चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन की 94 वी ई संगोष्ठी सम्पन्न, बाल कल्याण समिति जांजगीर-चांपा की अध्यक्ष नम्रता पटेल भी हुई शामिल
सीडब्ल्यूसी प्रेसिडेंट नम्रता ने की देहदान की घोषणा,सीसीएफ के अध्यक्ष,सचिव सहित 31 सदस्यों ने किए अंगदान
सक्ति-हमारे देश में हर घण्टे एक शख्स की मौत इसलिए हो जाती है क्योंकि उसे जीवन उपयोगी किडनी उपलब्ध नही होती है। शरीर का लगभग प्रत्येक अंग मृत्यु उपरांत किसी जरूरतमंद की जिंदगी को खुशहाल कर सकता है। नई चिकित्सकीय प्रविधियों के माध्यम से तो अब हड्डियां भी दान की जा सकती है। देश के ख्याति प्राप्त समाजकर्मी और चिकित्सक डॉ राकेश भार्गव ने यह बात चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन की 94 वी ई संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही। भार्गव के प्रेरक वक्तव्य से प्रभावित होकर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ राघवेंद्र शर्मा,सचिव डॉ कृपा शंकर चौबे समेत 31 सदस्यों ने अपने नेत्र एवं सम्पूर्ण देहदान के संकल्प पत्र आज हस्ताक्षर किए। डॉ भार्गव के अनुसार एक व्यक्ति के देहदान से करीब 35 व्यक्तियों के जीवन की शारीरिक कठिनाइयों को स्थाई रूप से दूर किया जा सकता है।एक व्यक्ति जब अपने आंखे दान करता है तो वह चार लोगों को नेत्र ज्योति उपलब्ध कराने का पुण्य अर्जित करता है। उन्होंने बताया कि उन्नत तकनीक के चलते अब हड्डियों को भी दान किया जा सकता है जिनकी चर्चा ऋषि दधीचि के प्रसंग से की जाती है।भोपाल एम्स में यह सुविधा उपलब्ध है।लंग्स जैसे अतिशय संवेदनशील अंग को दान कर भी लोगों की जीवन प्रत्याशा में 25 फीसद की बढ़ोतरी की जा सकती है।भोपाल एम्स में यह कार्य आरंभ हो गया है और अगले साल तक हमीदिया अस्पतालमें भी किडनी औऱ लीवर ट्रांसप्लांट की सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

डॉ भार्गव के मुताबिक लिवर, ह्रदय, लंग्स को मृत्यु के अगले पांच घण्टे एवं किडनी को 48 घण्टे तक प्रिजर्व कर जरूरतमंद के शरीर मे प्रत्यारोपित किया जा सकता है। ब्रेन स्ट्रेम डेथ ईश्वरीय देन है:हरीश मंत्री सामाजिक कार्यकर्ता हरीश मंत्री ने बताया कि अंगदान के लिए शरीर तभी योग्य होता है जब ब्रेन स्ट्रेम डेथ हो। ऐसी दशा में मस्तिष्क तक खून की आपूर्ति नही होती है। इसलिए अन्य अंग सक्रिय रहते है जबकि कार्डियक डेथ में ऐसानही होता है। इसलिए मृत्यु का स्वरूप ईश्वरीय अनुकम्पा से ही तय होता है।फाउंडेशन के सचिव डॉ कृपा शंकर चौबे ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए बताया कि देश में पांच लाख लोग हर साल अंग प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे होते हैं। देश मे प्रति दस लाख लोगों में से महज 0.08 लोग ही अंगदान करते है जबकि यूरोप में यह आंकड़ा 30 एवं स्पेन में 40 है,ई संगोष्ठी के दौरान चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ राघवेंद्र सहित 16 सदस्यों ने अपने नेत्रदान एवं 15 ने अपना सम्पूर्ण सदस्य देहदान की घोषणा के साथ निर्धारित प्रपत्र ऑनलाइन भरकर इसकी प्रक्रिया पूर्ण की
वही जांजगीर-चांपा जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष नम्रता पटेल भी अपने सदस्यों के साथ इस ई संगोष्ठी में शामिल हुई, तथा उन्होंने स्वास्थ्य को लेकर अपने भी महत्वपूर्ण सुझाव रखे तथा नम्रता पटेल ने भी देहदान करने की घोषणा की,तथा नम्रता ने इस अवसर पर कहा कि मृत्यु उपरांत हमारा शरीर का कोई भी अंग यदि किसी दूसरे व्यक्ति के काम आता है,तो यह बहुत बड़ा पुण्य का काम है, साथ ही वर्तमान में समस्याओं को देखते हुए यह एक सकारात्मक पहल है, तथा इस दिशा में हम सभी को सजग होकर कार्य करना चाहिए, वहीं नम्रता पटेल द्वारा भी देहदान की घोषणा किए जाने पर जांजगीर-चांपा जिले के सीडब्ल्यूसी सदस्यों ने भी उनका साधुवाद ज्ञापित किया है, तथा नम्रता का कहना है कि वे निरंतर इस दिशा में एक जागरूकता अभियान चलाकर लोगों से देहदान के संकल्प पत्र भरवाएगी,जिससे आने वाले समय में इस दिशा में एक सकारात्मक पहल हो सके