सक्ती– जिले के मालखरौदा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम मुक्ता निवासी गबेल परिवार की इंतजार की घड़ियां उस समय खत्म हुई जब शनिवार को यूक्रेन में फंसा उनका पुत्र राजेश गबेल घर लौट आया। राजेश रायपुर एयरपोर्ट से सीधे सिद्ध शक्तिपीठ मां अष्टभुजी मंदिर अड़भार पहुंचकर पूजा अर्चना किए । तब बेटे के घर लौटने पर माता, बड़ा भाई , भाभी व बड़ी बहन व सारे परिवार के सदस्य प्रसन्न नजर आए और राजेश की आरती कर परिवार सदस्यों ने पटाखे, रंगोली, पुष्पगुच्छ सप्रेम भेंट कर स्वागत किए ।
युद्ध से घिरे यूक्रेन से घर लौट आए राजेश भी अब स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। राजेश यूकेन के जेप्रोजिया स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस 4 वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे ।
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद भारतीय छात्रों के यूकेन से वापस लौटने का दौर जारी है। जो छात्र यूकेन में फंसे हुए हैं, उनके माता-पिता व स्वजन चिंतित हैं, और अपनों के वापस लौटने का इंतजार कर रहे हैं। मालखरौदा के ब्लॉक के ग्राम मुक्ता खाल्हे पारा निवासी पोस्टमास्टर स्व. श्याम लाल गबेल , श्रीमती तेजकुमारी के पुत्र राजेश गबेल एमबीबीएस की पढ़ाई यूक्रेन के जेप्रोजिया स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में कर रहा था। युद्ध शुरू होने के बाद राजेश भी यूक्रेन में फंसा हुआ था। इस बीच लगातार उसकी बात अपने परिजनों से हो रही थी। साथ ही वीडियो कालिंग के माध्यम से भी वे राजेश से बात कर रहे थे लेकिन उन्हें अपने बेटे के घर लौटने का इंतजार था
शनिवार को उनका यह इंतजार खत्म हुआ और राजेश सकुशल घर पहुंच गया। राजेश के घर पहुंचने पर उनके परिजनों ने आरती कर स्वागत किया। राजेश की मां तेजकुमारी गबेल ने बताया कि युद्ध शुरू होने का समाचार मिलने के बाद से वह परेशान थी। वह इंतजार कर रही थीं कि कब बेटा घर लौट आएगा। राजेश के बड़े भाई मुकेश और बड़ी बहन पुष्पलता गबेल ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद मोबाइल पर ही संपर्क हो रहा था लेकिन राजेश के बंकर में चले जाने और बार्डर पर होने के दौरान नेटवर्क नहीं रहता था साथ ही मोबाईल चार्ज की भी सुविधा नहीं थी जिससे बात नहीं हो पाती थी, जिससे चिंता और भी बढ़ जाती थी। उन्होंने कहा कि बेटा घर लौट आया है, जिससे वह बहुत खुश हैं। साथ ही उन्होंने भारतीय छात्रों की घर वापसी के लिए भारत सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना भी की।

बमबारी होने पर बंकर में पड़ता था छिपना
यूकेन से लौटे छात्र राजेश गबेल ने बताया कि युद्ध पूर्वी यूकेन की ओर से शुरू हुआ था। 24 फरवरी को हवाई हमला शुरू हुआ। मेरे कुछ दोस्त घर वापस लौटने के लिए एयरपोर्ट गए हुए थे, लेकिन बमबारी शुरू होने से उन्हें वापस लौटना पड़ा था। पहले बमबारी हुई थी, टर्नोपिल शहर पश्चिमी यूकेन में है, जिसके चलते शुरुआती दिनों में वहां बमबारी नहीं हुई, लेकिन उसके बाद पश्चिम की ओर भी बमबारी होने लगी थी। जिसके कारण लोग दहशत में थे। रात में इंडियन एंबेसी की ओर से बार्ड तक पहुंचने के लिए एडवाइजरी जारी की गई। जिसके बाद हमें बार्डर तक पहुंचना था। लेकिन बार्डर तक पहुंचने के लिए बस और ट्रेन नहीं मिल रही थी। माल में सामान की खरीददारी के लिए लोगों की भीड़ लगी हुई थी और लोगों के पास कैश नहीं था। लगातार सायरन बजते रहे थे, जिसके बाद लोग जान बचाने के लिए बंकर में चले जाते थे। जहां लोग अपने साथ खाने पीने का सामान भी साथ लेकर जाते थे और भोजन की जरूरत पड़ने पर बाहर निकलते थे। राजेश बघेल अपने साथियों के साथ 4 दिन तक बनकर में फंसे रहे ।
2018 से यूक्रेन में पढ़ाई कर रहे थे राजेश
2018 में पढ़ाई के लिए राजेश यूक्रेन गए थे और वर्तमान में एमबीबीएस के 4 वर्ष के छात्र के रूप में पढ़ाई कर रहे थे। राजेश बताते है कि फिलहाल बताया जा रहा है कि आनलाइन पढ़ाई जारी रहेगी। युद्ध समाप्त होने के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।