सक्ती-छत्तीसगढ़ प्रदेश के आगामी माह में अस्तित्व में आने वाले नवीन जिला मुख्यालय शक्ति के मुख्य रेलवे स्टेशन में इन दिनों रेल यात्री यात्री सुविधाओं के नाम पर बांट जोह रहे हैं, किंतु रेलवे प्रशासन को इसकी कतई चिंता नहीं है, रेलवे प्रशासन द्वारा सुविधाओं के लाख दावे किए जाते हैं, तथा बकायदा विगत दिनों शक्ति रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर रेलवे प्रशासन द्वारा एक सूचना बोर्ड लगाकर स्टेशन परिसर में सुविधाओं की जानकारी देते हुए आंकड़े बताए गए हैं,किंतु इन आंकड़ों की हकीकत कुछ और ही नजर आती है, शक्ति रेलवे स्टेशन में रेलवे प्रशासन द्वारा यात्रियों के रुकने के लिए रिटायरिंग रूम की बात कही जाती है किंतु हकीकत तो यह है कि प्लेटफार्म नंबर एक पर बना हुआ रिटायरिंग रूम जिसमें लगभग समय ताला लगा रहता है तथा यहां रेलवे के ही सुरक्षा अधिकारियों का कब्जा देखा जाता है, वहीं दूसरी ओर प्लेटफार्म नंबर एक के मुख्य शौचालय की स्थिति किसी से छिपी नहीं है इस शौचालय में जहां बिना दरवाजे के ही शौचालय स्थापित हैं, तो वही शौचालय के अंदर की स्थिति को देखकर यह सहज अंदाज लगाया जा सकता है कि आज पूरे देश में जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छता के लिए अलख जगा रहे हैं,तथा रेलवे प्रशासन भी प्लेटफार्म पर एवं अपने स्टेशन परिसरों में स्वच्छता को लेकर बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर इसका प्रचार करती नजर आती है, किंतु शक्ति के प्लेटफार्म नंबर एक पर रेलवे कार्यालय के बगल में ही स्थित मुख्य शौचालय की स्थिति इन सब से कहीं अलग नजर आती है, तथा शौचालय की स्थिति को देखते हुए यहां कोई जाना ही नहीं चाहता एवं यह सारे शौचालय अनुपयोगी हो चले हैं, वहीं बिना दरवाजे के शौचालय को क्या उपयोग करना संभव है, किंतु रेलवे प्रशासन को इसकी कतई चिंता नहीं है, वही शक्ति रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर हावड़ा की ओर रात्रि समय आवश्यक प्रकाश व्यवस्था भी नजर नहीं आती, किंतु रेलवे प्रशासन अपने सूचना बोर्ड में शक्ति स्टेशन में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की बात कहता है, शक्ति रेलवे स्टेशन में रेल यात्रियों को पानी सुविधा की बात देखी जाए तो पानी की टोटियां एवं वाटर कूलर जरूर लगे हुए हैं,किंतु आए दिन ये सभी रेल यात्रियों की पहुंच से काफी दूर रहते हैं, तथा नलों की टोटियों में जहां पानी ही नहीं आता तो वही वाटर कूलर में सामान्य पानी ही लोगों के लिए कभी- कभार उपलब्ध रहता है, वाटर कूलर भी रखरखाव के अभाव में जवाब देने लगे हैं,वहीं दूसरी ओर शक्ति रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 1 और 2 में रेल यात्रियों के लिए बैठने की व्यवस्था देखी जाए तो पुरानी लोहे की कुर्सियां जर्जर हो चुकी हैं किंतु इन कुर्सियों को भी रेलवे प्रशासन अपने आंकड़ों में उपयोगी बताता है,वही शक्ति रेलवे स्टेशन में वर्षों से रेल यात्री एक्सप्रेस ट्रेनों के आने पर इंडिकेशन बोर्ड की मांग कर रहे हैं,किंतु आज पर्यंत तक प्लेटफार्म नंबर एक एवं दो में इंडिकेशन बोर्ड स्थापित नहीं किए गए हैं

जिससे रेल यात्रियों को यात्रा करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर शक्ति रेलवे स्टेशन में देखा जाए तो यात्री सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है रेलवे प्रशासन भले लाख ढोल पीटता हो किंतु आज इस क्षेत्र से यात्रा करने वाले रेल यात्री ही इस स्टेशन का दर्द समझ सकते हैं, शक्ति रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक एवं दो में जहां पर्याप्त मात्रा में शैड की भी उपलब्धता नहीं है तथा प्लेटफार्म नंबर एक में केवल दो शेड है जबकि वर्तमान समय में देखा जाए तो कम से कम 5 शेड अत्यंत आवश्यक है,वहीं प्लेटफार्म नंबर दो पर भी कम से कम 5 शेड की आवश्यकता है,किंतु आज सिर्फ दो शेड ही स्थापित हैं,वे भी वर्षों पुराने छोटे साइज के बने हुए शेड हैं जिसमें बारिश के समय या भरी दुपहरी में रेल यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है,तथा बारिश के समय तो शेड के नीचे खड़े हुए रेल यात्री भी बारिश में भीग जाते हैं, यह स्थिति आम हो गई है, वही रेलवे स्टेशन में रेलवे द्वारा फुट ओवर ब्रिज भी इतना अधिक पेचीदा बना दिया गया है जिससे यात्रियों को प्लेटफार्म नंबर एक पर पहुंचने के लिए ही चारों धाम की यात्रा करनी पड़ती है, तथा क्षेत्र के रेल यात्री यहां इस फुट ओवर ब्रिज की स्थिति को देखते हुए यात्रियों की सुविधाओं के अनुरूप पहल करने की मांग कर चुके हैं, किंतु रेल यात्रियों की सुनने वाला कोई नहीं है, शक्ति रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर- दो पर लगे हुए बड़े-बड़े विशालकाय पेड़ों को भी विगत महीनों प्लेटफार्म विस्तार की बात कहते हुए काट दिया गया है तथा आज पर्यंत तक नहीं किसी भी प्लेटफार्म का कोई विस्तार नही हो पाया है और ना ही कोई सुविधाओं में बढ़ोतरी हुई है, शक्ति शहर के रेल यात्री सुविधाओं को लेकर काफी नाराज एवं आक्रोशित देखे जाते हैं, यात्रियों का कहना है कि आज क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी रेलवे सुविधाओं के लिए कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं, तथा चुनाव के समय सिर्फ बड़े-बड़े वायदे कर जनता से वोट मांग लिए जाते हैं,किंतु जब सुविधाएं मुहैया करवाने की बात आती है, जब ये जनप्रतिनिधि कहीं नजर नहीं आते, सिर्फ बड़ी-बड़ी बैठकों में सुविधाओं के लिए मांगे रखकर अपनी इतिश्री कर लेते हैं, किंतु आम जनता के बीच जाकर ये जनप्रतिनिधि कभी उनकी समस्याओं को समझने का ना ही प्रयास करते, और ना ही समस्याओं के निराकरण के लिए रेल प्रशासन द्वारा पहल नहीं किए जाने के कारण कोई आंदोलनाआत्मक कदम उठाते जिसके चलते आज क्षेत्र के रेलयात्री परेशान है एवं उन्हें सुविधाएं नहीं मिल रही हैं
