रामनवमीं महापर्व विशेष – अवधेश अवस्थी जी की त्वरित टिप्पणी

राम की भक्ति में अद्भुत है दम
गीदम से जागृति लाये हैं हम
अवधेश अवस्थी की कलम से
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की मर्यादाओं का पालन करते हुये 36 गढ़ के दंतेवाड़ा जिले के छोटे से गांव गीदम में आज रामनवमीं का पर्व का भव्य स्वरूप सामने आया। धर्मिक जागरण की स्थानीय युवाओं ने नींव रखी। मर्यादा का यह पर्व जिस मर्यादित ढंग से सम्पन्न हुआ.. उसके लिये नयी पीढ़ी को सम्मान दिया ही जाना चाहिये। बधाई!
एकता और संगठन ने मनुष्य, समाज और धर्म को शक्ति प्रदान की है। जिससे संपूर्ण राष्ट्र मजबूत होता है। जब – तक हम जेब में हाथ डाल कर बैठे रहेंगे तब तक औरंगजेब सत्ता अन्याय करते रहेंगे!
जन्म से आज तक अन्य धर्मों के हर पर्व पर लोगों की भीड़ देखी… किंतु इस बार लंबे समय से परिश्रम करती गीदम नगर की नयी पीढ़ी ने संगठन की नयी सीढ़ी का निर्माण कर दिया। यह सीढ़ी सनातनी आकाश का पहुँच मार्ग बनेगी- निश्चित!!

आज प्रत्येक घर से प्रत्येक सदस्य ने बारी – बारी से विशाल झांकी का दर्शन लाभ लिया। हर मन में धर्म जागरण और धर्म रक्षण का स्थायी भाव भी जागृत हुआ। योजना निर्माताओं और प्रयास कर्ताओं के सफल प्रयास का सुखद परिणाम निकट भविष्य में सामने आयेगा।
सामंजस्य और सहिष्णुता हिंदू धर्म का प्रमुख गुण है ..अन्य धर्मावलंबी इसका लाभ उठा कर धर्मांतरण करने की दिशा में गुपचुप प्रयास करते हुये बहुमत निर्माण की योजना का षड्यंत्र भी कर रहे हैं।
ध्यान रहे हमारे मंत्रों की शक्ति – परमशक्ति है। जिसमें जगत के उद्धार की क्षमता भी है।

किंतु आज की इस जागरण रैली और झांकी से मन मानस में जिन भावों का संचरण हुआ है उससे धर्म की प्रति अनुराग और अनुरक्ति में वृद्धि हुई है। हमारा सनातन हिन्दू धर्म सात्विक और श्रेष्ठ है..जिसके अनुगामी भी हम है। जिन सद्गुणों को हम धारण करते हैं उसे धर्म कहते हैं। भगवान राम और कृष्ण का अवतरण पाप के विनाश के लिये हुआ था, धर्म की रक्षा के लिये हुआ…राम और कृष्ण की पावन परंपरा को पुनः पुनः प्रारम्भ कर विकृति से जागृति की दिशा में :-
प्रतिदिन थोड़ा – थोड़ा योगदान देते रहें हम,
जय 36 गढ़, जय माँ दंतेश्वरी जय जय गीदम!
लेख – अवधेश अवस्थी, गीदम

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