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रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस, रजत जयंती वर्ष पर राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से राष्ट्रीय समाचार पत्र पायनियर के संपादक ए.एन. द्विवेदी ने की खास बातचीत। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पायनियर के माध्यम से राज्य में हो रहे चहुंमुखी विकास और नक्सलवाद मुक्त होने के बाद कैसा होगा बस्तर इन सभी विषयों पर खुलकर बात की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश-
सवाल – सुशासन वाली विष्णु सरकार अपने बीते 22 माह के कार्यकाल में मोदी की गारंटी को पूरा करने में कितना सफल हुई है?
जवाब- हमारी सरकार ने यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा प्रदेश की जनता को दी गई गारंटियों को अल्प समय में ही पूरा किया है। हमने पहले ही कैबिनेट में 18 लाख से अधिक पीएम आवास स्वीकृत किया, साथ ही तीन महीनों के भीतर महतारी वंदन योजना आरंभ कर दी, जिसके माध्यम से अब तक 13 हजार करोड़ रूपए की राशि लगभग 70 लाख माताओं-बहनों के खातों में भेज चुके हैं। इसके साथ ही हमने कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत 3100 रूपए प्रति क्विंटल तथा 21 क्विंटल तक प्रति एकड़ के मान से धान खरीदी की है। वायदे के अनुरूप बकाया बोनस राशि 3716 करोड़ रूपए 25 दिसम्बर 2023 को सुशासन दिवस के अवसर पर 13 लाख किसान भाइयों के खाते में अंतरित किए। तेंदूपत्ता संग्रहण की राशि को 4000 रूपए से बढ़ाकर 5500 रूपए हमने किया। जिसका लाभ 13 लाख तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों को मिल रहा है। हमने पीएससी परीक्षा की जांच सीबीआई को सौंपी है और इसके भ्रष्टाचारी जेल के सलाखों के पीछे है।
सवाल – नक्सलवाद खात्मे के बाद बस्तर कैसा होगा? कोई विजन है क्या?
जवाब- राज्य में नक्सलवाद अब अंतिम सांसे गिन रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य तय किया गया है। जिस ओर हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। नक्सलवाद के पूरी तरह खात्मे के बाद बस्तर अब तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ेगा। हमने विजन डॉक्यूमेंट में बस्तर के विकास के लिए विशेष नीति बनाई है। नई औद्योगिक नीति में बस्तर पर हमारा विशेष फोकस है। यहां पर निवेश के लिए विशेष अनुदान प्रावधान रखे गए हैं। इसके अलावा बस्तर के विकास पर बारीक रणनीति तैयार करने हमने चित्रकोट में विशेष समीक्षा बैठक रखी थी, जहां पर हमने बस्तर के विकास का रोडमैप बनाया है और उस पर तेजी से अमल किया जा रहा है।
सवाल – अटल जी ने छत्तीसगढ़ दिया, 25 साल में कितना संवार पाए? कितना बाकी है?
जवाब- छत्तीसगढ़ की अब तक की विकास यात्रा ऐतिहासिक रही है। श्रद्धेय अटल जी ने छत्तीसगढ़ का निर्माण अंत्योदय के कल्याण के लिए किया था। इन 25 वर्षों में सरकार की योजनाओं से लाखों लोग गरीबी की रेखा से बाहर आए हैं। पीडीएस के माध्यम से छत्तीसगढ़ का खाद्य सुरक्षा मॉडल देशभर के लिए उपयोगी बना। छत्तीसगढ़ में किसानों को उनकी फसल के एवज में सबसे बढिय़ा मूल्य मिल रहा है। एम्स के साथ मेकाहारा, डीकेएस, सिम्स जैसे संसाधनों को बेहतर कर हम छत्तीसगढ़ में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। आईआईटी, ट्रिपलआईटी, एनआईटी, आईआईएम और एचएनएलयू जैसी संस्थाएं यहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करा रही हैं। कनेक्टिविटी के मामले में छत्तीसगढ़ का इंफ्रास्ट्रक्चर शानदार है। हर मायने में छत्तीसगढ़ अग्रणी राज्यों में शामिल है। अटल जी के सपनों को हमारी सरकार पूरा करने में जुटी है। इसके लिए स्लोगन भी दिया गया है- ‘हमने बनाया है, हम ही संवारेंगे।
सवाल – शिक्षा और स्वास्थ्य चैलेजिंग है, इसके लिए क्या रोडमैप है।
जवाब- शिक्षा और स्वास्थ्य हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। शिक्षा के क्षेत्र में हमने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपनाया है। छत्तीसगढ़ में स्कूल तो थे, लेकिन कई जगहों पर शिक्षकों की उपलब्धता नहीं थी। अंदरूनी क्षेत्रों के अनेक स्कूल शिक्षक विहीन थे। इस अनियमितता को दूर करने हमने युक्तियुक्तरण की नीति बनाई। युक्तियुक्तरण के जरिए सुदूर इलाकों में भी शिक्षकों की पदस्थापना सुनिश्चित की गई है। हम राज्य में जल्द ही 5 हजार शिक्षकों की भर्ती भी करने जा रहे हैं। इससे और भी नए शिक्षक स्कूलों को मिलेंगे। उच्च शिक्षा में भी 700 असिस्टेंट प्रोफेसर एवं अन्य पदों पर भर्तियां आरंभ की है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में चिकित्सकों और मेडिकल स्टॉफ की भर्तियां हमने की। हम अम्बेडकर हॉस्पिटल का विस्तार कर रहे हैं। नए मेडिकल कॉलेज हमने आरंभ किए है। ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिभावान युवाओं को ध्यान में रखते हुए हिन्दी में एमबीबीएस की पढ़ाई आरंभ की है। हमने विजन 2047 बनाया है, जिसके मुताबिक स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में विशेष रूप से कार्य कर रहे हैं।
सवाल – राज्य में माईनिंग पर्याप्त है, लेकिन उद्योगों की संख्या पर्याप्त नहीं है?
जवाब- इसका कारण यह था कि राज्य की पुरानी औद्योगिक नीति में नए उद्योगों को आमंत्रित करने के लिए प्रोत्साहन नहीं था। हमने नई औद्योगिक नीति बनाई है। इसमें कोर सेक्टर के साथ ही उभरते हुए नए उद्योगों के लिए भी आकर्षक अनुदान प्रावधान हमने रखे हैं। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ की अधोसंरचना भी अब उद्योगों के लिए अनुकूल हो गई है। हमारी कनेक्टिविटी पोर्ट सिटी तक हो रही है। साथ ही खनिज संसाधन वाले क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी भी बनी है। हमने लॉजिस्टिक नीति भी बनाई है। इसका लाभ सीधे उद्योगों को मिलेगा और अब तेजी से छत्तीसगढ़ में निवेश आ रहा है। सरकार ने बस्तर और सरगुजा के विकास को प्राथमिकता में रखा है। पीएम जनमन योजना, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना जैसी जनजातीय विकास की योजनाएं हैं। वे बस्तर में भी वैसे ही है और सरगुजा में भी वैसे ही हैं। नई औद्योगिक नीति के जो आकर्षक प्रावधान बस्तर को लेकर है। वही सरगुजा को लेकर भी है। टूरिज्म को लेकर हमने सरगुजा में भी बस्तर की तरह विशेष प्रावधान किए हैं।
सवाल – सरगुजा में वनोपज बहुत है, लेकिन बाजार नहीं?
जवाब- हमने वनधन केंद्रों के माध्यम से संग्राहकों को वनोपज का उचित मूल्य देना आरंभ किया है। इसके साथ ही हम वनोपजों के प्रसंस्करण के लिए भी उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। उदाहरण के लिए मैं जशप्योर ब्रांड के बारे में आपको बताना चाहूंगा। जशप्योर जशपुर का एक लोकल ब्रांड है, जिसके माध्यम से स्थानीय स्व-सहायता समूह की महिलाएं महुआ लड्डू, रागी, कोदो, कुटकी से बने व्यंजन आदि बना रही हैं और इसे बेच रही हैं। हम रायपुर में यूनिटी मॉल भी स्थापित कर रहे हैं। समूह के उत्पादों की ऑनलाइन प्लेटफार्मों में ब्रांडिंग और बिक्री के लिए पहल की गई है।
सवाल- मंत्रियों का परफार्मेस कैसा है? कौन से विभाग में ज्यादा काम करने की जरूरत महसूस हो रही?
जवाब- मंत्रियों का परफार्मेस अच्छा है, लेकिन अच्छा करने में संतुष्टि का भाव कभी नहीं आता और भी अच्छा करने की चाह मन में हमेशा बनी रहती है। सभी विभागों में काम करने की बहुत सारी संभावनाएं हैं, जिन पर हम काम कर रहे हैं।
सवाल – बिजली बिल जनता पर भारी पड़ रहा, कुछ राहत मिल पायेगी?
जवाब- हमारा उद्देश्य यह है कि हम उपभोक्ताओं को पूरी तरह से बिजली बिल से मुक्त कर दें। इसके लिए हम लोगों को प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जोड़ रहे हैं। हम उपभोक्ताओं को ऊर्जा उत्पादनकर्ता बना रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सौर ऊर्जा का उत्पादन एवं खपत बढ़े इसके लिए डबल इंजन की सरकार में डबल सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है। इससे एक ओर परांपरागत बिजली निर्भरता कम हो रही है, वही ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा मिल रहा है। सौर ऊर्जा के एक किलोवॉट क्षमता का प्लांट औसतन 120 यूनिट प्रतिमाह उत्पादन होता है। केन्द्र सरकार द्वारा इसके लिए 30 हजार रूपए और राज्य सरकार द्वारा 15 हजार रूपए इस प्रकार कुल 45 हजार रूपए की सब्सिडी दी जाती है। 2 किलोवॉट क्षमता का प्लांट लगाने पर औसतन 240 यूनिट प्रतिमाह विद्युत उत्पादन होता है। इस पर कुल 90 हजार रूपए की सब्सिडी में केंद्र द्वारा 60 हजार रूपए और राज्य सरकार द्वारा 30 हजार रूपए शामिल है। इसी तरह 3 किलोवॉट क्षमता का सौर ऊर्जा प्लांट लगाने से औसतन 360 यूनिट प्रतिमाह विद्युत उत्पादन होता है। इस प्लांट के लगाने वाले हितग्राही को कुल एक लाख 8 हजार रूपए की सब्सिडी मिलती है, जिसमें केन्द्र सरकार द्वारा 78 हजार रूपए और राज्य सरकार द्वारा 30 हजार रूपए दिए जाते हैं। हितग्राही को सौर प्लांट स्थापना के लिए ऋण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे आसानी से सौर प्लांट स्थापित कर सकें।
सवाल – बस्तर को सत्ता की चाबी कहा जाता है, लेकिन यहाँ से सिर्फ एक मंत्री क्यों? पूर्व का इतिहास कुछ और कहता रहा है?
जवाब- भारतीय जनता पार्टी का उद्देश्य सत्ता की प्राप्ति नहीं है, अपितु वैचारिक आधार पर राष्ट्रवाद को मजबूत करना है। इसलिए मंत्रिमण्डल निर्माण में सत्ता की चाबी हमारे लिए महत्वपूर्ण नहीं है, अपितु जनता जनार्दन का सुख-संतोष हमारे लिए महत्वपूर्ण है। जब हमारी पार्टी जिम्मेदारी देती है, तब सत्ता और संगठन दोनों को ध्यान में रखकर देती है। हमारे प्रदेश अध्यक्ष बस्तर से है और बस्तर से मंत्री श्री केदार कश्यप जी भी हैं।
सवाल – रजत जयंती वर्ष में राज्य की जनता को क्या संदेश देंगे?
जवाब – मैं प्रदेश की जनता को रजत जयंती की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। साथ ही जनता से यह भी आव्हान करता हूं कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सामूहिक संकल्प के साथ अपनी भागीदारी दें।