चारधाम देवस्थानम बोर्ड पर आज बड़ा फैसला ले सकते है सीएम धामी

देहरादून: आज चारधाम देवस्थानम बोर्ड पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बड़ा कदम उठा सकते हैं। दो वर्ष पूर्व त्रिवेंद्र सरकार के वक़्त  चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड अस्तित्व में आया था। तीर्थ पुरोहितों, हकहकूकधारियों के विरोध तथा कांग्रेस एवं आप के बोर्ड को मसला बनाने से सरकार पर दबाव है। 2022 के चुनाव को देखते हुए सरकार की कोशिश रहेगी कि तीर्थ पुरोहितों व हकहकूकधारियों के विपरीत कोई निर्णय लिया जाए। जिससे कहा जा रहा है कि धामी सरकार त्रिवेंद्र सरकार में लिए गए निर्णय को पलट सकती है।
वही पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने वर्ष 2019 में श्राइन बोर्ड की तर्ज पर चारधाम देवस्थानम बोर्ड बनाने का निर्णय लिया। तीर्थ पुरोहितों के विरोध के बाद भी सरकार ने सदन से विधेयक पारित कर अधिनियम बनाया। चारधामों के तीर्थ पुरोहित तथा हकहकूकधारी आंदोलन पर उतर आए, मगर त्रिवेंद्र सरकार अपने निर्णय पर अड़ी रही।
वही सरकार का तर्क था कि बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री धाम सहित 51 मंदिर बोर्ड के अधीन आने से लोग सुविधाओं के लिए अवस्थापना विकास होगा। राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के पश्चात् सीएम बने तीरथ सिंह रावत ने भी जनभावनाओं के अनुरूप देवस्थानम बोर्ड फैसला लेने की बात कही थी, मगर उनके कार्यकाल में देवस्थानम बोर्ड पर सरकार आगे नहीं बढ़ पाई। फिर नेतृत्व परिवर्तन के पश्चात् सीएम बने पुष्कर सिंह धामी ने तीर्थ पुरोहितों के विरोध को देखते हुए उच्च स्तरीय कमेटी बनाने का ऐलान किया। पूर्व सांसद मनोहर कांत ध्यानी की अध्यक्षता में समिति का गठन किया। इस समिति में चारधामों के तीर्थ पुरोहितों को भी सम्मिलित किया। अब समिति की आखिरी रिपोर्ट का मुआयना कर मंत्रिमंडलीय उप समिति ने भी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी दी है। अब इस पर सरकार को निर्णय लेना है।

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