आयकर दाता देश की आर्थिक मजबूती की रीड की हड्डी- गोपाल, आयकर से प्राप्त राजस्व से देश का विकास में होता है बहुत बड़ा योगदान
सक्ती-01 अप्रैल 2022 से नया वितीय वर्ष प्रारम्भ हो गया है,और देश का एक बहुत छोटा वर्ग पुनः इस साल अपनी कमाई का एक निर्धारित हिस्सा आयकर के रूप में सरकार को देना शुरू कर देगा।भारत के प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री हमेशा देश के सामने यह चिंता जता चुके हैं कि हमारे देश मे आयकर देने वालो की संख्या काफी कम है। लेकिन सरकार की और से कोई ऐसे प्रयास नही हुए कि आयकरदाता को एक सम्मान का अनुभव हो,किंतु यदि अगर जब हम देश के वंचित वर्ग को पहचान के लिये अलग- अलग कार्ड जारी करते हैं, तो समाज के उस वर्ग को विशिष्ट पहचान क्यो नही मिलती जो देश के विकास के लिए प्रत्यक्ष रूप से कर प्रदान कर देश की आर्थिक मजबूती में अपना अहम योगदान दे रहा है। उक्ताशय की बातें चांपा के सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल मित्तल ने देते हुए बताया कि यदि आयकरदाताओं को समाज मे विशिष्ट पहचान दी जाये तो अन्य लोग भी इससे प्रेरणा लेंगे। उन्हें ऐसे विशिष्ट पहचान पत्र ( 2 या 3 श्रेणियों के )देकर कुछ सुविधाएं भी दी जा सकती है जैसे :-
– सरकार के सभी विभागों द्वारा उनके काम त्वरित गति से निपटाना।
– रेल्वे की सभी श्रेणियों में उनके लिये कोटा निर्धारित करना।
– पासपोर्ट तुरंत जारी करना।
– टोल टैक्स नाकों पर छूट।
– रेल्वे प्लेटफार्म, एयरपोर्ट पर प्रवेश शुल्क से छूट
सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल मित्तल कहते है कि ऐसी और भी अनेक सुविधाएं, आयकरदाताओं का सम्मान करते हुए दी जा सकती है, ताकि उन्हें भी गर्व का अनुभव हो, आज पूरे भारत देश में तुलनात्मक अध्ययन किया जाए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा विगत वर्षों में की गई नोटबंदी से पूर्व देश में आयकर दाताओं की संख्या काफी कम थी, किंतु आज नोटबंदी के बाद देश में प्रतिवर्ष काफी तेज गति से आयकर दाताओं की संख्या में भी इजाफा हुआ है, तथा सरकार भी बड़े मंचों पर आयकर दाताओं को अलग पहचान देने की बात जरूर करती है, किंतु आज पर्यंत तक हमारे देश के आर्थिक रीड की हड्डी आयकर दाताओं को अपनी कोई एक अलग पहचान नहीं मिल पाई है तथा देश में आज आयकर दाताओं को प्रोत्साहन देने से सरकार को ही इसका फायदा होगा किंतु इस दिशा में सकारात्मक पहल की आवश्यकता है