हिंदू नववर्ष की तैयारियां जोरों से- 22 मार्च को हिंदू नववर्ष पर शक्ति शहर में निकलेगी भव्य शोभायात्रा, तैयारियों के लिए 28 फरवरी को गायत्री मंदिर शक्ति में होगी बैठक

सक्ति-जिला मुख्यालय शक्ति के हिंदू संगठनों द्वारा आगामी 22 मार्च 2023 दिन- बुधवार को हिंदू नववर्ष के पावन पर्व पर भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, तथा शहर सहित पूरे क्षेत्र में हिंदू नववर्ष के पावन पर्व पर लोगों के घरों में एवं सार्वजनिक स्थानों पर ध्वज भी लगाए जाएंगे, उपरोक्त कार्यक्रम की तैयारियों के लिए एक आवश्यक बैठक 28 फरवरी दिन- मंगलवार को दोपहर 1:00 बजे से श्री गायत्री मंदिर मालखरौदा बस स्टैंड शक्ति में रखी गई है, तथा उपरोक्त बैठक में 22 मार्च के कार्यक्रम की समस्त रूपरेखा एवं कार्ययोजना तैयार की जाएगी, समस्त सदस्यों से इस बैठक में शामिल होने की अपील की गई है

उल्लेखित हो कि हिंदू नववर्ष का आयोजन पूरे देश में धूमधाम के साथ किया जाता है, तथा इस अवसर पर जहां जगह-जगह गांव, कस्बे एवं शहरों में भी विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होता है, तो वही इस दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, धर्म जागरण मंच, बजरंग दल, सहित अनेकों अनुषांगिक संगठनों द्वारा इस आयोजन को संयुक्त रूप से भव्यता के साथ संपन्न कराया जाता है

जानिए कितना है हिंदू नववर्ष का महत्व

हिन्दू नव वर्ष विक्रम संवत पर आधारित है। पंचांग के अनुसार, इस साल विक्रमी संवत 2080 हिन्दू नव वर्ष 22 मार्च 2023, दिन बुधवार (बुधवार के खास मंत्र) को मनाया जाएगा। हिन्दू नववर्ष को और भी कई नामों से जाना जाता है जैसे कि, संवत्सरारंभ, वर्षप्रतिपदा, विक्रम संवत् वर्षारंभ, गुडीपडवा, युगादि आदि,शास्त्रों में कुल 60 संवत्सर बताए गए हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार हिन्दू नववर्ष का पहला दिन जिस भी दिवस पर पड़ता है पूरा साल उस ग्रह का स्वामित्व माना जाता है। इस साल हिन्दू नववर्ष बुधवार के दिन से शुरू हो रहा है। ऐसे में बुध ग्रह इस पूरे साल के स्वामी माने जाएंगे,हिन्दू नववर्ष पूजा-पाठ के लिहाज से बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। हिन्दू नववर्ष की जब शुरुआत होती है तब चैत्र का महीने होता है और बसंत ऋतु का आगमन होता है। चैत्र माह और हिन्दू नव वर्ष का पहला त्यौहार नवरात्रि पड़ता है जिसमें 9 दिनों तक मां दुर्गा की पूर्ण श्रद्धा से पूजा की जाती है,हिन्दू नववर्ष से ही त्यौहारों की शुरुआत हो जाती है। हिन्दू नव वर्ष आध्यात्म का केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि हिन्दू नव वर्ष के पहले दिन ही प्रभु श्री राम (श्री राम ने क्यों भोगा 14 वर्ष का ही वनवास) का राज्याभिषेक हुआ था। हिन्दू नव वर्ष के पहले दिन ही श्री राम ने बाली का वध किया गया था। युधिष्ठिर भी इसी दिन राजा बने थे,इसी दिन से मां दुर्गा घर-घर में विराजती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। हिन्दू नव वर्ष के प्रथम दिन ही ब्रह्मा ने इस ब्रह्मांड और सृष्टि का सृजन किया था। माना जाता है कि हिन्दू न्यू ईयर के पहले दिन की शुरुआत अगर भजन पूजा-पाठ से की जाए तो इससे पूरा साल शुभ परिणामों के आगमन से बीतता है, हिन्दू कैलेंडर पूरी तरह से विज्ञान पर आधारित है। इसी कारण से अंतरिक्ष या किसी भी वैज्ञानिक अनुसंधान में हिन्दू पंचांग को इंग्लिश कैलेंडर के मुकाबले ज्यादा महत्व दिया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, न सिर्फ तिथि का पता चलता है बल्कि ग्रह-नक्षत्रों की चाल और उनके हाल के बारे में भी जाना जा सकता है। हिन्दू नव वर्ष आध्यात्म के साथ-साथ वैज्ञानिक आधार भी रखता है|

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