हलचल… धर्म-कर्म करिये

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धर्म-कर्म करिये

समय बड़ा बलवान होता है। एसीएस सुब्रत साहू भूपेश सरकार में सबसे पावरफुल अफसर रहे। राज्य का हर अफसर और राजनीति-राजकाज की समझ रखने वाला हर व्यक्ति यह मानकर चल रहा था कि सुब्रत साहू जल्द सीएस बनेंगे। लेकिन भूपेश बघेल के करीब होना सुब्रत साहू को महंगा पड़ा। समय चक्र बदल चुका है। भूपेश अब मुख्यमंत्री नहीं हैं, न ही सुब्रत साहू अब सबसे पावरफुल अफसर हैं। सुब्रत साहू को भाजपा सरकार ने मक्खी की तरह निकालकर फेंक दिया है। ऐसे में सीएस बनने का उनका सपना फिलहाल दूर की कौड़ी दिख रहा है। 88 आईएएस अफसरों के ट्रांसफर लिस्ट में सुब्रत साहू को सबसे हल्की जिम्मेदारी सौंपी गई, यह इसका जीता-जागता प्रमाण है। सुब्रत धर्म, कर्म में कितनी रुचि रखते हैं, यह तो वही जानेंगे, लेकिन भाजपा सरकार ने फिलहाल धार्मिक न्यास व धर्मस्व विभाग की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है। सुब्रत की रुचि भले ही धर्म-कर्म में न हो, लेकिन अब भाजपा सरकार उनसे धर्म-कर्म कराने के मूड़ में दिख रही।

सीबीआई आएगी, ये मोदी की गारंटी है

भूपेश सरकार के आते ही राज्य में सीबीआई को बैन कर दिया गया था। पर मोदी की गारंटी थी की राज्य में सीबीआई आएगी। उस पर सीएम विष्णुदेव साय ने मुहर लगा दी। अब छत्तीसगढ़ के युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने वाले अफसर और नेताओं की धड़कने बढ़ी हुई है। साय ने सीजीपीएसी भर्ती में हुए घोटाले के आरोपों की जांच सीबीआई से कराने का फैसला ले लिया है। इस फैसले के साथ राज्य में एक बार फिर सीबीआई की एन्ट्री होने जा रही है। राज्य सरकार के इस फैसले ने ईडी की भी राह आसान कर दी है। ईडी भी अब शराब घोटाला, कोल स्कैम और अन्य मामलों की विस्तृत जांच की कार्रवाई सीबीआई को सौंप सकती है।

अरुण प्रसाद की जगह सुनील मिश्रा

2018 के पहले भाजपा सरकार में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव रहे आईएफएस सुनील मिश्रा को मोहम्मद अकबर ने मंत्री बनते ही हटा दिया था। मिश्रा तब से अभी भी अरण्य भवन में हैं। आवास और पर्यावरण के साथ वन विभाग भी अकबर के पास रहा, लिहाजा सुनील मिश्रा को अरण्य भवन में भी कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई। सुनील मिश्रा की इमेज रमन सरकार में काम करने वाले अफसर के रुप में रही। अब एक बार फिर चर्चा है कि अनिल टुटेजा के खासम-खास अफसर अरुण प्रसाद की जगह सुनील मिश्रा को छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल का सदस्य सचिव बनाया जा सकता है।

महेश गागड़ा को लोकसभा भेजने की तैयारी

बीजापुर से भाजपा प्रत्याशी रहे पूर्व मंत्री महेश गागड़ा को पार्टी लोकसभा भेजने की तैयारी में हैं। कहते हैं कि महेश भी इस विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने में सफल हो जाते, लेकिन तत्कालीन कलेक्टर ने कांग्रेस के इशारे पर उन्हें बहुत डैमेज किया। इस बात पर कितनी सत्यता है यह तो महेश और कटारा ही जानेंगे, लेकिन गागड़ा की शिकायत पर पहली ही सूची में बीजापुर कलेक्टर की विदाई हो गई। कुछ महीनों बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा महेश को प्रत्याशी बना सकती है।

जनसंपर्क की जिम्मेदारी फिर आईपीएस को

जनसंपर्क विभाग की जिम्मेदारी फिर से आईपीएस अफसर को सौंपी गई है। छत्तीसगढ़ में पहली बार आईपीएस दीपांशु काबरा को जनसंपर्क विभाग का आयुक्त बनाया गया था। अब भूपेश सरकार के बाद विष्णुदेव सरकार ने भी इस काम के लिए आईपीएस अफसर को ही उपयुक्त माना है। कांग्रेस सरकार में लूपलाइन में रहे तेजतर्रार अफसर मयंक श्रीवास्तव को जनसंपर्क का नया आयुक्त सह संचालक बनाया गया है। मयंक श्रीवास्तव 2018 में बिलासपुर एसपी रहे, उसके बाद उन्हें कांग्रेस सरकार ने पांच साल लूप लाइन में रखा। अब मयंक को महत्वपूर्ण जिम्मदारी सौपी गई है। दरअसल में जनसंपर्क मुख्यमंत्री का विभाग है, योजनाओं के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ पत्रकारों को साथ लेकर चलना भी एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में सीएम साय ने आईपीएस अफसर मयंक श्रीवास्तव पर भरोसा जताया है।

भूपेश का फोकस दिल्ली, साय की प्राथमिकता राज्य

जनसंपर्क विभाग सरकार का मुखौटा होता है। राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचे यह प्राथमिकता होनी चाहिए। भूपेश सरकार में राज्य से जादा दिल्ली फोकस किया गया। दिल्ली के समाचार पत्र और चैनल छत्तीसगढ़ राज्य के विज्ञापनों से रंगे रहते थे। राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ तो राज्य की जनता को ही मिलना है, ऐसे में दिल्ली में विज्ञापन छपवाने के औचित्य पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक हैं। खैर विभाग तो मुखिया के निर्देश पर ही काम करता है, वैसे भी भूपेश के पास सलाहकारों की फौज थी। भूपेश बघेल का फोकस ही दिल्ली रहा। ऐसे में यदि विज्ञापनों के अनुपात को देखा जाए तो दिल्ली में कई करोड़ों के विज्ञापन बांटे गए, लेकिन अब छत्तीसगढ़ के साथ ही केन्द्र में भी भाजपा की सरकार है। इसलिए सीएम साय की प्राथमिकता राज्य है, साय और जनसंपर्क विभाग दिल्ली से जादा छत्तीसगढ़ में फोकस करने पर जोर दे रहे हैं।

अडाणी प्रेम बना जी का जंजाल

राज्य में लगातार प्रशासनिक सर्जरी जारी है। विष्णुदेव सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी सर्जरी करते हुए 88 आईएएस अफसर और एक आईपीएस अफसर का तबादला किया है। अब आईपीएस अफसरों की सूची बनकर तैयार है। कभी भी थोक के भाव में आईपीएस अफसरों के तबादलों की सूची जारी हो सकती है। इस बीच एक आईएफएस अफसर की पकड़ अडाणी प्रेम के कारण ढीली पड़ते दिख रही है। दरअसल में सीएम विष्णुदेव साय ने 13 तारीख को शपथ ली और 11 तारीख को यह आर्डर जारी किया गया। आर्डर जारी होते ही पेड़ों की कटाई की खबरें चारों ओर हल्ला मचाने लगी। कहते हैं कि सीएम इसको लेकर काफी खफा हैं। ऐसे में परिणाम क्या होंगे कुछ कहा नहीं जा सकता।

ओपी नहीं, अब ओपी सर

आईएएस रहे ओपी चौधरी अब विष्णुदेव सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं, यह बात हर आईएएस अफसर को याद रखनी चाहिए। भले ही वह ओपी के बैचमेट ही क्यों न रहे हों। दरअसल में ओपी चौधरी आमतौर पर सहज मिजाज के लिए जाने जाते हैं। इन दिनों ओपी चौधरी द्वारा एनआरडीए में ली गई बैठक की एक तस्वीर सार्वजनिक हो रही है। जाहिर सी बात है, यह तस्वीर विभागीय बैठक के दौरान की है। बैठक में ओपी मुस्कुरा रहे हैं, वहीं एनआरडीए के सीईओ सौरभ कुमार उनकी तरफ उंगली दिखाकर कुछ कह रहे हैं। दरअसल में पर्यावरण संरक्षण मंडल के अध्यक्ष आर संगीता ओपी चौधरी की बैचमेट हैं, वहीं सौरभ कुमार ओपी चौधरी के पसंदीदा अफसरों में से एक हैं, लेकिन अब सभी की जिम्मेदारियां अलग-अलग है। ओपी चौधरी मंत्री हैं, संगीता अध्यक्ष हैं, वहीं सौरभ एनआरडीए के सीईओ हैं। इस तस्वीर के कुछ अच्छे पहलू भी हो सकते हैं, लेकिन पब्लिक में इसको लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

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