सक्ती- विश्व कविता दिवस के मौके पर देश के प्रतिष्ठित क्रिएटिविटी कैफे की डायरेक्टर,साहित्य मधुशाला की संस्थापक सदस्य, अंतरराष्ट्रीय अग्रवाल सम्मेलन की मासिक अग्र ज्योति पत्रिका की संपादक का कर्मठ समाज सेविका उषा केडिया ने पंक्तियों के माध्यम से अपनी भावनाएं व्यक्त की है, उषा केडिया कहती हैं कि
कविता का उपहार
ऐ कविता !!
कविता दिवस पर
तुझे क्या उपहार दूँ?
सुंदर शब्दों के मोती से
क्या तेरी अभिव्यंजना दूँ?
या रस, छंद,अलंकारो से
तुझे संवार दूँ?
कल्पना की उड़ान से
क्या रवि को मात दूँ?
या भावों की अभिव्यक्ति
काग़च पर उतार दूँ?
दुःख,विरह के रुदन से
क्या जीवन में अवसाद भर दूँ?
या चाँद, तारो को दिखा
संसार प्रेम मय कर दूँ?
नदी, झरनो की कल- कल से
क्या दिलो को झंकार दूँ?
या समुद्र में आते ज्वार-भाटे से
होती छती को बखान दूँ?
देश के वीर वीरांगनाओं की
क्या गाथा का गुणगान कर दूँ?
या जीवन संघर्ष जो घबराते उनके
अंतिम विराम की चर्चा फैला दूँ?
क्षितिज के इस पार से उस पार तक
ज़मीं से लेकर आसमान तक
सूरज, चाँद से लेकर दिन रात तक
माँ के प्यार से लेकर पिता के समर्पण तक
जन्म से लेकर मृत्यु के सफ़र तक
किट,पशु पक्षी से लेकर प्राणी तक
हर बात को ऐ कविता
कविता में ही मैं कह दूँ!!
बस आज तुझे ऐ कविता।
मैं कविता का ही उपहार दूँ!!
उषा जैन केडिया( मैसूर) कर्नाटक