रायपुर, तीन साल के मासूम सुभाष का अपहरण हुआ 72 घंटे यानी तीन दिन से ज्यादा का समय हो गया, लेकिन पुलिस अब तक ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच पाई है। सुभाष की तलाश करने के लिए पुलिस ने घटनास्थल से लेकर आरंग तक 80 से ज्यादा कैमरों की जांच की है। इन कैमरों की जांच के बाइक सवार तो पुलिस को दिखे है, लेकिन उनकी गाड़ी का नंबर या चेहरा स्पष्ट नहीं दिखा है। पुलिस ने संदेह के आधार पर सुभाष के पिता बजरंग सोनवानी के परिचित को बिठाया है। पूछताछ में संदेही घटना के दिन रायपुर में ना होने की बात कह रहा है। पुलिस अधिकारियों का दावा है, कि संदेही घटना में शामिल है, लेकिन उसके खिलाफ साक्ष्य ना मिलने की वजह से उससे सख्ती से पूछताछ नहीं कर पा रहे है।
तीसरी आंख धुंधली
शहर की निगरानी के लिए लगाए गए कैमरे अब धुंधले हो गए है। कैमरे धुंधले होने की वजह से आरोपियों का स्पष्ट चेहरा और गाड़ी नंबर नहीं दिख रहा है। आरोपित जिस रास्ते से फरार हुए है, उस रास्ते में दक्ष कंट्रोल रूम से मॉनीटर किए जाने वाले पांच से ज्यादा कैमरे लगे है। इन कैमरों में आरोपियों का ब्लर फुटेज आया है। केस की जांच कर रहे अफसरों का कहना है, कि मुखबिरों के साथ-साथ तकनीकी जांच की मदद ले रहे है। बच्चे को सकुशल बरामद करने का प्रयास किया जा रहा है।
छह टीम लगी सुभाष की तलाश में
मासूम सुभाष की तलाश में सिविल लाइन थाना की टीम और एसीसीयू की छह टीम लगी हुई है। इन टीमों में 15 से ज्यादा पुलिसकर्मी काम कर रहे हैं। अफसरों का कहना है, कि बजरंग और उसकी पत्नी से रंजिश रखने वाले लोगों का भी पता लगाया जा रहा है। पुलिस पारिवारिक रंजिश के साथ मानव तस्करी गिरोह एंगल पर जांच करने की बात कह रही है।
टिकरापारा इलाके से भी हो चुका है मासूम लापता
टिकरापारा इलाके से पहले भी एक मासूम मुस्तफा गायब हो चुका है। अब तो पुलिस ने भी उम्मीदें खो दी है। घर से शाम को वह खेलने के लिए निकला था, जिसके बाद वापस नहीं आया।