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अफसर और मंत्री की दूरदर्शिता पर सवाल
वित्त मंत्री ओपी चौधरी के वार्षिक बजट ‘संकल्प’ में राजधानी रायपुर को अनेकों सौगात मिली हैं। उनकी दूरदर्शिता को लेकर सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक गदगद है। इसमें दुनिया की सबसे बड़ी फ्लाईओवर का भी ऐलान किया गया है। रायपुर के शारदा चौक से लेकर तात्यापारा चौक तक फ्लाईओवर का निर्माण कराया जाएगा। तर्क यह है कि इससे रायपुर की जनता को ट्राफिक से पूरी तरह निजात मिल जाएगी। इसके लिए 10 करोड़ रुपये की राशि का बजट निर्धारित की गई है। इस फ्लाईओवर की दूरी तकरीबन 300 से 350 मीटर मात्र है, जो महज 2 मिनट में तय की जा सकती है। आप कब फ्लाईओवर चढ़ेंगे और कब नीचे उतर जांएगे शायद इसकी भनक आपको भी नहीं लगेगी। अब मात्र 300 मीटर की दूरी के फ्लाईओवर के निर्माण से राजधानी के सबसे व्यस्ततम इलाके को ट्राफिक समस्या से कैसे निजात मिलेगी? यह तो वित्त मंत्री ओपी चौधरी और इस फ्लाईओवर का खाका तैयार करने वाले अफसर ही बता पायेगें? वित्त मंत्री रायपुर कलेक्टर भी रह चुके हैं, राजधानी रायपुर की भौगोलिक स्थिति से भली-भांति अवगत हैं, फिर भी यह निर्णय क्यों? ऐसे में उनकी और खाका तैयार करने वाले अफसर की दूरदर्शिता पर सवाल उठना लाजमी है।
तीर्थ को वनवास, हटेंगे और भी कलेक्टर
राज्य सरकार ने आईएएस अफसरों की एक ट्रांसफर लिस्ट जारी की है। जिसमें बलौदाबाजार कलेक्टर के रुप में कुलदीप शर्मा को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं राज्य सेवा से प्रमोट हुए अफसरों को भी नई जिम्मेदारी दी गई है। इस आदेश में मंत्री के बंगले से हटाकर तीर्थराज अग्रवाल को मंत्रालय अटैच किया गया है। आईएएस प्रमोट होने के बाद तीर्थ के लिए यह आदेश किसी वनवास से कम नहीं है। क्योंकि वन में रहते हुए भी तीर्थ राजमहल का ऐश्वर्य भोग रहे थे। खैर उपर वाले की दृष्टि तो पूरी सृष्टि पर है, तो तीर्थ भला दृष्टि से कैसे बच पाते? वहीं एक और मंत्री के ओएसडी आशीष टिकरिहा तीर्थ की तुलना में महत्वपूर्ण पद हासिल करने में कामयाब हो गए। टिकरिहा वेयर हाउस के एमडी बनाए गए हैं। खैर इस ट्रांसफर लिस्ट में धमतरी से सटे एक और जिले के कलेक्टर को बदला जाना था, लेकिन उनको अभयदान दे दिया गया है। यह अभयदान क्यों दिया गया? कब तक के लिए दिया गया है? फिलहाल इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी। संभव है, अगली सूची जिसमें सचिवों के प्रभार बदलने हैं, उसमें कलेक्टर साहब का नंबर लग जाए।
होटल वाले मंत्री
अभी तक हम लोगों ने होटल वाले कारोबारियों का नाम सुना था, अब होटल वाले मंत्री का नाम भी सुनने को मिल रहा है। दरअसल कहा जा रहा है कि सरकार के एक सीनियर मंत्री के ज्यादातर कारोबार इन दिनों एक होटल वाले भाई साहब के माध्यम से संचालित हो रहे हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि मंत्री जी का भी अब होटलों पर दिल आ गया है और उनके भी तकरीबन पांच होटल संचालित हो रहे हैं। हालांकि यह आकड़े और ज्यादा भी हो सकते हैं। खैर सच क्या है? यह जांच का विषय है। लेकिन मंत्री जी इन दिनों होटलों के नाम पर खूब सुर्खियां बटारेते नजर आ रहे हैं।
सांय-सांय मनेगी होली
इस साल की होली किसानों की खास होली है। धान खरीदी के अन्तर की राशि को किसानों के खाते में होली के पहले सांय-सांय अन्तरित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने होली तिहार के पहले यहां किसानों को धान खरीदी की अन्तर की राशि का एकमुश्त सांय-सांय भुगतान कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव ने होली के पहले 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि किसानों के खाते में अंतरित की है। सीएम विष्णुदेव साय के इस निर्णय ने प्रदेश के किसानों का दिल जीतने का सांय-सांय काम किया है। यहां होली के चार दिन पहले किसानों के खाते में भारी-भरकम राशि अंतरित की गई है। जिससे किसान भी इस बार होली तिहार को हर्षोल्लास से मना पायेंगे। सरकार ने इस निर्णय को पूरे राज्य में उत्सव की तरह मनाने का फैसला लिया है। सीएम साय स्वयं एक कृषक परिवार से आते हैं, वह यह भली-भांति जानते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। किसानों की उन्नति से ही प्रदेश की सांय-सांय उन्नति होगी। सभवत: इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए सीएम साय ने होली तिहार के पहले किसानों को 10 हजार करोड़ रुपये सांय-सांय अन्तरित कर दिए हैं।
एक के बाद एक तस्वीर गढ़ते भूपेश
उलझनों के दौर से बाहर निकल चुके पूर्व सीएम भूपेश बघेल एक बार फिर फ्रंट फुट में खेलने को तैयार हैं। दरअसल बीते आठ साल में कांग्रेस आलाकमान के सामने भूपेश बघेल की कई अलग-अलग राजनीतिक तस्वीरें सामने आती रहीं। जिसके चलते भूपेश बघेल एक बार फिर फ्रंट फुट में खेलने को तैयार हैं। प्रथम मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी के कार्यकाल के बाद कांग्रेस राज्य में सत्ता हासिल करने लगातार संघर्ष करते रही। 15 साल तक विभिन्न अलग-अलग कारणों से कांग्रेस राज्य में सत्ता हासिल नहीं कर पाई। लेकिन भूपेश बघेल के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का दायित्व संभालने के दौरान राज्य में कांग्रेस को बहुमत मिली। संभवत: 2018 में सत्ता हासिल करने के बाद भूपेश बघेल की तस्वीर आलाकमान के सामने एक जुझारु नेता की बन गई। लेकिन टीएस सिंहदेव और भूपेश के बीच राजनीतिक द्वंद्व ने कहीं न कहीं भूपेश बघेल की नई तस्वीर गढ़ दी। कहा तो यह भी जाता है कि राहुल गांधी के इशारे के बाद भी भूपेश ने सीएम पद नहीं छोड़ा। खैर सच क्या है? यह तो राहुल और भूपेश ही जानेंगे, लेकिन इस बीच भूपेश की तस्वीर अडिय़ल और जिद्दी नेता की बन गई। 2023 में कांग्रेस ने सत्ता गवां दी, इसके लिए अघोषित रुप से भूपेश बघेल को दोषी ठहराया गया। शायद इसीलिए भूपेश को पुन: प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाया गया और न ही नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी गई, यहां फिर भूपेश की एक और तस्वीर बन गई। खैर मशला यहीं नहीं रुका राज्य में भूपेश के करीबियों पर भ्रष्टाचार के अनेकों अपराध दर्ज किए गए, उनके बेटे को भी जेल जाना पड़ा। यहां फिर भूपेश की नई तस्वीर एक भ्रष्ट नेता की बनते नजर आई। लेकिन कहा जाता है कि राजनीति में कब? कौन ? कहां? खड़ा मिले कुछ कहा नहीं जा सकता। दरअसल वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में प्रदेश कांग्रेस में भूपेश बघेल ही एकमात्र ऐसे नेता है, जो चारों तरफ घिरने के बाद भी भाजपा और विष्णु सरकार पर हमलावर हैं। जिसकी वजह से भूपेश बघेल आलाकमान के सामने फिर नई तस्वीर गढ़ते नजर आ रहे हैं।
बढ़ी दरें डालेंगी विकास में बाधा?
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जमीनों की गाइड लाइन दर में रिकार्ड वृद्धि की है। यह दरें प्रत्येक जिलों में प्रभावी भी हो चुकी हैं। लेकिन इससे सरकारी काम कितना प्रभावित होगा अभी तक इसका आकलन जनता के सामने नहीं आ सका है। दरअसल ओपी चौधरी के ‘संकल्पÓ नामक बजट में कई सड़कों और सड़कों के चौड़ीकरण के निर्णय के प्रावधान हैं। उनका मुआवजा मापदंड क्या होगा? पहले से किए गए सर्वे को क्या अब फिर नए सिरे से करना पड़ेगा? उन कामों के लिए सरकारी राजस्व में फिर अतिरिक्त भार पड़ेगा? ऐसे में राशि की अंतर का क्या होगा? क्या यह बढ़ी और घटी दरें सरकारी काम और राज्य के विकास में बाधा डालने जा रही हैं? या फिर बजट पूर्व इसका आकलन कर लिया गया है। फिलहाल अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। यह ‘संकल्प’ के धरातल में उतरने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
तख्ता पलट के संकेत

अरण्य भवन इन दिनों अपने नए एचओडी का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। दरअसल वर्तमान वनबल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव 3-4 माह में रिटायर होने जा रहे हैं। इसको लेकर वन विभाग ने नए एचओडी की तलास पूरी कर ली है। कहा जा रहा है कि अब राव के रिटायरमेंट का इंतजार विभाग नहीं करेगा। संभव है बजट सत्र के समाप्त होते ही इस पद पर नए अफसर की तैनाती कर दी जाए। इसके लिए वाइल्ड लाइफ की कमान संभाल रहे पीसीसीएफ अरुण पांडे का नाम सबसे उपर है। कहा तो यह भी जा रहा है कि बजट सत्र के बाद इसके लिए आदेश भी जारी कर दिए जाएंगे। वहीं अरुण पांडे के हेड ऑफ फॉरेस्ट बनते ही वाइल्ड लाइन की कमान आईएफएस प्रेम कुमार को सौंपी जा सकती है। इसके साथ ही पीसीसीएफ ओपी यादव के पास कैंपा का दायित्व यथावत रहने के संकेत हैं। कुल मिलाकर बजट सत्र के बाद अरण्य भवन में तख्ता पलट के संकेत हैं।
फील गुड के साथ डब्बा गुल
‘संकल्प’ के साथ राज्य सरकार ने अपना तीसरा वित्तीय बजट पेश कर दिया है। इसके बाद दो बजट और शेष है, जिसमें से आखिरी साल का बजट चुनावी बजट माना जाता है। खैर यहां सरकार के ज्यादातर मंत्री फील गुड महशूस कर रहे हैं, जबकि उनकी स्थिति डब्बा गुल की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और कुछ मंत्रियों को छोड़ दें तो ज्यादातर मंत्रियों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। इसको लेकर पार्टी लगातार मंथन कर रही है। मंत्रियों का परफारमेंस जनता के बीच चिंताजनक है, जिसकी रिपोर्ट पार्टी के बड़े पदाधिकारियों तक पहुंच चुकी है। रोजगार, चिकित्सा, शिक्षा और भ्रष्टाचार आज भी आम जनता के बीच चर्चा के प्रमुख केन्द्र बिन्दु हैं। यह बात अलग है कि मुख्यमंत्री का सहज नेतृत्व आम जनता को भा रहा है, किसानों को धान की वास्तविक कीमत के साथ ही नक्सलवाद का खात्मा सरकार की बड़ी उपलब्धि बनकर सामने आई है। लेकिन अन्य मंत्रियों के हाथ खाली हैं, वह सरकार और अपनी उपलब्धि बताने में कहीं न कहीें बड़ी चूक करते नजर आ रहे हैं। सम्भवत: इन्हीं कारणों के चलते एक बार फिर मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर हलचल शुरु हो गई है।
पर्यटन सिर्फ उद्योग बनता दिख रहा
पर्यटन स्थल कब डवलप होंगे?
पूरे देश ने पर्यटन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रत्येक राज्य में पर्यटन स्थानों की लंबी सूची उपलब्ध है। वहां की सुविधाओं और पर्यटन से प्राप्त होने वाले राजस्व से इसकी वास्तविकता का आंकलन किया जा सकता है। लेकिन सरकारी आकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ राज्य आज भी पर्यटन में काफी पिछड़ा हुआ है? सरकार ने पर्यटन के विकास के लिए अनेकों कार्ययोजना बनाई, इसे उद्योग से भी संबोधित किया जाने लगा। लेकिन आज 25 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी धरातल में सन्नाटा है। यहां पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, यह सुनने को जरुर मिलता है, लेकिन देखने को आज तक नहीं मिल पाया?
वन आधारित कुछ पर्यटन को छोड़ दें, तो ज्यादातर की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। दरअसल इस विभाग को लगातार प्रशासनिक चोट का सामना करना पड़ा। यहां पर पदस्त होते ही अफसर पूर्व में किए गए ज्यादातर कार्यों को सिरे से खारिज कर देते हैं, और अपनी नई लाइन लेकर चल देते हैं। आज भी चित्रकोट जैसे प्रकृति की अद्भुत देन और वहां मौजूद सुविधाएं जग जाहिर हैं। नया पर्यटन स्थल कब डवलप होगा यह तो भविष्य के गर्त में हैं, लेकिन जो पहले से है उसे संवारने के काम में कोताही क्यों बरती जा रही है? इस पर मंथन करने की जरुरत है। इस विभाग में जूनियर अफसर की पदस्थापना और मनमानी के कारण अपार संभावनाओं के बाद भी पर्यटन विभाग को कोई खास उपलब्धि अब तक नहीं मिल पाई है। अन्य राज्यों की तुलना में हम पर्यटन में कहां खड़े हैं, इसके वास्तविक मूल्यांकन की जरुरत है। यहां पर्यटन को सिर्फ उद्योग नाम देने की नहीं, बल्कि वास्तविक विकास की जरुरत है।
सिंहदेव और गौरीशंकर पर मुहर?

प्रदेश में राज्यसभा की रिक्त हो रही दो सीटों पर दोनों प्रमुख दलों में आंशिक सहमति बनते दिख रही है। भाजपा की ओर से दो पूर्व विधानसभा अध्यक्षों की दावेदारी मजबूत दिख रही है। प्रेमप्रकाश पांडे और गौरीशंकर अग्रवाल का नाम प्रमुख रुप से उभरकर सामने आया है। यहां प्रेमप्रकाश पांडे बृजमोहन खेमा के नेता माने जाते हैं, वहीं गौरीशंकर अग्रवाल रमन सिंह के करीबी माने जाते हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा इन दोनों नेताओं में से किसी एक को दिल्ली भेज सकती है। दरअसल दोनों नेता पिछला विधानसभा चुनाव हार गए थे। उसके बाद राज्य में इन्हें न ही संगठन में जगह दी गई और न ही सरकार में जगह मिल पाई है। जिसके कारण इन दोनों नेताओं की दावेदारी प्रबल मानी जा रही है। वहीं भाजपा नेत्री सरोज पांडे की दावेदारी से भी इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन उनके भाई को राज्य सरकार में पहले से ही जगह दे दी गई है, जिसके कारण सरोज की संभावना कम मानी जा रही है। कांग्रेस की ओर से दावेदारों की लंबी फौज है। कांग्रेस से पूर्व सीएम भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व उप-मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, पूर्व मंत्री मोहन मरकाम और पीसीसी चीफ दीपक बैज समेत कई दावेदारों के नाम इन दिनों मीडिया की सुर्खियों में हैं। जिसमें से भूपेश बघेल और डॉ. चरणदास महंत वर्तमान में छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदस्य हैं। वहीं सिंहदेव और मरकाम विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाये थे। इस लिहाज से कांग्रेस राज्य में अपने विधायकों की संख्या कम करने पर जोर नहीं देगी। संभव है टीएस सिंहदेव या फिर मोहन मरकाम को राज्यसभा का प्रत्याशी घोषित कर दिया जाए।
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