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भारतमाला के बाद अब चंपारण
रायपुर से तकरीबन 50 किलोमीटर दूर स्थित चंपारण वैसे तो महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली (प्राकट्य स्थल) के रूप में प्रसिद्ध है। चंपारण एक प्रमुख वैष्णव तीर्थ स्थल है। लेकिन इस जगह की प्रसिद्धि में राज्य के बड़े अफसरों का विशेष योगदान है। दरअसल राज्य के बहुत से अफसरों ने चंपारण को इन्वेस्टमेंट के लिए राइट प्लेस का दर्जा दिया है। चंपारण के आस-पास कुछ आईएएस अफसरों ने कई एकड़ कृषि भूमि खरीदकर लंबा इन्वेस्ट किया है। वैसे भी चंपारण नवा रायपुर से भी महज 30 किलोमीटर की दूरी में स्थित है। ऐसे में यह स्थान आने वाले दिनों काफी उपयोगी साबित होगा। कौन सा स्थान जल्दी डवलप होगा, यह अफसरों से बेहतर भला कौन जानेगा। शायद इसीलिए यहां पर कई आईएएस अफसरों ने खूब इन्वेस्ट किया है। दरअसल किसी भी परियोजना के बारे में सबसे पहले अफसरों को ही जानकारी मिलती है। जानकारी मिलने के बाद ही जमीनों की खरीद-फरोख्त का मामला शुरु होता है। भारतमाला परियोजना इसका जीता-जागता उदाहरण है।
पुलिस कमिश्नर प्रणाली और विवाद
रायपुर का विकास जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसी तेजी से अपराध की गति बढऩा भी स्वाभाविक है। लेकिन विष्णु सरकार अपराध रोकने सकारात्मक पहल कर रही यह निश्चित ही सराहनीय विषय है और सरकार का यह दायित्व भी है। दरअसल यह बात हम इसलिए कह रह हैं, क्योंकि रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के पहले से ही क्षेत्र विवाद और अधिकार को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आम तौर पर जब कोई नई व्यवस्था शुरु की जाती है तो सवाल उठना भी लाजमी है। सवाल उठेंगे तभी तो व्यवस्थाओं पर सरकार सुधार करेगी। सुधार करना एक निरंतर प्रक्रिया भी है, संभवत: सरकार कमिश्नर प्रणाली को लेकर जो खामियां सामने आ रही हैं, उस पर मंथन भी कर रही होगी। लेकिन इस बीच यह बात निकलकर सामने आई है कि इसको लेकर आईएएस अफसर और आईपीएस अफसरों के बीच पॉवर को लेकर इंनटरनल वार चल रहा है, जिसके चलते पुलिस कमिश्नर प्रणाली के ड्राप्ट को कमजोर कर दिया गया है। खैर पॉवर और अधिकार की लड़ाई स्वाभाविक भी है, लेकिन यह व्यवस्था कमजोर न हो अब इसका पूरा दायित्व सरकार पर है। सरकार को सख्ती से बड़े महानगरों की भांति रायपुर में पुलिस तंत्र को मजबूत कर जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करना चाहिए। क्षेत्र और पॉवर के विवाद को सरकार क्रम वाई क्रम दुरस्त करने में सक्षम है। खैर रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर के रुप में बहुत ही सुलझे हुए अफसर आईपीएस संजीव शुक्ला को जिम्मेदारी सौंपी गई है। निश्चित ही शुक्ला के नेतृत्व में रायपुर पुलिस जनता के मापदंडों पर खरा उतरने का काम करेगी।
मंत्री को भनक नहीं और हो गई पोष्टिंग
मंत्रियों के कार्यकाल का आधा समय बीत चुका है। लेकिन अभी तक मंत्री और अफसरों के बीच विश्वास का पुल नहीं बंध पाया है। सरकार के मंत्री और उनके माहतत अफसरों के निर्णय में खुले तौर पर विरोधाभास दिख रहा है। हाल ही में आबकारी विभाग में अफसरों ने 80 उप निरीक्षकों की पोष्टिंग कर दी और विभागीय मंत्री को भनक तक नहीं लगी। मसला तब और बिगड़ गया जब मंत्री ने इस पोष्टिंग को कुछ ही घंटों में निरस्त कर दिया। दरअसल इन नियुक्तियों के बीच में विभागीय मंत्री और अफसर अब आमने-सामने हैं। मंत्री का कहना है कि इस मसले में अफसरों ने उन्हें विश्वास में नहीं लिया और न ही भारसाधक मंत्री से अनुमोदन लिया गया। इसके लिए विभागीय मंत्री ने दो अपर आयुक्तों को नोटिस भी जारी किया है। हालांकि अपर आयुक्तों का कहना है कि उन्होंने आबकारी आयुक्त को इस पूरे प्रकरण से अवगत कराया था, उसके बाद ही 80 उप निरीक्षकों की पदस्थापना की गई है। खैर अब किसने, किसे बताया या नहीं बताया से मामला उपर चल दिया है, विवाद गहरा गया है। लेकिन इस आदेश से यह बात जरुर छनकर सामने आई है कि सरकार के आधा कार्यकाल बीत जाने के बाद भी अफसरों और मंत्रियों की बीच तालमेल अभी तक नहीं बैठ पाया है।
स्कूल शिक्षा में कसावट लाने की तैयारी
राज्य सरकार स्कूल शिक्षा को सुदृढ़ करने पर जोर दे रही है। सरकार आगामी शिक्षा सत्र के पहले तकरीबन 5 हजार शिक्षकों की भर्ती करने जा रही है। इसके लिए संभवत: फरवरी माह में विज्ञापन भी जारी कर दिए जाएंगे। दरअसल राज्य की विष्णु सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। बीते वर्ष युक्तियुक्तकरण के तहत प्रदेशभर में शिक्षकों की कमी को दूर करने का प्रयास किया गया। अब आगामी सत्र में शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने 5000 पदों पर भर्ती की जाएगी। नए शिक्षा सत्र के पहले इन तमाम शिक्षकों की पदस्थापना भी कर दी जाएगी। राज्य सरकार व्यापम के माध्यम से शिक्षकों की भर्ती का आयोजन कर सकती है। वहीं 2023 की प्रतीक्षा सूची को इस भर्ती में मान्य नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है इससे ज्यादा से ज्यादा युवाओं को भाग लेने का अवसर मिलेगा।
बृजमोहन के बाद अब किसकी बारी
छत्तीसगढ़ में राज्य सभा की खाली हो रही दो सीटों को लेकर इन दिनों जोड़-तोड़ शुरु हो गई है। दोनों सीटों में भाजपा और कांग्रेस के एक-एक उम्मीदवार को मौका मिलने जा रहा है। अमूमन राज्यसभा को लेकर सत्ता पक्ष में खामोशी का माहौल दिखता है। लेकिन इस बार मसला कुछ जुदा दिख रहा है। दरअसल भाजपा की ओर से राज्यसभा मेंबर के लिए एक संसदीय विद्वान नेता का नाम उभरकर सामने आ रहा है। अदंरखाने में इस बात की इन दिनों जमकर चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि रायपुर के कद्दावर नेता बृजमोहन अग्रवाल को दिल्ली भेजने के बाद अब इन नेताजी पर नजर है। दरअसल नेताजी अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं, वह सवाल उठाते समय यह परहेज नहीं करते की सरकार उनके दल की है या विपक्षी दल की। शायद यह बात पार्टी के नीति निर्धारकों को खलने लगी है। हालांकि इसके पहले भी नेता जी को विधानसभा का उपाध्यक्ष बनाने की तैयारी थी। खैर वास्तव में यदि ऐसा हुआ तो एक सीट पर फिर विधानसभा चुनाव कराना पड़ जाएगा। हालांकि यह आज की भाजपा है यहां सब कुछ संभव है।
देर से ही सही लेकिन निर्णय सही ले रही सरकार
देर से ही सही लेकिन राज्य सरकार निर्णय साफ-सुथरा लेने का प्रयास कर रही है। सरकार ने हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार आर. कृष्णा दास को मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया है। कृष्णादास अब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को मीडिया के साथ-साथ अन्य मामलों पर भी परामर्श देंगे। दरअसल कृष्णादास को यह अहम जिम्मेदारी उनकी निर्विवाद छवि के कारण दी गई है। कृष्णादास संघ की पृष्ठिभूमि के होने के बावजूद किसी खेमा विशेष के कभी नहीं रहे। वह पत्रकारों के बीच भी अपने सहजता के लिए जाने जाते हैं। कृष्णादास ने कभी किसी खेमेबाजी की पत्रकारिता नहीं की, सभी के प्रति एक भाव लेकर चलने वाले कृष्णादास की यह खूबी आगे भी बरकरार रहेगी। वह पत्रकारों के बीच जितनी सहजता के रुप में जाने जाते हैं, उतना ही गंभीर पत्रकार हैं। निश्चित ही सरकार देर से ही सही लेकिन कई मामला में सही निर्णय ले रही है।
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