शक्ति- शक्ति विधानसभा क्षेत्र में पोस्टर वार एक सामान्य बात हो गई है, तथा वर्ष भर विभिन्न अवसरों पर या की राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं के आगमन पर शहर के चारों ओर अग्रसेन चौक एवं प्रमुख मार्गों के किनारे बड़े-बड़े होर्डिंग फ्लेक्स देखे जाते हैं, तथा राज्य में कांग्रेस की सरकार आने के बाद शक्ति शहर में कांग्रेस नेताओं में ही आपस में होर्डिंग्स को लेकर भारी उत्साह देखा जाता है, तथा शहर के चारों ओर बड़े-बड़े होर्डिंग फ्लेक्स बैनर साल भर लगे रहते हैं, वहीं दूसरी ओर 11 नवंबर को छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उनके प्रवास से पूर्व शहर के अग्रसेन चौक से स्टेशन रोड जाने वाले मार्ग में लगाए गए आदिवासी सम्मेलन के कुछ होर्डिंगस को लेकर कांग्रेस के ही कुछ युवा नेताओं ने पक्षपातपूर्ण रवैया बताते हुए इसका विरोध किया है, तथा जनपद पंचायत सक्ति के सदस्य, छत्तीसगढ़ प्रदेश युवक कांग्रेस के सहसचिव एवं युवा आदिवासी समाज जांजगीर-चांपा के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह ने ग्राम खैरा बासीन में आयोजित आदिवासी सम्मेलन के हॉर्डिंग स्थानीय प्रशासन द्वारा निकाले जाने पर अपना विरोध जताते हुए कहा है, कि ये होर्डिंग आगामी दिनों में होने वाले सम्मेलन के लिए कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए थे, तथा इनको स्थानीय प्रशासन द्वारा बिना कारण हटा दिया गया है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन द्वारा होर्डिंग हटाए जाने को लेकर स्वच्छता अभियान की बात कही जा रही है, किंतु यह बात समझ से परे है कि आखिर में होर्डिंग को लेकर शक्ति में सियासी बवाल क्यों मचता है, तथा 15 अगस्त को प्रदेश के मुख्यमंत्री ने शक्ति को नया राजस्व जिला घोषित कर दिया गया है, तथा अब राजस्व जिले के अनुसार शक्ति शहर में भी आने वाले समय में इसे व्यवस्थित करने कार्ययोजना बनेगी,किंतु 11 नवंबर को होल्डिंग्स को लेकर मचा बवाल आने वाले समय में क्या गुल खिलाएगा यह तो समय ही बताएगा, किंतु सत्ता पक्ष के लोग ही आपस में यदि छोटी-छोटी बातों पर इस तरह से अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाएंगे तो फिर भला इसका क्या परिणाम निकलेगा
एवं आने वाले 2 सालों के बाद प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं,तथा शक्ति विधानसभा क्षेत्र पूरे प्रदेश में 90 विधानसभा क्षेत्रों में अपना एक अहम स्थान रखता है, तथा विगत विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की टिकट पर डॉ चरणदास महंत ने छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व कैबिनेट मंत्री मेघाराम साहू को पराजित कर शक्ति की सीट पर अपना कब्जा किया था, किंतु आने वाले समय में जिस तरह से शक्ति विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी में ही दावेदारों की लंबी सूची होती जा रही है, तो वहीं विधानसभा अध्यक्ष महंत भी अपने सुपुत्र सूरज महंत को आए दिन विभिन्न राजनीतिक कार्यक्रमों में भी सक्रिय रूप से साथ लेकर उनकी भागीदारी करते देखे जाते हैं, एवं राजनीतिक सूत्रों की मानें तो आने वाले 2023 के विधानसभा चुनाव में सूरज महंत ही शक्ति विधानसभा क्षेत्र से संभावित प्रत्याशी हो सकते हैं, वहीं दूसरी ओर शक्ति विधानसभा क्षेत्र में दशकों से अपना राजनीतिक प्रभाव रखने वाले राजमहल परिवार से भी वर्तमान में राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह के बाद धर्मेंद्र सिंह सक्रिय रुप से राजनीति में कार्य कर रहे हैं,तथा धर्मेंद्र सिंह जहां विगत वर्षों कोरबा जिले की रामपुर विधानसभा क्षेत्र में अपनी दावेदारी प्रमुखता के साथ कर चुके हैं, तो वहीं वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए तथा शक्ति को राजस्व जिले का दर्जा मिलने के बाद कहीं ना कहीं महल परिवार की नजरें शक्ति विधानसभा पर भी टिकी हुई हैं, तथा हो सकता है महल गुट की ओर से आने वाले समय में धर्मेंद्र सिंह को शक्ति विधानसभा क्षेत्र में प्रत्याशी के रूप में दावेदारी करवाई जाए, वहीं दूसरी ओर शक्ति विधानसभा क्षेत्र का विगत राजनीतिक इतिहास देखा जाए तो कांग्रेस पार्टी के ही आपस में गुटबाजी के चलते अनेकों बार कांग्रेस ने यह सीट खोई है,किंतु वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए कांग्रेस पार्टी का आपस में राजनीतिक समन्वय जो कि गुटों में बटा हुआ है,वह किस तरह से एक होता है यह तो आने वाला समय ही बताएगा