‘एशिया में मृत्य दर बढ़ा सकती है खतरनाक लू..’, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

नई दिल्ली: इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) के वर्किंग ग्रुप II की “क्लाइमेट चेंज 2022: इम्पैक्ट्स, एडाप्टेशन एंड वल्नरेबिलिटी” नाम से मार्च में एक रिपोर्ट सामने आई थी। इस रिपोर्ट में पहले ही यह संकेत दिया गया था कि एशिया अत्यधिक गर्मी के चलते उच्च मानव मृत्यु दर का सामना कर रहा है। रिसर्च के लेखकों ने कहा था कि जलवायु परिवर्तन एशिया में लू, बाढ़, सूखा और वायु प्रदूषकों जैसे खतरों को और ज्यादा बढ़ा रहा है।

इन खतरों के कारण एशिया में वेक्टर-जनित और जल-जनित बीमारियों, अल्पपोषण, मानसिक विकार और एलर्जी रोग बढ़ रहे हैं। सर्व-कारण मृत्यु दर के अलावा, उच्च तापमान के साथ संक्रमण, सांस संबंधी बीमारी, मधुमेह और संक्रामक रोग से होने वाली मौतों के साथ ही शिशु मृत्यु दर में भी इजाफा होता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारी बारिश और तापमान में बढ़ोतरी से उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय एशिया में डायरिया संबंधी बीमारियों, डेंगू बुखार और मलेरिया का जोखिम बढ़ जाएगा। लगातार अधिक गर्म दिन और तेज लू एशिया में गर्मी से जुड़ी मौतों को बढ़ाएंगे।

नीति निर्माताओं के लिए रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, ‘इकोसिस्टम, लोगों, बस्तियों और बुनियादी ढांचे पर जलवायु और मौसम की चरम सीमाओं का व्यापक असर देखा गया है। यह वृद्धि जलवायू परिवर्तन के परिणामस्वरूप हुई है, जिसमें जमीन और समुद्र में गर्म चरम सीमा, भारी वर्षा की घटनाएं, सूखा और भीषण गर्मी का मौसम शामिल है।’ ये हीटवेव लगभग निश्चित रूप से मृत्यु दर और मोरबिडिटी में वृद्धि करेगी, पारिस्थितिकी तंत्र को नीचा दिखाएगी, फसल की विफलता और उत्पादकता और आर्थिक उत्पादन की हानि का सबब बनेगी।

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