शक्ति- जांजगीर-चांपा जिले के शक्ति विकासखंड के जनपद पंचायत शक्ति के अंतर्गत ग्राम पंचायत-गढ़गोढ़ी के पंचायत भवन के अपनी मर्जी से खुलने एवं अपनी मर्जी से बंद होने से ग्रामीण बेहद परेशान हैं,तथा 17 मार्च को जब इस संबंध में जानकारी ली गई तो ग्राम पंचायत-गढ़गोढ़ी का भवन बंद था, तथा वहां भवन के बाहर उपस्थित एक ग्रामीण नवयुवक से जब इस संबंध में चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि आज यह ग्राम पंचायत का भवन बंद है, तथा नियमित नहीं खुलता एवं ग्रामीणों की किसी भी प्रकार की समस्या रहती है तो वे जनप्रतिनिधियों से संपर्क करते हैं, या की अपनी समस्याओं को पहुंचा देते हैं, उनका निराकरण बाद में होता है
उल्लेखित हो कि पंचायती राज व्यवस्था में जहां जिला पंचायत, जनपद पंचायत एवं ग्राम पंचायतों को नियमित शासकीय अवकाश को छोड़कर कार्यालय खोलने का प्रावधान है,तथा विशेष परिस्थितियों में ही इस व्यवस्था में संशोधन संभावित है ऐसा सूत्र बताते हैं, किंतु इसके बावजूद जनपद पंचायत शक्ति के अंतर्गत अनेकों ग्राम पंचायतों में यूं ही स्थिति बनी हुई है, ग्राम पंचायतों में बने भवन अपनी मर्जी से खुलते हैं,तथा उन्हें ग्रामीणों की समस्याओं की कोई परवाह नहीं है ,जबकि प्रत्येक ग्राम पंचायतों में ग्राम सेवक, मनरेगा सहित अनेकों कार्य नियमित रूप से संचालित होते हैं, तथा ग्रामीणों को भी छोटी-छोटी अनेकों प्रकार की समस्याएं होती है, जिसके निराकरण के लिए पंचायती राज को सशक्त बनाते हुए यह व्यवस्था बनाई गई है, किंतु शक्ति विकासखंड के इस गढ़गोढ़ी ग्राम पंचायत के पंचायत भवन को देखते हुए ऐसा लगता है कि यदि किसी ग्रामीण को कुछ समस्या हो तो वह पंचायत भवन जाएंगे तो वहां किसी से संपर्क होगा नहीं, या तो वे जनप्रतिनिधियों के पास जाएं या वहां का सचिव जो कि अन्य ग्रामीण क्षेत्रों से आकर यहां ड्यूटी करते हैं, तथा ग्रामीणों को सचिव के काम पड़ने पर उनके पास अपना समाय व्यर्थ करते हुए पहुंचना पड़ेगा
तथा इस संबंध में जब ग्राम पंचायत के सचिव से संपर्क किया गया तो उनके मोबाइल पर अनेकों बार कॉल होने के बावजूद उन्होंने फोन अटेंड करना ही उचित नहीं समझा, तथा ग्राम पंचायत के सरपंच के मोबाइल पर संपर्क कर पाना टेढ़ी खीर है, ऐसा गांव के ही कुछ लोग बताते हैं
उल्लेखित हो कि जनपद पंचायत शक्ति के अंतर्गत जनपद पंचायत के अध्यक्ष राजेश राठौर ने भी ऐसी ही समस्याओं की जानकारी मिलने पर विगत दिनों सरपंच- सचिवों की बैठक में स्पष्ट रूप से इस बात को लेकर की ग्राम पंचायतों में कार्यालय नियमित रूप से शासकीय दिवस में पूर्ण समय के लिए खुले तथा पंचायतों में सभी संधारण पंजी तथा अन्य जरूरी दस्तावेजों की उपलब्धता होनी चाहिए कहा था, एवं राजेश राठौर के अनुसार उन्होंने बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी के माध्यम से भी सभी पंचायती राज के कर्मचारियों एवं जनप्रतिनिधियों को आग्रह किया था

किंतु ऐसा देखने को मिलता है कि पंचायती राज व्यवस्था को ग्रामीण इलाकों में पंचायतों के कर्मचारी ने भी मजाक बनाकर रख दिया हैं, तथा अगर पंचायती राज व्यवस्था का यूं ही हाल रहा तो ग्रामीण इलाकों में शासन की मंशा नुरूप आम नागरिकों की छोटी-छोटी समस्याओं का निराकरण कैसे होगा, इस बात को लेकर यह गंभीर चिंता का विषय है
ग्राम पंचायत गढ़गोढ़ी के पंचायत भवन में यह बात देखने को मिली कि पंचायत भवन के बाहर किसी तरह की कोई जानकारी प्रदर्शित नहीं की गई है, ना हीं ग्राम पंचायत भवन लिखा गया है, तथा पंचायती राज व्यवस्था में स्पष्ट रूप से ग्राम पंचायतों के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं की जानकारी दीवालों पर प्रदर्शित करना आवश्यक होता है, लेकिन गढ़गोढ़ी के इस पंचायत भवन में न जाने क्यों ऐसी कोई जानकारी भवन के बाहर प्रदर्शित नहीं हुई है