हलचल… अनिल साहू बनेंगे पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ

भाजपा के छगन और कांग्रेस के साय

भाजपा में रहते दिग्गज आदिवासी नेता की पहचान बना चुके नन्दकुमार साय कांग्रेस में जाने के बाद इन दिनों एक अलग दौर से गुजर रहे हैं। चौथेपन में वह विधानसभा टिकट के लिए हाथ-पैर मारते दिखाई दे रहे है। साय कभी मरवाही से तो कभी पत्थलगॉवव से दावेदारी करते नजर आते हैं। भाजपा में रहते नन्दकुमार साय एक ऐसे नेता थे जिनके धमक से राज्य भाजपा का हर बड़ा और छोटा नेता उनके सम्मान में अपनी कुर्सी छोड़ देता था, उसके बाद भी साय अपने आप को उपेक्षित महशूस कर रहे थे। कांग्रेस साय को अब हाथों-हाथ ले रही है। एक तस्वीर इन दिनों शोसल मीडिया में जमकर घूम रही है, जिसमें 77 वर्षीय नन्दकुमार साय अगली पंक्ति में आने के लिए युवा नेताओं के समान धक्का लगाते और खाते नजर आ रहे हैं। खैर इस तस्वीर से बाहर भी बहुत कुछ है, जिसका जिक्र यहां किया जा सकता है। नन्दकुमार साय वर्तमान में जिस कुर्सी का दायित्व सम्भाल रहे हैं, कभी उन्हीं की भाजपा सरकार में इस कुर्सी का दायित्व छगनलाल मुदडा ने भी बखूबी संभाला था। छगन जब सीएसआईडी के चेयरमेन थे, तब साय की हैसियत एक राष्ट्रीय नेता की थी। विधानसभा टिकट की चाह ने साय को भाजपा से कांग्रेस में जाने को विवश कर दिया। साय की यह चाहत पूरी होगी कि नहीं यह तो निकट भविष्य में तय होगा। फि लहाल वह राष्ट्रीय राजनीति के फलक ने अब यूथ कांग्रेस के नेता की तरह संघर्ष करते दिखाई दे रहे हैं।

छत्तीसगढिय़ा जस के तस

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ की संस्कृति और स्थानीयता को महत्व देते हैं, और देना भी चाहिए। लेकिन इसके ठीक विपरीत उनके सहयोगी मंत्री, छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढिय़ा संस्कृति को ठगते नजर आते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले कोई और, तो अब कोई और लाभ ले रहा है। भाजपा सरकार ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर बॉलीबुड कलाकार करीना कपूर को छत्तीसगढ़ बुलाया था, कहते हैं कि करीना ने छत्तीसगढ़ आने के लिए तकरीबन एक करोड़ से भी अधिक रुपये लिए थे। उस समय करीना को 10 मिनट के परफामेन्स के लिए 1 करोड़ 40 लाख रुपये दिये गए। इसके बाद से कांग्रेस इस मुद्दे को लगातार उछालती रही, स्थानीय कलाकारों की उपेक्षा का भी आरोप भााजपा पर लगते रहे। समय बदला अब भाजपा के हाथ एक नया मुद्दा लग गया है, जिसको लेकर भाजपा नेता यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि स्थितियां कुछ नहीं बदली हैं। पहले करीना कपूर ने करोड़ों लिए, तो अब कोई और ले रहा है। छत्तीसगढिय़ा जस के तस खड़ा है। दरलसल में बीते जून माह में रायगढ़ जिले में रामायण महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें देश के नामी कालाकार छत्तीसगढ़ पहुंचे। आयोजन में छत्तीसगढिय़ा कालाकारों ने भी प्रस्तुति दी। लेकिन छत्तीसगढिय़ा कालाकारों को कांग्रेस सरकार में भी महज कुछ रुपयों में संतोष करना पड़ा। बाहरी कलाकारों के पीछे जमकर रुपये लुटाए गए। कुमार विश्वास को 60 लाख रुपये, हंशराज रघुवंशी को 27 लाख 50 हजार रुपये, लखबीर सिंह लख्खा को 18 लाख 50 हजार रुपये, मैथिली ठाकुर को लगभग 16 लाख रुपये, प्रिया शरद वर्मा को 16 लाख 50 हजार रुपये दिए गए। वहीं छत्तीसढिय़ा कालाकार दिलीप षडंगी को 1 लाख 13 हजार रुपये, देवेश शर्मा को 79,000 रुपये, गुलाराम नामनामी को मात्र 33,000 रुपये दिए गए हैं। अब भाजपा ने इसे मुददा बनाकर प्रचारित करना शुरु कर दिया है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है छत्तीसगढिय़ा आज भी जस के तस खड़ा है।

पैलेस का प्रभाव

सरगुजा संभाग की 14 सीटों पर पैलेस का सीधा प्रभाव देखने को मिलता रहा है। लेकिन आगामी चुनाव में पैलेस का दखल कितना होगा यह तो निकट भविष्य में ही पता लगेगा। सरगुजा संभाग में कुल 14 विधानसभा सीटें हैं। जिस पर 3 राजघरानों का प्रभाव हमेशा से देखने को मिला है। सरगुजा और अंबिकापुर में 8 सीटें हैं, जिसमें अंबिकापुर पैलेस का प्रभाव हमेशा दिखाई दिया है। दूसरा कोरिया जिसमें 3 विधानसभा सीटें आती हैं, पहले कोरिया महल का प्रभाव हुआ करता था, जो अब समाप्त हो चुका है। तीसरा जशपुर की 3 सीटें, जिसमें जशपुर पैलेस का प्रभाव आज भी दिखाई देता है। 2008 के विधानसभा चुनाव में सरगुजा महाराजा सिंहदेव पहली बार विधानसभा चुनाव में उतरे और बड़े कठिनाई से चुनाव जीतने में कामयाब हुए। वहीं 2013 और 2018 के विधानसभा चुनाव में सरगुजा महाराजा स्वयं एक बड़ी जीत हासिल कर जनता का विश्वास जीतने में कामयाब हुए। वर्ष 2013 में महाराजा के प्रभाव से 8 में से 7 सीटें कांग्रेस के खाते में गईं। 2018 के विधानसभा चुनाव में माहाराजा टीएस सिंहदेव ने सरगुजा संभाग से भाजपा का सफाया कर दिया। वर्तमान में सरगुजा सभांग की पूरी सीटें कांग्रेस के कब्जे में हैं। अब 2023 के विधानसभा चुनाव में जशपुर और सरगुजा पैलेश एक -बार फिर बड़ी भूमिका निभाने को तैयार हैं। कांग्रेस की ओर से सरगुजा महाराजा टीएस सिंहदेव तो वहीं भाजपा की ओर से राज्यसभा सांसद रहे राजा रणविजय सिंह जूदेव एक बार फिर छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में बड़ी भूमिका निभाने जा रहे है।

खेलो पर संभलकर

कहते हैं कि खेल स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक होता है। पर हर खेल के अपने सिद्धान्त होते हैं, नियम होते है। कई बाार नियम विरुद्ध खेला गया खेल प्रतिभागी को मैदान से बाहर भी कर देता है। ठीक ऐसा ही खेल राज्य के एक विभाग में खेला जा रहा है। यहां एक अधिकारी के द्वारा उनका पंसदीदा खेल दंगल खेला जा रहा है। इस दंगल में जिसके उपर इनकी नजरें टेढ़ी हुईं उसी को पटकनी दे दी जाती है। दंगल के इस खेल में अब तक विभाग के कई अफसरों को रौंदा जा चुुका है। कुछ दिन पहले एक नया खेल खेला गया, जिसमें इशारे से विभाग के कई अफसरों के वित्तीय अधिकार छीन लिए गए। छीने तो छीने ऐसे अधिकारियों को वित्तीय पॉवर दे दिया गया जिन्हे वित्तीय अधिकार दिए ही नहीं जा सकते। वहीं वित्तीय अधिकार पाते ही कई अफसरों ने दनादन चेक काट दिए। जब मामला राज्य शासन के पास पहुंचा तो इसमें एक्शन हो गया। कहते हैं कि शासन ने अब जवाब तलब किया है, किस नियम के तहत अफ सरों के वित्तीय अधिकार छीने गए? ऐसे ही मामले में एक अफसर के वित्तीय अधिकार तो छीने ही गए, उन्हें करोड़ों रुपये विभाग के खाते में जमा करने के भी आदेश जारी किए गए हैं। खैर अब यह मामला शासन के पास पहुंच चुका है, जिसमें जिम्मेदार अफसरों को जवाब देना ही पड़ेगा। इसीलिए कहते हैं खेलो पर सम्भलकर।

रानू के बाद अब कौन?

कोल स्कैम और मनी लांड्रिंग मामले में अब तक राज्य के दो सीनियर आईएएस रानू साहू और समीर विश्नोई समेत कई अफसरों और कारोबारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। लेकिन क्या यह मामला अब शांत होने वाला है? शायद नहीं। राज्य में सत्ता की लडाई के बीच कई अफसर स्कैम की जद में आ चुके हैं, और शायद कई और आ सकते हैं। कोल स्कैम, मनी लांड्रिंग मामले में 8 महीने बाद ही सही लेकिन आईएएस रानू साहू की गिरफ्तारी हो चुकी हैं। शायद आईएएस रानू साहू का रसूख किसी पहुंच वाले अफसर से कम नहीं रहा होगा। वह कांग्रेस ही नहीं बल्कि भाजपा सरकार में भी कई महत्वपूर्ण जिलों में पदस्थ रहीं, पर क्या उनका यह रसूख काम आया? नहीं। क्या वास्तव में यह स्कैम हुआ है? क्या इस स्कैम में महज 5-10 लोग ही शामिल हैं? क्या 5-10 लोग मिलकर 500 करोड रुपये के स्कैम को अंजाम दे सकते हैं? ऐसे अनेको सवाल यह आशंका पैदा करते हैं कि अब रानू के बाद कौन?

छत्तीसगढ़ में टाइगरों की संख्या घटी

2022 का नया आकड़ा आ चुका है पूरे देश में टाइगरों की संख्या में जबरदस्त उछाल दिखाई दे रही है। पर सेकण्ड हाइजेस्ट फारेस्ट एरिया कव्हर करने वाला छत्तीसगढ़ 183 करोड रुपये खर्च करने के बाद भी टाइगरों की संख्या में इजाफा नहीं कर सका। देश में छत्तीसगढ़ को सबसे ज्यादा कैम्पा मद में राशि प्रदान की जाती है। पर प्रबंधन की कमी के चलते दिन-प्रतिदिन राज्य में टाइगरों की संख्या में कमी देखी जा रही है। यह कहना गलत नहीं होगा कि लचर प्रबंधन के चलते राज्य में टाइगरों की संख्या 19 से घटकर अब 17 हो गई है। वहीं पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में जमकर वृद्वि हुई। कई ऐसे राज्य भी है जहां फारेस्ट एरिया बहुत ही कम है, उन राज्यों में भी बाघों की संख्या में वृद्वि हुई है। लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य में पर्याप्त बजट होने के बाद भी संख्या कम होना अनेकों सवाल खड़ा करता है।

अनिल साहू बनेंगे पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ

सीनियर आईएफएस अनिल साहू पीसीसीएफ प्रमोट हो चुके हैं। अनिल साहू की जल्द ही वन मुख्यालय में एन्ट्री हो सकती है। जानकारों का मानना है कि साहू को वाइल्ड लाइफ का नया पीसीसीएफ बनाया जा सकता है। इसके लिए पत्राचार भी किया जा चुका है। दूसरी ओर राज्य सरकार ने शनिवार को पर्यटन मंडल में नए एमडी की पदस्थापना भी कर दी है। राज्य सरकार ने 2011 बैच के आईएएस जितेन्द्र कुमार शुक्ला को पर्यटन मंडल का नया एमडी बनाया है। अब माना जा रहा है कि जल्द ही फारेस्ट की सूची आ सकती है। जिसमें कई वनमंडलों के साथ-साथ सीसीएफ और पीसीसीएफ स्तर के अफसरों के भी तबादले होने की संभावना है।

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