रंगपंचमी आज, बिलासपुर समेत अंचल में उड़ रहे रंग और गुलाल

बिलासपुर। होली के पांचवें दिन बाद आज 22 मार्च को रंगपंचमी खेली जा रही है। शहर सेत अंचल में इसे लेकर खास तैयारी पहले से ही चल रही थी। मंगलवार की सुबह से ही राधा कृष्ण मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के साथ रंग गुलाल खेले जा रहे हैं। मंगलवार को रंगपंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन, कृष्ण प्रतिपदा के दिन धुलेंडी और कृष्ण पंचमी के दिन रंगपंचमी का त्योहार मनाया जाता है। शंकर नगर स्थित राधाकृष्ण मंदिर के पुजारी पंडित रमेश तिवारी का कहना है कि रंगपंचमी के त्योहार का विशेष महत्व है।

रंगपंचमी पर हर तरफ पूरे वातावरण में अबीर, गुलाल उड़ता हुआ दिखाई देता है। माना जाता है कि इस दिन वातावरण में उड़ते हुए गुलाल से व्यक्ति के सात्विक गुणों में अभिवृद्धि होती है और उसके तामसिक और राजसिक गुणों का नाश हो जाता है। इससे पूरे वातावरण में सकारात्मकता का संचार होता है। रंगपंचमी का त्योहार बहुत पुराने समय से मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ में इसे धूल पंचमी के नाम से भी जाना जाता है । शास्त्रों के अनुसार इस त्योहार को अनिष्टकारी शक्तियों से विजय पाने का दिन कहा जाता है। इस त्योहार का सामाजिक महत्व भी माना जाता है। यह त्योहार आपसी प्रेम और सौहार्द को दर्शाता है।

शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *