रायपुर । करीब पौने तीन करोड़ की आबादी वाले छत्तीसगढ़ के लगभग डेढ़ फीसद लोगों ने खुद को भूमिहीन बताया है। सरकार इनके दावों की जांच कर रही है, ताकि वास्तविक भूमिहिनों को राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना का लाभ दिया जा सके। इस योजना के तहत सरकार पत्र लोगों को हर वर्ष छह हजार रुपये देगी। योजना को चालू वित्तीय वर्ष में ही शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। यानी तीन महीने के अंदर हितग्राहियों के बैंक खातों में रकम पहुंच जाएगी।
राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के लिए पंजीयन की अंतिम तारीख 30 नवंबर तय की गई थी। निर्धारित समय सीमा में चार लाख 41 हजार 658 लोगों ने आवेदन किया है। भू-अभिलेख विभाग के संचालक ने बताया कि आवेदनों का पंजीयन और सत्यापन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। सत्यापन के बाद पात्र हितग्राहियों की सूची तैयार कर ग्राम सभा में दावा आपत्ति प्राप्त करने के लिए रखा जाएगा।
दावा आपत्ति के निराकरण के बाद हितग्राहियों की अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी। अफसरों ने बताया कि यह योजना ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदरों को संबल देने की दृष्टि से शुरू की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में कृषि भूमिहीन परिवारों की पहचान कर उन्हें वार्षिक आधार पर आर्थिक अनुदान उपलब्ध कराना है ताकि उनकी आय में वृद्धि और जीवन स्तर को बेहतर किया जा सके।
इस योजना का लाभ राज्य के ऐसे मूल निवासियों को मिलेगा, जिस परिवार के पास थोड़ी भी कृषि भूमि नहीं है। ऐसे परिवारों में चरवाहा, बढई, लोहार, मोची, नाई, धोबी, पुरोहित जैसे पौनी-पसारी व्यवस्था से जुड़े परिवार, वनोपज संग्राहक और सरकार की तरफ से समय-समय पर नियत अन्य वर्ग भी पात्र होंगे।
सीधे आर्थिक मदद की एक और योजना
राज्य सरकार अब तक राजीव गांधी किसान न्याय योजना और गोधन न्याय योजना के माध्यम से हितग्राहियों को सीधा आर्थिक मदद कर रही है। लघु वनोपज की खरीदी समेत कुछ और योजनाओं में भी हितग्राहियों की सीधे आर्थिक मदद की जा रही है। भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना भी उसी कड़ी में सरकार की एक और योजना है।