शिवरीनारायण, धार्मिक नगरी शिवरीनारायण भगवान जगन्नाथ स्वामी जी की प्रकाटय स्थल होने से यहां प्रतिवर्ष भगवान श्रीराम चन्द्र एवं श्रीकृण्ण जी की जन्मोत्सव को बड़े धुमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष कुछ लोगों ने 6 अगस्त को और अधिकांश नगरवासियों ने 7 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को बड़ी श्रध्दा के साथ मनाया नगर के प्राय: सभी मंदिरों में कृण्ण जन्माष्टमि 7अगस्त को मनाया गया इस दिन कई युवक- युवती व महिला पुरूष उपवास था और लोग अपने-अपने घरों में मिष्ठान के रूप में कुसली , मालपुआ, खीर आदि बनाये हुए थे तथा अपने छोटे-छोटे बच्चों को श्रीकृष्ण एवं राधा की वेशभूषा में श्रृंगार किया था। नगर के प्रमुख मंदिर श्री शिवरीनारायण भगवान एवं मठ के श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर सहित अन्य राधा कृण्ण और श्रीराम जानकी मंदिरों को फूलमालाओं एवं गुब्बारों से आकर्षक ढ़ग से सजाया गया था श्रीकृण्ण एवं राधा की बाल रूप को झूला मे विराजित कर श्रध्दालूओं व्दारा बड़ी श्रध्दा से झूलाया जा रहा था सुबह से ही सभी मंदिरों मे श्रीकृण्ण जी का भजन कीर्तन प्रारंभ हो गया जो कृण्ण जन्म के समय रात्रि 12 बजे तक चलता रहा और रात्रि 12 बजे मंदिरो में ढ़ोल, नंगाडे , शंखनाद एवं आतिशबाजी के साथ महाआरती कर श्रध्दालूओं को पंचामृत एवं पंजरी का प्रसाद वितरण किया गया। श्रध्दालू भी भगवान श्रीकृष्ण को कुसली, मालपुआ और फल का भोग लगाये।

यादव समाज कर्मा नृत्य के साथ शोभा यात्रा निकाल कर मटके फोडे
यादव समाज भगवान श्री कृण्ण को अपना इष्ट देव मानते हैं और इस समाज के व्दारा श्रीकृण्ण जन्माष्टमी को बडी धुमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष भी नगर के यादव समाज व्दारा नगर मे लगभग दोपहर 3 बजे श्रीकृण्ण एवं राधा की शोभा यात्रा निकाला गया जिसमें छोटे-छोटे बच्चों को श्रीकृण्ण एवं राधा के बाल रूप में सजा कर रथ एवं घोड़े की पालकी में बैठाये थे और यादव समाज के सभी लोग उनके साथ चल रहे थे तथा युवकों व्दारा नगर के विभिन्न चौक चौराहों मे मटके भी फोड़ते जा रहे थे। इसी तरह नगर के कुछ युवा समिति व्दारा भी नगर मे श्रीकृण्ण की झांकी निकाल कर नगर मे जगह-जगह पर मटके फोडे गये इस दौरान इस झांकी के साथ काफी संख्य मे महिलाएं व बच्चे साथ-साथ चल रहे थे।