
INSACOG का कहना है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट के संकट को देखते हुए अब समय आ गया है कि 40 या इससे ऊपर के आयु वाले व्यक्तियों को बूस्टर देने पर विचार किया जाए। हमारा प्रयास हो कि सभी लोगों को कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज जल्द से जल्द लग जाए। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मौजूदा टीके ओमिक्रॉन को मात देने में कितने कारगर हैं, ऐसे में बूस्टर को लेकर निर्णय लेना आवश्यक हो गया है। वही आरम्भिक जांच में यह बात सामने आई है कि ओमिक्रॉन से फिर से इन्फेक्शन रिस्क बढ़ सकता है। अगर ऐसा होता है तो म्यूटेशंस के कारण संक्रमण कोई और डरावना रूप ले सकता है। एक यह भी कारण है कि म्यूटेशंस बढ़ने से दक्षिण अफ्रीका में अचानक कोरोना रोगियों का आँकड़ा बढ़ गया है। वही इस बीच WHO भी ओमिक्रॉन को लेकर हरसभंव कदम उठा रहा है। WHO की स्ट्रैटेजिक एडवाइजरी ग्रुप की 7 दिसंबर को मीटिंग हो रही है। इसमें बूस्टर डोज को लेकर चर्चा होनी है तथा इसको लेकर दिशा-निर्देश जारी हो सकते हैं। अभी WHO का कहना है कि ओमिक्रॉन को लेकर आरम्भिक जांच के पश्चात् यह कहना कठिन है कि बूस्टर डोज को लेकर निर्णायक समय आ गया है या नहीं।
बूस्टर पर क्या सोच रही सरकार?
दूसरी तरफ भारत सरकार ने संसद को बताया कि बूस्टर पर आखिरी निर्णय चिकित्सकों एवं वैज्ञानिकों के सुझाव पर किया जाएगा। वैक्सीन को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाला नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप में भी बूस्टर डोज पर मंथन चल रहा है। इसकी भी चर्चा हो रही कि क्या वैक्सीन की तीसरी डोज या बूस्टर देने का समय आ गया है। हालांकि यह चर्चा अभी पब्लिक डोमेन में नहीं है।
LANCET ने बताया कौन सी वैक्सीन सेफ:-
ओमिक्रॉन के खौफ और बूस्टर डोज पर मंथन के बीच साइंस जर्नल LANCET ने बताया है कि फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन की दो डोज लेने के पश्चात् 6 अलग-अलग बूस्टर सुरक्षित हैं। ये बूस्टर कोरोना से जंग में कारगर हैं तथा इम्युनिटी बढ़ाते हैं। ब्रिटेन में इसको लेकर ट्रायल हो चुका है। लांसेट ने इन 6 कंपनियों का वैक्सीन लगाने के पश्चात् बूस्टर डोज की प्रभावकारिता का अध्ययन किया। ये 6 कंपनियां है- AstraZeneca, Pfizer-BioNTech, Novavax, Janssen, Moderna, एवं Curevac। लांसेट के मुताबिक, साइड इफेक्ट के डाटा से पता चला है कि सभी सातों कंपनियों के वैक्सीन को तीसरे डोज के तौर पर लिया जा सकता है। अध्ययन में पता चला है कि मामूली साइड इफेक्ट में टीका लेने वाली जगह पर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। रिसर्च के मुताबिक, ये वैक्सीन स्पाइक प्रोटीन immunogenicity बढ़ाने में कारगर रहे।

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