दिल्ली,नोएडा और मेरठ में 10 हजार में मिल रहे फर्जी मीडिया कार्ड

रायपुर/दिल्ली। दिल्ली,नोएडा और मेरठ सहित कई बड़े शहरों में 10 हजार में फर्जी मीडिया कार्ड मिल रहे है। जिसमें बकायदा छग शासन का logo के साथ जनसंपर्क अधिकारी दिल्ली (ज्वॉइन डॉयरेक्टर) के नाम से हस्ताक्षर लगा हुआ है। इस मामले में सच्चाई जनाने JSR टीम द्वारा जनसंपर्क विभाग के अफसरों से संपर्क किया जा रहा है। बता दें कि फर्जी मीडिया कार्ड सामने आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। जिसके बाद कई तरह की चर्चा होने लगी है। जिन शहरो में यह कार्ड मिल रहे है वहां के स्थानीय पुलिस को आगाह किया जा रहा है। फर्जी मीडिया कार्ड के सहारे वसूली, ब्लैकमेलिंग सहित कई काले कारनामें किए जाने की आशंका भी है। इससे जुड़े कार्ड जनता से रिश्ता के हाथ लगा है। जो मीडिया कार्ड दीपक के नाम से जारी हुआ है। कार्ड नंबर भी दर्शाया गया है।

दिल्ली निवासी जनता से रिश्ता के पाठक ने यह कार्ड ऑनलाइन व्हाट्सअप में भेजा है। हमारी टीम द्वारा सच्चाई का पता लगाया जा रहा है। प्रदेश में पदस्थ जनसम्पर्क विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस तरह का कार्ड अब तक जारी नहीं किया गया है। पूरी तरह से फर्जी है। आयुक्त और अपर संचालक जनसंपर्क को इसकी जानकारी JSR टीम द्वारा दी गई है। ताकि फर्जी मीडिया कार्ड जारी करने वाले गिरोह का पता लगाया जा सके।
बेरोजगारों का विश्वास जीतने के लिए आरोपी फ़र्ज़ी कार्ड बनाने वाले छत्तीसगढ़ भवन और छत्तीसगढ़ निवास छत्तीसगढ़ सदन के आस पास ही यह कैंटीन में बुलाकर ये बता दिया जाता है कि ये हम सेटिंग से अधिकारियों की मिलीभगत से ये कार्ड आपको बनाकर दे रहे हैं और यह कार्ड ओरिजिनल है इस तरीक़े का गिरोह अपना फ़र्ज़ी कार्ड बेचने का कार्य सुचारु रूप से कर रहा है प्रति कार्ड 10-15 हज़ार रुपये में बेचा जा रहा है विश्वास ज़माने के लिए दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ भवन के कुछ कर्मचारी और सदन के कुछ कर्मचारी संघ के साथ दोस्ती भी दिखाई जाती है और भवन की कैंटीन का उपयोग किया जा रहा है छत्तीसगढ़ पुलिस इसको गंभीरता से ले का अपराध दर्ज कर जाँच करना अनिवार्य है तभी सच्चाई पता चलेगा गिरोह में कौन कौन लोग शामिल है और कौन सा शासकीय कर्मचारी भी शामिल है जिसके साये में इस तरह का फ़र्ज़ी कार्ड बनाए जा रहे जनता से रिश्ता की टीम ने जब पता लगाया पूरे गिरोह का ख़ुलासा पुलिस चाहे तो मिनटों में कर सकती है छत्तीसगढ़ भवन और सदन के आस पास कर्मचारियों की कुछ कमजोरियों के कारण इस तरह के कार्ड बनाने वाले गिरोह दिल्ली में सक्रिय है।

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