रायपुर के इस मठ का नाम दूधाधारी कैसे पड़ा, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया

रायपुर। मुख्यमंत्री साय ने दूधाधारी मठ पहुंचकर भगवान श्री राम, माता जानकी, भगवान श्री लक्ष्मण, श्री संकट मोचन हनुमान जी, श्री स्वामी बाला जी भगवान की पूजा अर्चना की।

सीएम साय ने अपने ट्वीट में लिखा, आज श्री अयोध्या धाम में प्रभु श्रीरामलला के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के सुअवसर पर रायपुर के प्रसिद्ध प्राचीन मठ श्री दूधाधारी मठ में प्रभु श्रीरामजानकी के दिव्य दर्शन कर जीवन धन्य हुआ।

श्री दूधाधारी मठ की स्थापना 16वीं शताब्दी के साधु श्री स्वामी बलभद्रदास जी महाराज ने की थी। किंवदंतियों के अनुसार स्वामी बलभद्रदास जी महाराज केवल दूध पर जीवित रहते थे और इसलिए उन्हें दूध अहारी महाराज (केवल दूध पीने वाले) के नाम से जाना जाने लगा। समय बीतने के साथ उच्चारण में आसानी के लिए यह शब्द दूधधारी के रूप में विकसित हुआ। इस प्रकार मठ का नाम दूधाधारी मठ पड़ गया। प्रभु श्रीरामजानकी एवं हनुमान जी का सबसे प्राचीन मंदिर होने के कारण हम छ्त्तीसगढ़वासियों की अगाध आस्था श्री दूधाधारी मठ के प्रति है।

“श्री जानकीवल्लभो विजयते”

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