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एक अतिरिक्त मंत्री का मामला पहुंचा हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंण्डल के विस्तार के बाद मुख्यमंत्री समेत कुल 14 मंत्री हो गए हैं। जबकि विधि के जानकारों का मानना है कि मंत्रिपरिषद में भारत का संविधान के अनुच्छेद 164 (1 क) के तहत विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। छत्तीसगढ़ में कुल 90 विधायक हैं, और 90 का 15 प्रतिशत 13.50 होता है। मतलब 13 से अधिक यह संख्या नहीं हो सकती। हालांकि पिछले दिनों नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए राज्यपाल रमेन डेका को पत्र लिखकर एक अतिरिक्त मंत्री को हटाने की मांग की थी। अब यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। जिस पर चीफ जस्टिस के बेंच पर शुक्रवार को सुनवाई हुई है, वहीं सुनवाई की अगली तारीख 2 सितंबर निर्धारित की गई है। इस मामले पर रायपुर के सामाजिक कार्यकर्ता वासु चक्रवर्ती ने एक जनहित याचिका दायर की है। अधिवक्ता किशोर भादुड़ी और अभ्युदय सिंह ने याचिका पेश किया है। हालांकि इसी तर्ज में हरियाणा में भी मंत्री बनाए गए हैं, जिसका मामला भी हरियाणा हाईकोर्ट में अभी लंबित है। इतना ही नहीं 2017 में संसदीय सचिवों की नियुक्ति का मामला भी अभी तक सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इससे यह माना जा रहा है कि देर-सबेर यह सभी मामले क्लब हो सकते हैं और इसमें न्यायालय विधि सम्मत निर्णय ले सकता है।
बैज और महंत पद के काबिल नहीं?
पूर्व सीएम भूपेश बघेल के जन्म दिन के मौके पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रविन्द्र चौबे ने पार्टी संगठन और अनुशासन की धज्जियाँ उड़ाते हुए खुले मंच से बयान दिया है कि भूपेश बघेल को प्रदेश कांग्रेस का फिर नेतृत्व करना चाहिए। रविन्द्र चौबे कांग्रेस के कोई छोटे-मोटे कार्यकर्ता तो हैं नहीं, जाहिर सी बात है यह बयान उन्होंने बहुत सोच-समझकर दिया होगा, या उनसे दिलवाया गया होगा। चौबे के इस बयान के राजनीतिक मायने क्या हैं? क्या वर्तमान प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत पद के काबिल नहीं हैं? क्या उनके पार्टी के नेता रविन्द्र चौबे को बैज और महंत के नेतृत्व में भरोसा नहीं हैं? खैर कारण जो भी हो लेकिन रविन्द्र चौबे ने कांग्रेस की गुटबाजी को एकबार फिर सड़क पर ला दिया है। चौबे ने बैज और महंत की राजनीतिक सूझबूझ पर सवाल उठाते हुए एक बार फिर शांत पानी में पत्थर फेंकने का काम किया है। वहीं दीपक बैज ने रविंद्र चौबे को महाज्ञानी बताए हुए, अनुशासन समिति की बैठक बुलाने की बात कही है, जिसका कांग्रेसजनों को बेसब्री से इंतज़ार है।
संसदीय सचिवों की नियुक्ति
विष्णु सरकार जल्द ही संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर विचार कर रही है। दरअसल लंबे समय से बड़े नेताओं के दबाव के चलते मंत्रिमण्डल का विस्तार रुका हुआ था, जो बिना किसी विवाद के सम्पन्न हो चुका है। मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान भाजपा को जितने विरोध की आशंका थी, वैसा कुछ धरातल पर नजर नहीं आया। मंत्रिमण्डल की रेस में शामिल सभी सीनियर नेता वर्तमान दौर की राजनीति को कहीं न कहीं स्वीकार कर चुके हैं। मंत्री न बनने वाले ज्यादातर नेता अघोषित रूप से यह मान चुके हैं कि अब उनका समय जा चुका है। शायद यही कारण है कि मंत्रिमण्डल में जगह न मिलने के बाद भी विरोध रूपी एक स्वर भी बाहर नहीं आ सका, न ही मीडिया में कोई असंतोष की बात सामने आई। वहीं तीन मंत्रियों की शपथ के ठीक बाद मुख्यमंत्री विदेश प्रवास पर रवाना हो गए थे। शनिवार को मुख्यमंत्री अपने सफलतम विदेश दौरे के बाद वापस आ चुके है। माना जा रहा है इसी दरम्यान संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर मुहर लग जाएगी।
भयभीत कलेक्टर ?
कबीरधाम कलेक्टर राम गोपाल वर्मा का एक पत्र इन दिनों प्रशासनिक गलियारे में चर्चा का विषय बना हुआ। दरअसल कलेक्टर ने अपने ही जिले के एसपी को पत्र लिखकर कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही है। कलेक्टर ने अपने पत्र में कहा है कि 15 अगस्त 2025 को रात्रि तकरीबन 1:30 बजे 20 से 25 व्यक्तियों के एक समूह के द्वारा कलेक्टर निवास के पास आकर धरना दिया जा रहा था। उन्होंने कहा कि कलेक्टर निवास के पास ही जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा पुलिस अधीक्षक का निवास भी है। ऐसी स्थिति में रात्रि 1:30 से 4 बजे तक 20 से 25 व्यक्तियों का एक समूह शहर में घूमना एवं कलेक्टर निवास के पास आकर धरना देना अत्यंत गभीर है। कलेक्टर ने रात में 20 से 25 लोगों के एक समूह के रात्रि में घूमने में किसी अप्रिय घटना होने की आशंका भी जताई है और इस 20 से 25 लोगों के झुंड में घूमने वाले लोगों पर कार्यवाही करने की भी मांग की है। इतना ही नहीं पत्र में यह भी लिखा गया है कि इसके पूर्व भी 19 मई 2024 को भी इसी प्रकार 20 से 25 लोगों का एक समूह कलेकटर निवास के पास एकत्रित हो गए थे। अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह 20 से 25 लोगों का वह समूह किनका है? जो बार-बार कलेक्टर बंगला के पास घूमते रहते हैं। आखिर कलेक्टर इन समूह से इतने भयभीत क्यों है? आखिर रात्रि में ऐसी क्या घटनाएं हो रही हैं? या घटनाओं की आशंका है जिसको लेकर कलेक्टर अपने ही जिले के एसपी को पत्र लिखकर कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कह रहे हैं। 19 मई 2024 और 15 अगस्त 2025 को रात्रि में घूमने वाला समूह क्या एक ही हैं? आखिर वह कौन हैं? दरअसल कलेक्टर के पत्र को गभीरता से देखेंगे तो यह समझा जा सकता है कि कोई ग्रुप लगातार रात्रि में उनके निवास के आस-पास मंडराता रहता है, जिससे वह भयभीत है या वह अप्रिय घटना को लेकर आशंकित है और बार-बार पुलिस को पत्र लिख रहे हैं।
प्रेम, दिलराज और आलोक को नई जि़म्मेदारी
वन विभाग में पीसीसीएफ स्तर के साथ-साथ सीसीएफ स्तर में भी जल्द बदलाव होने जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि कांकेर सीसीएफ दिलराज प्रभाकर रायपुर सर्किल के नये सीसीएफ बनाए जा सकते हैं, वहीं मुख्यालय में पदस्थ आलोक तिवारी कांकेर के नए सीसीएफ बनाए जा सकते हैं। हालांकि सीसीएफ के लिए सतोविसा समाजदार का भी नाम दबे स्वर में उभरकर सामने आ रहा है, लेकिन उनके चांस फिलहाल कम दिख रहे हैं। वहीं एक माह बाद बिलासपुर सीसीएफ प्रभात मिश्रा भी रिटायर हो जाएंगे। दुर्ग सीसीएफ लगातार छुटिटयों पर चल रहे हैं। इसलिए वन विभाग में बड़ी सर्जरी हो सकती है। मुख्यालय में प्रेम कुमार को पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ की कमान सौंपी जा सकती है । साथ ही कुछ डीएफओ भी बदले जा सकते हैं।
डिस्टिलरी मालिकों का क्या?
राज्य में हुए शराब घोटाला में अफसर नेता और कारोबारी सभी सालाखों के पीछे बंद हैं। लेकिन डिस्टिलरी मालिकों तक अभी तक कानून का हाथ नहीं पहुंच पाया है। अब कानून के हाथ छोटे हो गए हैं या फिर डिस्टिलरी मालिकों की गर्दन लंबी, फिलहाल इस पर कुछ कहा नहीं जा सकता। लेकिन शराब घोटाले में जिस तरह से 22 अफसरों को रियायत दी गई उससे ज्यादा रियायत डिस्टिलरी मालिकों को दी जा रही है। यह हम नहीं कह रहे बल्कि जेल में बंद शराब कारोबारी अनबर ढेबर ने कहा है। दरअसल शराब घोटाले के प्रमुख आरोपी अनवर ढेबर ने एक याचिका दायर की है जिस पर कहा गया है कि जिन डिस्टिलरियों पर गड़बड़ी का आरोप है, जिनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है, वहां के मालिकों को आरोपी नहीं बनाया गया है। अनवर ढेबर ने याचिका के माध्यम से मांग की है कि डिस्टिलरी के मालिकों को भी आरोपी बनाया जाए। हालांकि डिस्टिलरी के मालिकों को नोटिस जारी होने की खबर है, लेकिन यह अदालत में हाजिर नहीं हुए। ढेबर ने जांच एजेंसियों के निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। अब देखना यह होगा कि आबकारी अफसरों की तरह यह डिस्टिलरी मालिक भी जांच एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर हो जाएंगे या फिर अनवर ढेबर की याचिका शराब घोटाले का नए मोड़ पर ले जाएगी।
विष्णु देव साय की स्वीकार्यता बढ़ी, सरल स्वभाव ने जीता जनता का भरोसा
इंडिया टुडे–C Voter के Mood of the Nation (MOTN) सर्वे के अनुसार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कामकाज से अपने गृह राज्य में 41.9 प्रतिशत उत्तरदाता अगस्त 2025 में संतुष्ट बताए हैं। यह आंकड़ा फरवरी 2025 के 39 प्रतिशत से बढ़कर है । यानी हालिया सर्वे में सीएम के प्रति संतुष्टि में लगभग 2.9 प्रतिशत अंक की बढ़त दर्ज की गई है। बड़े राज्यों के वर्ग में यह दूसरा स्थान है। पहले स्थान पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा हैं। दरअसल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का सरल स्वभाव जनता को अब भाने लगा है । उनकी टीम पूरी पारदर्शिता के साथ योजनाओं को जनता तक पहुँचा रही है, साथ ही हितग्राहियों को योजनाओं का वास्तविक लाभ भी मिल रहा है। लगभग 18 माह के शासनकाल में ही सीएम विष्णुदेव साय ने मोदी की गारंटी के ज्यादातर वादे पूरे किए हैं।
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