हलचल… अस्थाई जनसंपर्क आयुक्त

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सीएमओ के बाद अब पीएमओ की भी पसंद डॉ. मित्तल

जनसंपर्क आयुक्त डॉ. रवि मित्तल सीएमओ के बाद अब पीएमओ की भी पंसद बन गए हैं। 2016 बैच के आईएएस अफसर डॉ. रवि मित्तल को पीएमओ में डिप्टी सिक्रेटरी की जिम्मेदारी दी गई है। अक्टूबर 2024 में विष्णु सरकार ने लडख़ड़ाए हुए जनसंपर्क विभाग की कमान डॉ. रवि मित्तल को सौंपी थी। मित्तल ने अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में विभाग को पटरी मेें लाने के साथ ही सरकार की बेहतर छवि गढऩे का काम किया। उन्होंने दूरस्थ से दूरस्थ अंचल तक सरकार की योजनाओं को पहुंचाने का बखूबी काम किया। शायद यही कारण था कि पीएस टू सीएम सुबोध सिंह के भी गुड बुक में डॉ. मित्तल का नाम शामिल हो गया और उन्हें मुख्यमंत्री सचिवालय में भी अहम जिम्मेदारी दी गई। लेकिन ये कारवां यहीं नहीं रुकने वाला था, मित्तल के कामकाज पर केन्द्र सरकार और पीएमओ की भी नजर थी। उनकी सरलता और कार्यशैली की गूंज दिल्ली में भी सुनाई देते रहे। यही वजह है कि डॉ. रवि मित्तल अब सीएमओ से पीएमओ की यात्रा तय करने जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ कैडर से वर्तमान में डॉ. रवि मित्तल एकमात्र ऐसे आईएएस अफसर होंगे जिनकी तैनाती पीएमओ में की गई है। हालांकि इसके पहले छत्तीसगढ़ कैडर से अमित अग्रवाल, डॉ. रोहित यादव और वीआर सुब्रह्मण्यम पीएमओ में सेवाएं दे चुके हैं।

अल्पकालिक जनसंपर्क आयुक्त

आयुक्त जनसंपर्क डॉ. रवि मित्तल के रिलीव होते ही यहां पर अगले सप्ताह नई पदस्थापना तय है। लेकिन सरकार के पास इस पद के लिए वर्तमान में कोई खास विकल्प नजर नहीं आ रहा है। दरअसल सचिव के रुप में डॉ. रोहित यादव की जिम्मेदारी यथावत रहने के संकेत हैं। मतलब यह साफ है कि जनसंपर्क में संचालक सह आयुक्त की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए प्रमुख रुप से आईएएस रजत बसंल का नाम उभरकर सामने आ रहा है। वहीं रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह को भी इस पद का दावेदार बताया जा रहा है। हालांकि आईएएस रजत बसंल दिल्ली जाने के इच्छुक हैं। इस स्थिति में यदि रजत की पदस्थापना की जाती है, तो कुछ माह बाद फिर इस पद के लिए नए अफसर की तलास होगी। वर्तमान हालातों को देखकर कहा जा सकता है कि अभी जनसंपर्क विभाग में अल्पकालिक आयुक्त की पदस्थापना की जाएगी। विधानसभा चुनाव के ठीक एक साल पहले यानि कि 2027 में पुन: बदलाव किया जा सकता है। हालांकि इस पद के लिए सीनियर अफसरों की भी तलास जारी है, लेकिन अभी तक सहमति नहीं बन पाई है।

आईएएस अफसरों के तबादले

इस माह के आखिरी-आखिरी में बड़े प्रशासनिक फेरबदल के संकेत हैं। जिसमें सचिवों के विभागों में फेरबदल के साथ ही संभागीय कमिनश्नरों के बदले जाने के संकेत है। वहीं कुछ जिलों के कलेक्टरों को भी हटाया जा सकता है। दरअसल मुख्य सचिव विकासशील और सीएम सचिवालय लगातार कलेक्टरों के परफारमेंस का आकलन कर रहे है, ऐसे में कुछ कलेक्टरों का बदला जाना लगभग तय है। इसके साथ ही कुछ कलेक्टर दो साल से ज्यादा समयावधि से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं, जिनका हटना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं विधानसभा के बजट सत्र में कई अफसरों की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाये गए हैं। इन तमाम कारणों के चलते मार्च माह के अंत में राज्य सरकार प्रशासनिक कसावट लाने बड़ा फेरबदल करने जा रही है।

आईएफएस अफसरों के भी प्रभार बदलेंगे

आईएएस अफसरों के साथ ही आईएफएस अफसरों के विभागों में भी बड़े फेरबदल हो सकते हैं। दरअसल सीसीएफ वाइल्ड लाइफ रायपुर सतोविसा समाजदार दिल्ली जाना चाहती हैं। इसके साथ ही कुछ वनमंडलाधिकारियों के भी ट्रांसफर हो सकते हैं। वहीं तकरीबन एक दर्जन से ज्यादा एसडीओ भी बदले जाएंगे। इसके साथ ही हेड ऑफ फारेस्ट व्ही श्रीनिवास राव मई माह में रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में सरकार नए फाइनेंसियल ईयर के शुरुआत में ही बड़ा निर्णय ले सकती है। जिससे चुनावी साल के पहले वन विभाग में बेहतर काम की प्लानिंग की जा सके। साथ ही इस निर्णय से भाजपा नेताओं का आक्रोश भी कम करने का प्रयास किया जा रहा है। दरअसल वनबल प्रमुख व्ही श्रीनिवास राव का नाम कांग्रेस सरकार में भ्रष्टाचार से जुड़ते रहा है, जिसके लिए भाजपा नेताओं द्वारा रायपुर से लेकर दिल्ली तक विरोध दर्ज कराया गया था। अब भाजपा सरकार भी यह चाह रही है कि राव के रिटायरमेन्ट के कुछ माह पहले उन्हें बदलकर नाराज भाजपा नेताओं को संतुष्ट कर दिया जाए। वहीं जून में पीसीसीएफ तपेश झा रिटायर हो रहे है। जुलाई में पीसीसीएफ अनिल साहू, पीसीसीएफ प्रेम कुमार सीसीएफ जगदलपुर आलोक तिवारी रिटायर होंगे। लिहाजा आईएफएस अफसरों के विभागों में बड़ा फेरबदल हो सकता है।

भारतमाला में गिरफ्तारी, सीजीएमएसी में कब?

भारतमाला परियोजना में मुआवजा घोटाला एक समय मीडिया की सुर्खियां बना रहता था। लेकिन इस घोटाले की प्रमुख कड़ी कहे जाने वाले तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू लंबे समय तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहे। फिलहाल अब मामला ठंडा होते ही निर्भय की गिरफ्तारी हो चुकी है। निर्भय साहू को कोर्ट में भी पेश किया जा चुका है। 15 दिन की रिंमाड में निर्भय क्या राज उगलते हैं? यह तो आने वाले वक्त में स्पष्ट हो ही जाएगा। लेकिन भ्रष्टाचार पर धीमी गति से जांच और कार्रवाई को लेकर इन दिनों सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल निर्भय से पूछताछ के बाद ही आगे के तथ्य सामने आयेंगे कि भ्रष्टाचार में कितने कारोबारी और अफसर संलिप्त हैं। वहीं दूसरी ओर सीजीएमएसी में हुए रीएजेंट घोटाले की जांच ठंडी पड़ती दिख रही है। सीजीएमएसी में हुए रीएजेट घोटाले में एक आईएएस अफसर को बचाने की कवायद चल रही है? इसके भी चर्चे हो रहे हैं। बहरहाल जितने मुंह उतनी बातें, असली सत्य को जांच पूरी होने के बाद ही सामने आयेगा।

भ्रष्टाचार पर विधेयक के साथ निगरानी भी

हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सरकारी नौकरियों की भर्तियों में भ्रष्टाचार रोकने के लिए सख्त विधेयक लेकर आये। निश्चित ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव की मंशा नौकरियों की भर्तियों में पारदर्शिता लाना है। लेकिन क्या विधेयक लाना ही पर्याप्त है? यह सवाल आज भी आम जनता के सामने खड़ा है। दरअसल हाल ही में स्वास्थ्य विभाग के अधीन छत्तीसगढ़ एड्स कंट्रोल सोसायटी का मामला सामने आया है, जहां बिना विज्ञापन के ही भर्तियां करने का आरोप लग रहा है। आश्चर्य की बात तो यह है कि इन 160 पदों के लिए न ही लिखित परीक्षा होगी और न ही कौशल दक्षता का परीक्षण किया जाएगा। इसके पूर्व एनएचएम या फिर एड्स कंट्रोल सोयायटी विज्ञापन जारी कर भर्तियां करता था। लेकिन यहां भर्ती और चयन प्रक्रिया ही बदल दी गई है, अब इसकी भर्ती एक एजेन्सी करेगी। 160 पदों को सीधा एजेन्सी भर्ती करेगी और विभाग एजेंन्सी को भुगतान करेगा। कहा तो यह भी जा रहा है कि अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए यह हथकंडा अपनाया गया है। कुल मिलाकर नियम बनाने के साथ-साथ कड़ी निगरानी की भी जरुरत है। अन्यथा विभागों में अपने लेवल पर तरह-तरह के नियम बनाकर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जाता रहेगा।

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