हलचल… मनपसंद, सबकी पसंद ?

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फंस गया दक्षिण?

आखिरी-आखिरी रायपुर नगर दक्षिण का उप चुनाव काफी रोमांचक हो गया। मतदान सम्पन्न होने के बाद यह कहा जाने लगा है कि रायपुर दक्षिण का उपचुनाव फंस गया है। वहीं बीते साल हुए विधानसभा चुनाव की अपेक्षा इस उप-चुनाव में मतदान प्रतिशत में तकरीबन 11 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसके कारण उपचुनाव में पेंच फंसने की बात से इनकार भी नहीं किया जा सकता। वोटिंग प्रतिशत कम होने की वजह से रायपुर नगर दक्षिण उपचुनाव के परिणाम भी चौकाने वाले हो सकते हैं। हालांकि अभी तक ज्यादातर उपचुनावों में सत्ताधारी दल को विजयश्री मिलते रही है। 2008 से लेकर अब तक के विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो कांग्रेस के कन्हैया अग्रवाल और भाजपा के बृजमोहन अग्रवाल के बीच सबसे कड़ा मुकाबला रहा, आकड़े भी इस पर मुहर लगाते दिख रहे हैं। कांग्रेस के कन्हैया अग्रवाल को 60093 वोट मिले थे। जबकि अन्य वर्ष हुए विधान सभा चुनावों में रायपुर दक्षिण से कांग्रेसी प्रत्याशी 50 हजार मतों का आकड़ा पार नहीं कर पाये। वहीं दूसरे पहलू की बात की जाए तो अब तक कांग्रेसी प्रत्याशी महंत राम सुंदरदास की हार सबसे ज्यादा मतों से हुई। उस स्थिति में भी कांगे्रस 40 हजार वोट के आकड़े को पार कर गई, महंत राम सुंदरदास को 41500 वोट मिले। कहने का आशय यह है कि रायपुर नगर दक्षिण में तकरीबन 40 हजार वोट कांग्रेस के फिक्स नजर आ रहे हैं। वहीं 35 साल बाद भाजपा की ओर से बृजमोहन अग्रवाल की जगह यहां से अन्य प्रत्याशी सुनील सोनी मैदान में हैं। यह बात अलग है कि बृजमोहन अग्रवाल ने खुले मंच से कहा कि चुनाव सुनील सोनी नहीं बल्कि मै लड़ रहा हूं,। बहरहाल जनता ने बृजमोहन की बात पर कितना अमल किया है, यह तो अब चुनाव परिणाम सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

वीएन अम्बाड़े, व्ही श्रीनिवास राव या फिर और कोई?

राज्य के वन बल प्रमुख व्ही श्रीनिवास राव ने सेंन्ट्रल में डीजी फारेस्ट के लिए अप्लाई किए हैं। वहीं मध्यप्रदेश से सीनियर आईएफएस वीएन अम्बाड़े भी इस रेस में शामिल हैं। 1988 बैच के अफसर वीएन अम्बाड़े भी काफी जोर लगा रहे हैं। दरअसल वीएन अम्बाड़े 10 साल तक मिनिस्ट्री में रह चुके हैं। वह नागपुर जोन में लंबे समय तक सेवायें देते रहे हैं। इसके साथ ही अम्बाड़े 1988 बैच के अफसर हैं, जबकि व्ही श्रीनिवास राव 1990 बैच के अफसर हैं। वहीं दोनों अफसरों की उम्र में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है, दोनों का बर्थ ईयर 1966 है। ऐसे में अम्बाड़े को सीनियरटी और सेन्ट्रल मिनिस्ट्री में काम करने के अनुभव का लाभ मिल सकता है। हालांकि छत्तीसगढ़ के वन बल प्रमुख व्ही श्रीनिवास राव भी पूरी ताकत लगा रखे हैं। व्ही श्रीनिवास राव की दिल्ली पकड़ काफी मजबूत है, इसके साथ ही संघ के एक बड़े पदाधिकारी का भी पूरा साथ राव को मिल रहा है। बहरहाल डीजी फारेस्ट की रेस व्ही श्रीनिवास राव जीतने में सफल होते हैं, या फिर वीएन अम्बाड़े को मौका मिलता है या बाजी और कोई मार ले जाएगा फिलहाल कुछ कहा नहीं जा सकता।

जनता के बीच मुख्यमंत्री छवि

सरकार के 11 माह बीतते ही राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की लोकप्रियता आम जन के बीच बढऩे लगी है। दरअसल कुछ माह पहले विष्णु सरकार के लिए यह धारणा बनना शुरु हो गई थी कि राज्य सरकार स्लो चल रही है, विपक्ष भी इस बात को जनता के बीच जोर-शोर से प्रचारित करना शुरु कर दिया था। लेकिन एक माह के अंतराल में मुख्यमंत्री और सरकार की छवि में अचानक परिवर्तन दिखने लगा है, जिसको जनता के साथ-साथ अफसरशाही भी महशूस कर रही है। पिछले एक माह में मुख्यमंत्री की विश्वासनीय, लोकप्रियता का ग्राफ आदिवासी इलाकों के साथ-साथ मैदानी इलाकों में भी जबरजस्त बढ़ा है। यहीं नहीं पार्टी के वह नेता जो एक साल बाद विष्णु सरकार के मूल्यांकन की प्रतीक्षा कर रहे थे, अब वह भी दांतों तले उंगली दबाना शुरु कर दिए हैं। निश्चित ही मुख्यमंत्री और उनके सचिवालय की रणनीति जनता और पार्टी के बीच कारगर साबित हो रही है।

सन्नाटा क्यों है भाई?

रायपुर दक्षिण उपचुनाव के परिणाम आते ही मंत्रीमंडल विस्तार के संकेत मिल रहे हैं। लेकिन मंत्री पद की लालसा रखने वाले नेताओं के बीच सन्नाटा पसरा हुआ है। कहा जा रहा है कि रायपुर सम्भाग से एक विधायक को जगह मिलने जा रही है, वहीं दुर्ग सम्भाग के भी एक विधायक पर लगभग मुहर लग चुकी है, औपचारिक ऐलान होना बाकी है। दरअसल विष्णु सरकार में रिक्त दो मंत्री पद इसी साल भरे जाने हैं। ऐसे में पार्टी के दिग्गज नेताओं के बीच सन्नाटा पसरा हुआ है। रमन सरकर में मंत्री रहे अमर अग्रवाल, राजेश मूणत, पुन्नुलाल मोहिले और अजय चन्द्राकर को जगह मिलेगी या नहीं, इस पर चारों ओर चर्चा छिड़ी हुई है, लेकिन पार्टी और इन नेताओं के बीच सन्नाटा पसरा हुआ है।

महिलाओं के बाद किसानों के बीच सरकार की पैठ

कांग्रेस की सरकार रहते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल किसानों के बीच काफी लोकप्रिय थे। पूरे पांच साल तक भूपेश बघेल और पूरी सरकार अपने आप को किसान हितैषी बताते रही, लेकिन धान खरीदी शुरु होते हीे वारदाना को लेकर भूपेश सरकार में कोहराम मच जाता था। जिस पर विष्णु सरकार ने बेहतरीन तरीके से नियंत्रण बनाया है, खरीदी के तीन दिन बीत जाने के बाद भी कहीं भी वारदाने, टोकन और अनियंत्रित भीड़ की खबर देखने, सुनने और पढऩे को नहीं मिली। वर्तमान में भूपेश सरकार से ज्यादा कीमत पर विष्णु सरकार किसानों की धान खरीद रही है, वो भी बिना किसी झंझट के, ना टोकन के लिए लाइन है, न ही वारदाने की कोई समस्या। कुल मिलाकर महतारी वंदन योजना के माध्यम से भाजपा सरकार राज्य की महिलाओं के बीच पहले ही पैठ बनाने में सफल हो चुकी है, अब विष्णु सरकार किसानों के बीच भी विश्वास हासिल करने में सफल होते नजर आ रही है।

भूपेश का क्या?

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपनी आक्रामक राजनीति के लिए चर्चित हैं। यह बात अलग है कि वर्तमान राजनीतिक हालातों को देखते हुए छत्तीसगढ़ में भूपेश की राजनीतिक धार कम हुई है। कुछ हद तक भूपेश खामोश हैं। लेकिन क्या भूपेश आगे भी खामोश रहेंगे? शायद नहीं। दरअसल भूपेश बघेल को कांग्रेस ने महाराष्ट्र चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है, भूपेश विदर्भ क्षेत्र के पर्यवेक्षक बनाए गए हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल महाराष्ट्र में काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों और समीक्षा को देखेंगे-पढ़ेंगे और सुनेंगे तो विदर्भ में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के अच्छे परफार्म की बात कही और सुनी जा रही है। यदि वास्तव में भूपेश विदर्भ क्षेत्र की सीटों में सफलता दिलाने में कामयाब होते हैं, तो पार्टी के अन्दर एक बार फिर भूपेश का कद बढऩा तय है। सम्भवत: ब्रेक के बाद भूपेश बघेल फिर राज्य में आक्रामक राजनीति करते नजर आंयेगे।

मनपसंद, सबकी पसंद ?

छत्तीसगढ़ में इन दिनों मनपसंद की जमकर चर्चा है। मनपसंद अपने नाम अनुरूप लोगों को पसंद की मदिरा उपलब्ध कराएगी। अब पसंदीदा मदिरा पीने से कोई रोक नहीं सकता, घर बैठे ही अपनी पसंद की मदिरा हासिल की जा सकती है। हालांकि विपक्षी दल कांग्रेस भी मनपसंद का कोई खास विरोध करते नजर नहीं आ रही। दरअसल शराबबंदी को लेकर भूपेश सरकार पर मुकरने का आरोप है, विपक्ष में रहते हुए भाजपा ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी का झंडा बुलंद किया था। लेकिन अब कांग्रेस सत्ता से बेदखल हो चुकी है। राज्य में भाजपा की सरकार है, शराब में हुए घोटालों को देखते हुए वित्तीय पारदर्शिता के लिए यह ऐप कारगर साबित हो सकता है। बहरहाल मनपसंद दोनों ही दलों में से किसी को नापसंद नहीं नजर आ रहा है।

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