भर्राशाही व्यवस्था को लेकर 12 जुलाई को अतिथि व्याख्याता करेंगे आंदोलन 

शिवरीनारायण – प्रदेश के शासकीय महाविद्यालय में कार्यरत अतिथि व्याख्याता अपनी तीन सूत्रीय मांग नई भर्ती /स्थानांतरण से छटनी किए गए अतिथि व्याख्याताओं की पुनः नियुक्ति, मासिक वेतन के साथ 12 माह की पूर्णकालीन सेवा, 65 वर्ष की आयु तक स्थाई नौकरी की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिये हैं अतिथि व्याख्याताओं का कहना है कि उच्च शिक्षा विभाग 2011- 12 से कालखंड व्यवस्था के माध्यम से सिर्फ शोषण कर रहा है 5 से 6 माह की नौकरी, निर्धारित मानदेय का भुगतान तक नही किया जाता और न ही जॉब सुरक्षा है। जबकि अतिथि व्याख्याता के संबंध में यूजीसी द्वारा जनवरी 2019 में 1500 रुपए प्रति व्याख्यान एवं 50000 हजार रुपए मासिक वेतन हेतु गाइडलाइन जारी किया है जिसका भी पालन नहीं किया जाता है अपनी समस्याओं को लेकर छत्तीसगढ़ के लगभग समस्त पक्ष एवं विपक्ष के विधानसभा सदस्यों, मुख्यमंत्री, विभागीय मंत्री, कैबिनेट मंत्री से लेकर समस्त आयोग के अध्यक्ष(कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त) पूर्व राज्यसभा सांसद एवं संगठन के अन्य पदाधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याओं को लेकर गए, सदस्यों ने हमारी मांग को जायज बताते हुए उच्च शिक्षा मंत्री माननीय उमेश पटेल जी और उच्च शिक्षा विभाग को पत्राचार भी किए किंतु इस शोषणकारी व्यवस्था का अंत नहीं हो पाया। इन सभी बातों से आहत होकर हम अपनी तीन बुनियादी मांग एवं व्यवस्था में सुधार के लिए आंदोलन करने को मजबूर हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के शासकीय महाविद्यालय में विभिन्न विषयों के सहायक प्राध्यापक एवं प्राध्यापक के विरुद्ध शासन द्वारा अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति की जाती है और उन्हें प्रति कार्य दिवस एक कालखंड के हिसाब से 300 रुपए अधिकतम चार कालखंड 1200 रुपए मानदेय भुगतान किया जाता है। नवीन महाविद्यालय में एक कालखंड होने की स्थिति में सिर्फ 300 रुपए का ही भुगतान होता है अतिथि व्याख्याता को अवकाश की पात्रता नहीं एवं महिला अतिथि व्याख्याता को मातृत्व अवकाश भी नहीं मिलता और अतिथि व्याख्याताओं का दुर्भाग्य देखिए शासकीय अवकाश के साथ स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस का मानदेय भी काट दिया जाता है।


अतिथि व्याख्याताओं का कहना है कि जब तक कालखंड व्यवस्था समाप्त नहीं किया जायेगा ऐसी स्थिति बनी रहेगी। मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से भी हमारे तीन सूत्रीय मांग के संबंध में पत्र जारी किया है लेकिन उच्च शिक्षा विभाग की गलत नीतियों के कारण ही हम लोग आर्थिक, मानसिक शोषण का शिकार हो रहे हैं एवं मौसमी बेरोजगारों की तरह जीवन व्यतीत कर रहे हैं। वर्तमान समय में संवेदनशील मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार सभी अनियमित/संविदा और दैनिक वेतन भोगी की जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मांगी जा रही है किंतु उच्च शिक्षा विभाग हमारी जानकारी को छिपा कर निरंक भेज रहे हैं। महाविद्यालयीन अतिथि व्याख्याताओं का छत्तीसगढ़ के यशस्वी, संवेदनशील मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी, छत्तीसगढ़ शासन से यही गुहार है कि सभी मांगों पर संवेदनशीलता से संज्ञान लें एवं समस्त आर्थिक ,मानसिक समस्या को देखते हुए 12 माह मासिक वेतन, सेवा से हटाए गए साथियों की व्यवस्था के साथ 65 वर्ष तक जॉब सुरक्षा चाहते है। अतिथि व्याख्याता शासन की सकारात्मक पहल न होने और राज्य के समस्त मंत्रियों से मिलने के पश्चात भी इनके हित में कदम न उठाने की वजह से इन्हें आंदोलन का सहारा लेना पड़ रहा है, ये छत्तीसगढ़ में अन्य राज्यों की तरह सम्मानजनक स्थिति चाहते है।

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