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लाडली बहनों को 1250 से 1500 और वंदनीय महतारी को सिर्फ 1000 क्यों?
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों जगह भाजपा की सरकार है। मध्यप्रदेश के मोहन अपनी लाडली बहनों को प्रतिमाह 1250 रुपये और साल के 15000 रुपये प्रदान कर रहे हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में विष्णु माताओं और बहनों को 1000 रुपये प्रतिमाह यानि की साल के 12000 रुपये खाते में डाल रहे हैं। दोनों जगह भाजपा की सरकार है, मध्यप्रदेश में कमान मोहन के पास है और छत्तीसगढ़ की बागडोर विष्णुदेव को सौंपा गया है। लेकिन जब दोनों राज्य की महिलाओं का आपस में संवाद होता है, तो मोहन की तरह विष्णु से भी 1250 रुपये देने की आस राज्य की वंदनीय माताओं के अन्दर जागृत होती है। यहीं नहीं पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में भी भाजपा की सहयोगी दल शिवसेना लाडली बहनों और वंदनीय माताओं को इसी जुलाई माह से 1500 रुपये प्रतिमाह देना शुरु कर दिया है। ऐसे में छत्तीसगढ़ की वंदनीय माताएं और बहने विष्णु को भी मोहन और एकनाथ की राह चलते देखना चाहती हैं। वैसे तो छत्तीसगढ़ राज्य मध्यप्रदेश से कई दृष्टि में आगे है, राज्य में खनिज संपदा की भरमार है। छत्तीसगढ़ भी कभी मध्यप्रदेश राज्य का हिस्सा हुआ करता था। तो यह राज्य भला वंदनीय महतारी के सम्मान में पीछे कैसे रह सकता है? राज्य की महिलाओं की खुसर-फुसर सुनकर शायद विष्णुदेव भी मोहन यादव और एकनाथ शिंदे की तरह यहां की वंदनीय महतारी और लाडली बहनों को 1000 रुपये प्रतिमाह की जगह 1250 से 1500 रुपये प्रतिमाह देने का मन बना लें।
अपनी डफली अपना राग
राज्य की अफसरशाही का हाल इन दिनों कुछ ऐसा ही होते दिख रहा है। यहां अफसर अपने मर्जी की करना चाहते हैं। आईएएस अफसरों का यह हाल देख सीनियर अफसर भौचक्के रह जाते हैं, उनको बैठक छोड़कर भागना पड़ रहा है। दरअसल में एक विभाग में पदस्त दो आईएएस अफसरों में इन दिनों ठन गई है। यह लड़ाई बजट और काम को लेकर छिड़ी हुई है। कहते हैं कि विभाग द्वारा बजट के संदर्भ में इसी सप्ताह बैठक आयोजित की गई थी, लेकिन विभाग में पदस्त दो आईएएस अफसरों के बीच जमकर कहा सुनी हो गई। बजट और काम के लिए आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे एसीएस साहब विवाद बढ़ता देख बैठक से चले जाना ही बेहतर समझे।
शिकायतों से खफा मंत्री जी?
बिलासपुर में पदस्त एक संयुक्त आयुक्त को विभाग ने हाल ही में निलंबित किया है। आरोप यह है कि उनके खिलाफ एक व्यापारी से अभ्रद व्यवहार, मानसिक प्रताडऩा, भयाक्रांत करने एवं रिश्वत मागने की शिकायत मिली थी। कहा जा रहा है कि संयुक्त आयुक्त ने एक कोचिंग संचालक के यहां जांच की थी उसके बाद उनके खिलाफ गंभीर आरोपों का पिटारा मंत्री जी को सौंपा गया है। हालांकि बीते सप्ताह इस विभाग में पदस्त आयुक्त को भी शासन ने महज 6 माह में बदल दिया है। आयुक्त बदले जाने के बाद 10 दिन के भीतर बिलासपुर के संयुक्त आयुक्त को गंभीर आरोपों के चलते निलंबित किर दिया गया है। अब यह महज एक संयोग है या फिर बात कुछ और है? यह तो शिकायतकर्ता और शिकायतों से खफा मंत्रीजी ही जानेंगे?
ऐसे भी दिन आयेंगे?
कभी आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के आरोपों से घिरे पूर्व मंत्री को विधायक निधि से अपने निजी कर्मचारियों को राशि देने की नौबत आ गई है। ऐसे भी दिन देखने पड़ेंगे किसी ने सोचा भी नहीं होगा। पर क्या करें नेता जी इन दिनों हालातों के मारे हैं, बीते पांच साल सत्ता से बाहर रहे और इस बार भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने मंत्री बनने का सपना चकनाचूर कर दिया। करें तो करें क्या? तरकीब निकाली गई विधायक निधि से ही राशि दे दी जाए। अपने एक कर्मचारी को शिक्षा के नाम पर 2,50,000 रुपये स्वेच्छानुदान से दे दिया गया। यहीं नहीं कर्मचारी की माता और सरकारी नौकरी कर रही पत्नी को भी स्वेच्छानुदान की राशि दे दी। नेताजी इतने में ही नहीं रुके स्थानीय कार्यालय में कार्यरत एक कर्मचारी को स्वेच्छानुदान से 2,50,000 रुपये और उसकी बहन के साथ पत्नी को भी राशि जारी करा दी। खैर इस अनुदान का नाम ही स्वेच्छानुदान है, इसलिए और कुछ जादा कहना गलत होगा। लेकिन यह जरुर कहा जा सकता है कि कभी आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने का आरोप और अब सिर्फ स्वेच्छानुदान ही सहारा।
कृष्ण कुंज का अब क्या?
भूपेश सरकार नगर और शहर को हरा-भरा बनाने के नाम पर कृष्ण कुंज योजना लेकर आई, लेकिन यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। खूबसूरत द्वार के नाम पर करोड़ों की राशि खर्च की गई। 158 निकायों में कृष्ण कुंज बनाए गए, लेकिन वर्तमान में कितने जीवित बचे हैं? कितने धराशयी हो गए? यह जांच का विषय है। फिलहाल राज्य की भाजपा सरकार ने इसके रख-रखाव के लिए हाथ खड़े कर दिए हैं। वन विभाग नेे सभी डीएफओ को निर्देश दिया था कि कृष्ण कुंज को निकायों को सौंप दिया जाए। लेकिन नगरीय निकाय कृष्ण कुंज के संचालन में कोई रुचि नहीं ले रहा है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने 2022 में जन्माष्टमी के दिन तेलीबांधा में इस योजना की शुरुआत की थी, जो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। पौधे खरीदने से लेकर भव्य द्वार गेट, फैंसिंग आदि कार्य में जनता के करोड़ों रुपये फूंक दिए गए। अब वन विभाग नगरीय निकाय को सौंपकर कृष्ण कुंज से पल्ला छुड़ाने की जुगत में है।
दुर्ग के बदनाम चेहरे
पीएससी में हुई धांधली की जांच अब सीबीआई ने सम्भाल लिया है। हाल ही में इस धांधली के आरोप में टामन सिंह सोनवानी, अमृत खलको, जीवन किशोर के यहां सीबीआई ने दबिश दी, जहां घंटों पूंछताछ हुई। यह महज एक संयोग है कि कुछ और यह तीनों अफसर दुर्ग के बदनाम चेहरे बन चुके हैं। दरअसल में टामन सिंह सेानवानी पाटन के एसडीएम रहे बाद में उनका कारवां बढ़ता गया और वह मुख्यमंत्री के सचिव और उसके बाद पीएससी के चेयरमैन बनाए गए। वहीं अमृत खलको कभी दुर्ग में अपर कलेक्टर हुआ करते थे, जे. के. धु्रव का भी दुर्ग से गहरा नाता है। पीएससी घोटाले में यह तीनों अफसर सीबीआई के राडार पर हैं। कुल मिलाकर यह तीनों अफसर दुर्ग के बदनाम चेहरे घोषित हो गए हैं।
नक्सलियों का शहरी नेटवर्क, तेन्दूपत्ता ठेकेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
राजनांदगांव पुलिस ने नक्सलियों के शहरी नेटवर्क का बड़ा खुलासाा किया है। पांच माओवादी सहयोगी गिरफ्तार किए गए हैं। इसमें एक बड़ा तथ्य सामने आया है। पुलिस द्वारा बताया गया है कि तेन्दूपत्ता ठेकेदारों को धमकी देकर लेवी की राशि वसूली जा रही थी। चारों आरोपियों ने लेवी के माध्यम से अपने बैंक अकाउंट में तकरीबन 60 लाख रुपये प्राप्त किए हैं। जिससे नक्सलियों द्वारा शहरी नेटवर्क का जाल बिछाया जा रहा था। सवाल यह उठता है कि लेवी देने वाले ठेकेदारों ने क्या पुलिस के पास अपनी शिकायत दर्ज करायी थी? सम्भवत: नहीं। लेकिन जब घटना का सच सामने आ चुका है तो लेवी देने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
हाथी दिवस के बहाने शक्ति प्रदर्शन
वन विभाग द्वारा 12 अगस्त को हाथी दिवस मानाया जा रहा है। यह आयोजन पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ सुधीर अग्रवाल के अगुवाई में आयोजित किया गया है। हाथी दिवस के उपलक्ष्य में यह आयोजन अखिल भारतीय स्तर पर किया गया है। जिसमें तकरीबन 75 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। राजधानी के एक प्रसिद्ध होटल में पूरे देश से लोग जुटेंगे। इस आयोजन में केन्द्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री और दूसरे राज्यों से काफी संख्या में अधिकारी शामिल होंगे। राज्य में हाथियों की मौत और दुर्दशा को लेकर वन्य जीव प्रेमी लगातार आवाज बुलंद करते रहते हैं। कहते हैं कि एक वन्यजीव प्रेमी ने हाल ही में अभ्यारण्य में बंधक हाथी को छोडऩे के लिए पीसीसीएफ सुधीर अग्रवाल से निवेदन किया। यह हाथी कई दिनों तक एक ही स्थान में बंधा रहा, वह ढंग से अपने पैर भी नहीं चला सकता था। खैर राज्य में हाथियों और विभाग में बारे में लिखने के लिए कागज कम पड़ जाएंगे। कहा तो यह भी जा रहा है कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य शक्ति प्रदर्शन है। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ सुधीर अग्रवाल और वनबल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव के बीच कुर्सी की लड़ाई जगजाहिर है, जो हाईकोर्ट तक पहुंच चुकी है। कहा तो यह भी जा रहा है कि इस आयोजन के लिए सुधीर अग्रवाल को किसी खास व्यक्ति ने सलाह दी है कि वह आयोजन के माध्यम से सीएम विष्णुदेव के नजदीक आ जाएगे, और सम्भव है कि कार्यक्रम के सफल आयोजन के बाद सुधीर के वनबल प्रमुख बनने का रास्ता खुल जाएगा। बहरहाल आगे क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता? लेकिन इतने बड़े आयोजन में विभाग ने वन्यजीव प्रेमियों और एनजीओं से दूरी बनाकर रखा है। जिससे यह प्रतीत होता है कि हाथियों के बहाने 12 अगस्त को सुधीर शक्ति प्रदर्शन करने जा रहे हैं।
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