दुर्ग। दुर्ग निगम के गोठान में इन दिनों गोबर के कंडे बनाया जा रहा है। दरअसल गोठान संचालित करने वाली महिला स्व सहायता समूह को इस बार होलिका दहन के लिए कंडे का आर्डर मिला है।
स्व सहायता समूह द्वारा होलिका दहन करने वाली शहर की अन्य समूहों से भी संपर्क किया जा रहा है और उन्हें होली पर लकड़ी के बजाए कंडे से होली जलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
दुर्ग निगम की गोठान का संचालन कल्याणम महिला स्व सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है। समूह द्वारा अब तक गोबर से गोनाइल,गोबर के लकड़ी,गमला,छोटे साइज के कंडे बनाने का ही काम किया जा रहा है। लेकिन इस होली में समूह को होलिका दहन के लिए कंडे का आर्डर मिला है। पहली बार होलिका दहन के लिए कंडे का आर्डर मिलने से समूह की महिलाएं उत्साहित हैं।
वे होलिका दहन के लिए बड़े साइज की कंडे बना रही हैं। होलिका दहन करने वाली चार समूहों ने अब तक कंडे के लिए आर्डर किया है। वहीं महिला स्व सहायता समूह की सदस्य इससे उत्साहित होकर शहर में होलिका दहन करने वाली अन्य समितियों से भी संपर्क कर रही है।
उन्हें होलिका दहन के लिए लकड़ी के बजाए कंडे उपयोग में लाए जाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके फायदे भी बताए जा रहे हैं। समूह द्वारा करीब आठ हजार कंडे बनाकर रखा गया है।
लगातार बढ़ रहा है चलन
लकड़ी के बजाए कंडे से होली जलाने का चलन लगातार बढ़ रहा है। दुर्ग में मां सत्तीचौर दुर्गोत्सव समिति सहित कई और ऐसी समितियां हैं जो लंबे समय से होलिका दहन में कंडे का उपयोग करते आ रहे हैं। लकड़ी को जलने में भी समय लगता है। कई बार होलिका दहन में जलाई गई लकड़ियों की ठूठ पूरी तरह जल नहीं पाती।
वहीं कंडे आसानी से जल जाते हैं। इससे पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान भी नहीं पहुंचता। महिला समूह द्वारा होलिका दहन करने वाली समितियों को कंडे से होलिका दहन करने के फायदे भी बताया जा रहा है। वैसे भी लकड़ी आसानी से नहीं मिलती है। मिलती भी है तो इसकी कीमत अधिक रहती है।
होली में पहली बार महिला समूह को होलिका दहन के लिए कंडे बनाने का आर्डर मिला है। अभी समूह के पास गिनती के ही समितियों ने आर्डर किया है। लेकिन समूह की महिलाएं शहर के अन्य समितियों से संपर्क कर उन्हें कंडे से होली जलाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।