ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर मक्का की खेती में बढ़ा किसानों का रुझान

कांकेर। जिले के विकासखंड भानुप्रतापपुर के अंतर्गत ग्राम नरसिंगपुर कनेचुर भैंसाकान्हार-डू में राष्ट्रीय विकास योजनांतर्गत 50 हेक्टेयर क्षेत्र में लगी मक्का फसल का कृषि बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक महादेव ध्रुव द्वारा निरीक्षण किया गया। उन्होंने उपस्थित कृषकों से संवाद कर पीएम राष्ट्रीय कृषि विकास योजनांतर्गत ग्रीष्मकालीन धान के बदले मक्का फसल लगाने एवं अन्य वैकल्पिक फसलों को अपनाने हेतु प्रेरित किया। साथ ही इस योजना से मिल रही लाभों के बारे में कृषकांे से जानकारी ली। इसके अलावा क्षेत्र के अन्य ग्रामों के कृषकों को भी ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर मक्का फसल लगाने के प्रोत्साहित करने कृषि अधिकारियों को निर्देशित किया।

वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ने बताया कि उपसंचालक कृषि के मार्गदर्शन में ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर मक्का एवं अन्य वैकल्पिक फसलों को अपनाने विभाग द्वारा लगातार प्रयास जारी है। क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर मक्का की खेती में किसानों का रूझान बढ़ा है। इस वर्ष नरसिंगपुर के सिंचाई साधन वाले 75 प्रतिशत किसानों द्वारा पहली बार ग्रीष्म धान के स्थान पर मक्के की फसल अपने खेतों मे लगाई गई है। निरीक्षण के दौरान ग्राम नरसिंगपुर के किसान कृपाराम कमरो ने बताया पिछले वर्ष 5 एकड़ में धान फसल लगाया था, जिसमें लागत अधिक और दाम कम मिला। एक एकड़ में धान फसल से आय 15 हजार हुआ, जबकि मक्का फसल का बाजार भाव अच्छा है। उन्नत तरीके से खेती करने पर मक्का फसल से प्रति एकड़ 40 से 45 क्ंिवटल तक उपज मिल जाता है।

इस प्रकार प्रति एकड़ 30 से 40 हजार रूपए तक का शुद्ध आय मिलती है जो धान के तुलना में दोगुनी है। इसी तरह किसान मन्नूराम मरकाम ने बताया कि पिछले गर्मी में 4 एकड़ में धान फसल लिया था, बिजली की कटौती लो वोल्टेज के कारण फसल बर्बाद हो गई। इस वर्ष कृषि विभाग के सलाह से पीएम राष्ट्रीय कृषि विकास योजनांतर्गत ग्रीष्म धान के बदले मक्का की फसल लगाई है। मक्का फसल में धान की तुलना में पानी बहुत ही कम लगता है और फसल आसानी से पककर तैयार हो जाती है। इसी तरह कनेचुर के किसान राजकुमार कुरेटी ने आधी जमीन में मक्का एवं आधे में दलहन-तिलहन की फसल लगाई है। इस अवसर पर कृषि सभापति, विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं क्षेत्र के कृषक मौजूद थे।

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