हलचल… ना-ना करते, हां कर बैठे…

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ना-ना करते, हां कर बैठे…

2018 के विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद केन्द्रीय नेतृत्व ने 15 साल मुख्यमंत्री रहे डॉ. रमन सिंह को ठीक उसी तरह हासिए पर रखा जैसे राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को रखा गया है। रमन चुनाव से पहले भी राज्य के हालातों से केन्द्रीय नेतृत्व को अवगत कराते रहे। कहते हैं कि 2018 के विधानसभा चुनाव के पहले रमन सिंह ने धान और किसानों के लिए कुछ बड़ी घोषणा की अनुमति केन्द्रीय नेतृत्व से मांगी थी, लेकिन रमन के सुझावों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया। छत्तीसगढ़ में सत्ता गंवाने के बाद चार साल से जयादा समय तक रमन को हासिए पर रखा गया। केन्द्रीय नेतृत्व रमन की बातों पर अमल करना तो दूर, उनसे मिलने पर भी परहेज करने लगा था। लेकिन वर्तमान सियासी हालातों को देखते हुए एक बार फिर ना-ना करते -करते बीजेपी रमन पर हां करते दिख रही है। इस बात की तस्दीक मोदी की सभा के पीछे लगी डॉ. रमन सिंह की बड़ी आकार की फोटो और राज्य के हर कोने से उमड़ी भीड़ से की जा सकती है। भीड़ के प्रबंधन में भी डॉ. रमन सिंह की अहम भूमिका रही। यह भी उन्हें किसी न किसी रुप से फ्रंट फुट की खिलाड़ी घोषित करती है। इसके आलावा पीएम मोदी के दौरे के पूर्व केन्द्रीय गृह मंत्री शाह की बैंठकों में रमन सिंह ही अहम चेहरा रहे।

चार्जशीट मुख्यालय पहुंची, इधर दे दी गई पोष्टिंग

सरकार में बैठे जिम्मेदार लोगों के नीति और नियति की इन दिनों खूब चर्चा है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर तमाम भाजपा नेता कांग्रेस सरकार को भ्रष्टाचार के आरोपों में घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। सरकार पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का खुला आरोप लगा रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस सरकार में बैठे जिम्मेदार लोग ऐसा निर्णय ले रहे हैं जिससे सरकार की और फजीहत हो रही है। हाल ही में एक डीएफओ स्तर के अफसर को दो-दो सर्कल का प्रभारी नियुक्त कर दिया गया है। कहते हैं कि इन साहब के कारनामों की कुंडली दुर्ग से नागपुर होते हुए मुख्यालय तक पहुंच गई है। एक ओर साहब के कारनामों की कुंडली मुख्यालय पहुंची, वहीं दूसरी ओर उन्हें उनके ओहदे से बड़े पद में प्रभारी बनाकर बैठा दिया गया। सरकार के इस निर्णय से आने वाले दिनों में जमकर फजीहत होने वाली है।

फोन मिलाओ, मितान बुलाओ, दिल्ली पहुंचा रेल इंजन

छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाएं आम जन के बीच जितनी लोकप्रिय हो रही हैं। उसमें सरकार के रणनीतिकारों के साथ-साथ सीएम के विभाग जनसंपर्क की अहम भूमिका है। जनसंपर्क विभाग ने राज्य की योजनाओं के प्रसार-प्रसार का जो खाका तैयार किया है, उसकी छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी जमकर चर्चा हो रही है। यह चर्चा तब और खास हो जाती है जब देश की राजधानी दिल्ली में छत्तीसगढ़ की योजनाओं और सीएम भूपेश बघेल की बड़ी-बड़ी तस्वीरें आम जन को देखने को मिल जाएं। दरअसल में राज्य के जनसंपर्क विभाग द्वारा रेल के डब्बों के साथ-साथ इंजनों में भी सरकारी योजनाओं के विज्ञापन प्रसारित किए जा रहे हैं। जिसमें से एक इंजन दिल्ली जा पहुंचा। इंजन में सीएम भूपेश की बड़ी-बड़ी फोटो के साथ-साथ सरकारी विज्ञापन चस्पा किए गए है। मामला यहीं नहीं रुका प्लेटफार्म में खड़े इंजन पर अचानक रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव की नजर पड़ गई। कहते हैं कि नजर पड़ते ही रेल मंत्री ने रेलवे के अधिकारियों से इसकी जानकारी ली है।

रुपया गया, अब पॉवर की बारी

राज्य के तीन ताकतवर अफसरों में से एक अफसर के पास पिछले चार साल से रुपयों (बजट) वाला विभाग रहा। इस कुर्सी में इतनी ऊर्जा थी कि साहब किसी को भी अपने बस में कर लेते थे। प्रमुख सीट पर कोई भी बैठे लेकिन सरकारी काम के लिए रुपये (बजट) इनके मर्जी से ही भेजे जाते थे। देर से ही सही पर समय बदला अब इनसे रुपयों (बजट) वाली कुर्सी छीन ली गई है। यह कुर्सी एक सीधे-साधे अफसर को सौंपी गई है। कहते हैं कि रुपयों (बजट) वाली इस कुर्सी के बदौलत ही वह पॉवर वाली कुर्सी को हासिल करने में सफल हुए हैं। यह बात छनकर सामने आ रही है कि अभी इनसे रुपयों (बजट) वाली कुर्सी छीनी गई है। कुछ माह बाद पॉवर वाली कुर्सी भी छीन ली जाएगी।

शाह को चुनाव की कमान

4 महीने बाद छत्तीसगढ में विधानसभा चुनाव होने हैं। यहां सत्ता में वापसी के लिए बीजेपी का विशेष फोकस है। कहते हैं कि चुनाव तक खुद अमित शाह अघोषित रुप से यहां की कमान सम्भालेंगे। एक सप्ताह के भीतर राज्य में शाह का दो बार दौरा हो चुका है। अब वह 14 जुलाई को तीसरी बार रायपुर आ रहे हैं। इसी बीच मोदी और शाह के करीबी केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया को राज्य का सहचुनाव प्रभारी बनाया गया है। वहीं ओम माथुर चुनाव प्रभारी बनाए गए हैं। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सत्ता वापसी के लिए भाजपा ने अपने खास रणनीतिकारों को मैदान में उतारा है। अब शाह के टास्ट अनुरुप स्थानीय भाजपा नेता चुनावी रणनीति पर काम करेंगे।

साहू की जगह साहू

छत्तीसगढ़ में टीएस सिंहदेव को उप मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद भूपेश मंत्रिमंडल में फेरबदल के कयास लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि टीएस सिंहदेव को कुछ और महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। ओहदे के हिसाब से गृह मंत्रालय काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह विभाग वर्तमान में ताम्रध्वज साहू के पास है। वहीं दूसरा महत्वपूर्ण विभाग पंचायत एवं ग्रामीण विकास है, जिसे सिंहदेव खुद ही वापस कर चुके हैं। कहते हैं कि सिंहदेव की रुचि वित्त विभाग पर थी, लेकिन यह विभाग मुख्यमंत्री के पास है, जिसकी भी गुंजाईश कम है। इस बीच यह खबर छनकर सामने आई है। साहू कोटे से अभनपुर विधायक धनेन्द्र साहू को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है। संगठन में धनेन्द्र साहू को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की रणनीति बनाई गई थी, जिसे धनेन्द्र ने इंकार कर दिया है। दुर्ग संभाग से वर्तमान में मुख्यमंत्री समेत कुल 5 मंत्री हैं, जिसमें से ताम्रध्वज साहू के विभाग कम किए जा सकते हैं। यदि संभावना बनी तो साहू की जगह साहू को रिप्लेस भी किया जा सकता है। वहीं टीएस सिंहदेव की भी जिम्मेदारी बढ़ाई जा सकती है।

                                                                                                                                    editor.pioneerraipur@gmail.com

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