वर्तमान परिवेश में सड़कों के किनारे ज्वलंत विषयो पर उषा का अपना कथन-
सक्ती-कर्नाटक राज्य के मैसूर शहर की प्रसिद्ध रचनाकार एवम क्रिएटिविटी कैफे की डायरेक्टर उषा केडिया ने अपनी भावनाएं पंक्तियों के माध्यम से व्यक्त की है
रात के अंधेरो में कुछ दीये जल रहे है,उजाले में गुम हुए कुछ दीये जल रहे है
मंज़र को पाने की ललक में दिन रात चल रहे है,समंदर की तरफ़ कुछ कारवाँ आगे बढ़ रहे है
ज़मीं से आसमा को छूने कुछ मासूम चल रहै है,सपने अधूरे पूरे करने कुछ ज़िंदादिल चल रहे है
झोंपड़ियों में लालटेन की रोशनी में सितारे चमक रहे है,भूख को मिटाने भूखे पेट बच्चें पढ़ रहे है
दावतों में किस क़दर अन्न को व्यर्थ कर रहे है,नज़र उठाकर देख ये ख़ुद ग़रज़ इंसान
ग़रीब बच्चें एक- एक रोटी को तरस रहै हैं,कोई जूठन तो कोई पानी पी कर सड़कों पर सो रहे हैं
