दंतेवाड़ा। जिले के बारसूर स्थित ऐतिहासिक बूढ़ा तालाब को सुखाने के बाद अब इसके दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं, दशकों से इस तालाब में रह रहे मगरमच्छ अब सड़कों और आसपास के इलाकों में दिखाई देने लगे हैं, हाल ही में बारसूर-छिंदनार मार्ग पर 10 फीट लंबा मगरमच्छ मिलने से इलाके में दहशत फैल गई. वन विभाग ने उसे सुरक्षित पकड़कर इंद्रावती नदी में छोड़ दिया लेकिन यह घटना प्रशासनिक योजना पर सवाल खड़े कर रही है, स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब मगरमच्छों का प्राकृतिक आवास रहा है और यहां कभी कोई बड़ी घटना नहीं हुई, जिपलाइन परियोजना और पर्यटन के नाम पर किए गए बदलावों से वन्यजीवों का संतुलन बिगड़ रहा है. अभी भी तालाब में तीन मगरमच्छ मौजूद हैं, और उनके सुरक्षित पुनर्वास को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है. सौंदर्यीकरण कार्य अधूरा है और जिपलाइन बंद पड़ी है, ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि विकास की कीमत क्या वन्यजीवों को चुकानी पड़ेगी, अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि पर्यटन और पर्यावरण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए.