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विकास शील बनेंगे छत्तीसगढ़ के नये सीएस?
छत्तीसगढ़ के सीएस अमिताभ जैन का सेवा विस्तार इसी माह समाप्त हो रहा है। उन्हें अब आगे सेवा विस्तार मिलने की संभावना कम है। अगले सीएस के रुप में दिल्ली में पदस्थ 1993 बैच के अफसर अमित अग्रवाल का नाम प्रमुखता से सामने आया था। बाद में इस रेस में 1994 बैच के आईएएस अफसर मनोज पिंगुआ का नाम भी उभरकर सामने आया। हालांकि 1992 बैच के आईएएस अफसर सुब्रत साहू भी सीएस बनने के लिए पूरी ताकत लगाये हुए हैं। लेकिन कहीं न कहीं पूर्व की कांग्रेस सरकार के करीबी होने के आरोपों के चलते सुब्रत की संभावना फिलहाल कम है। अब समय नजदीक आते-आते यह संकेत मिलने लगे हैं कि अगले सीएस की जिम्मेदारी दिल्ली में ही पदस्थ किसी अफसर को मिलने जा रही है। वैसे छत्तीसगढ़ कैडर की बात करेंगे तो वर्तमान में 1993 बैच के अफसर अमित अग्रवाल और फिर 1994 बैच के दो अफसर विकास शील और निधि छिब्बर भी वर्तमान में केंन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। उत्तर प्रदेश के रहने वाले विकास शील 2018 से केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। वहीं उनकी पत्नी निधि छिब्बर भी वर्तमान में केन्द्र में पदस्थ हैं। कुल मिलाकर नए सीएस के लिए सहमति बन गई है, वह दिल्ली से ही होंगे।
आईएफएस अफसरों की लिस्ट जल्द
आईएफएस अफसरों की ट्रांसफर लिस्ट जल्द जारी हो सकती है। इसके लिए विभाग से प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। दरअसल मुख्यालय में पीसीसीएफ स्तर के पदों के साथ ही सीसीएफ स्तर के अफसरों की भी पदस्थापना की जानी है। इसके साथ ही इस लिस्ट में तीन चार डीएफओ भी बदले जाएंगे। मुख्यालय में पदस्थ सदस्य सचिव जैव विविधता बोर्ड राजेश चंदेले कांकेर सीसीएफ बनाए जा सकते हैं, वहीं लघु वनोपज संघ में कार्यकारी संचालक की जिम्मेदारी निभा रहे मणिवासगन एस. रायपुर सीसीएफ बनाए जा सकते हैं। इसके साथ ही दुर्ग सीसीएफ के रुप में मर्सी बेला को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। कांकेर के वर्तमान सीसीएफ दिलराज प्रभाकर को मुख्यालय लाया जा सकता है। कहा जा रहा है कि विभाग ने इस पर मुहर लगा दी है, अब मुख्यमंत्री की अंतिम सहमति के बाद आईएफएस अफसरों के तबादले की सूची जारी कर दी जाएगी।
सिकेट्री लेवल में भी फेरबदल
आईएफएस अफसर ही नहीं सरकार आईएएस अफसरों के विभागों में भी कुछ बदलाव करने जा रही है। कहा जा रहा है कि सिकेट्री लेवल के कुछ अफसरों के विभाग बदले जा सकते हैं। वहीं मंत्रालय में पदस्थ कुछ अफसरों की फील्ड में तैनाती की जा सकती है। इसके साथ ही एक ही विभाग में पदस्थ एक से अधिक अफसरों के भी तबादले के संकेत हैं। दरअसल विष्णु सरकार अपने दो साल पूरे होने से पहले राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ सरकारी काम-काज में और गति लाना चाहती है, इसके चलते ओवरलोड चल रहे सिकेट्रीज के विभागों में कमी की जा सकती है। वहीं संभागों के कनिश्नर भी बदले जा सकते हैं।
गुटबाजी चरम पर
कांग्रेस का प्रदेशव्यापी वोट चोर, गद्दी छोड़ अभियान का एक वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है। इसमें मंच पर भाषण दे रहे पूर्व मंत्री अमरजीत भगत से माइक छीन लिया गया। इस दौरान मंच पर प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट, पूर्व सीएम भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और अन्य नेता मौजूद थे। कुल मिलाकार प्रदेश कांग्रेस में इन दिनों गुटबाजी चरम पर है, यहां पार्टी दो खेमों में बंट गई है। पार्टी अनुशासन कहीं दिखता ही नहीं। कोई नेता यहां भरे मंच से वर्तमान नेतृत्व से असंतुष्ट होकर किसी और नेतृत्व की मांग़ करता है, तो किसी से भरे मंच में माइक छीन लिया जाता है। कोई नेता किसी नेता को चमचा बताता है। आखिर यह हो क्या रहा है? खैर हालात देखकर यह कहने में संकोच नहीं कि पार्टी में गुटबाजी रोकने में प्रदेश प्रभारी सचिन पालयट पूरी तरह से नाकामयाब होते दिख रहे हैं।
संकेत ठीक नहीं
राज्य में विष्णुदेव सरकार को अभी दो साल भी पूरे नहीं हुए हैं, सरकार ने अल्प समय में राज्य के किसानों, महिलाओं समेत अन्य वर्ग के लिए बहुत कुछ किया है। यहां रिकार्ड 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी की जा रही है। महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये भुगतान किया जा रहा है। नक्सलवाद को समाप्त करने में सरकार कामयाब होते दिख रही है। लेकिन राज्य का कर्मचारी वर्ग समय से पहले ही आंदोलन पर उतर गया है, यह संकेत ठीक नहीं। वैसे आंदोलनों को शांत करने का सबसे सरल तरीका संवाद होता है, पूर्व के कई बड़े आंदोलन संवाद से ही समाप्त किए गए हैं। लेकिन वर्तमान में संवाद का अभाव स्पष्ट दिख रहा है, वरना एनएचएम के संविदा कर्मचारियों को सामुहिक इस्तीफा नहीं देना पड़ता। खैर सभी सरकारों की अपनी नीति और रणनीति होती है। लेकिन इस तरह के आंदोलन चुनावी साल या उससे एकात साल पहले देखने को मिलते थे, इस बार दो साल भी नहीं बीते कर्मचारी आंदोलन के मूड में दिख रहे हैं, क्यों? इस पर चिंतन की अत्यंत आवश्यकता है। वरना चुनावी साल में जगह-जगह अंादोलन के पंडाल नजर आएंगे।
एक अफसर और भाजपा प्रवक्ता के चर्चे
इन दिनों एक सीनियर आईएएस अफसर और एक भाजपा प्रवक्ता के जमकर चर्चे हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा प्रवक्ता और साहब ने मिलकर कई कारोबार भी शुरु कर दिये हैं, खैर सच क्या है? यह तो साहब ही जानेंगे। हालांकि पिछली सरकार में भी यह जोड़ी बखूबी काम करती रही है। कहा जाता है कि भाजपा प्रवक्ता के द्वारा लगातार प्रयास रहा है कि साहब को मेन धुरी में वापस लाया जाए, जिसमें कुछ हद तक कामयाबी भी मिली है। बदले में साहब की भी निष्ठा बनी हुई है, अब यह निष्ठा व्यापार का रुप भी लेने लगी है।
निकायों में धन संकट
राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के ज्यादातर नगर निगम और पालिकाएं इन दिनों आर्थिक संकट से जूझ रही हैं। पिछले अंक में हमने लिखा था कि रायपुर नगर निगम के पास नाली साफ करने और निर्माण करने के लिये राशि नहीं है। इस अंक में निकाय में इससे भी भयावह स्थित नजऱ आई, भिलाई-चरोदा में कर्मचारियों को पिछले तीन माह से वेतन नहीं मिला। नाराज कर्मचारी निगम के गेट में ताला जड़ दिये। सवाल यह उठता है कि शहरी सरकार यानि की नगर निगमों की हालत इतनी खराब क्यों है ? हालात इतने बुरे हो गये की कर्मचारियों को यहां तीन माह से वेतन नहीं मिला। आखिर यह पालिकाएं या निगम जनता को सुविधा कैसे मुहैया करायेंगे? आखिर यह समस्या दिन-प्रतिदिन क्यों बढ़ रही? यह मंथन और चिंतन का विषय है।
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